लुधियाना में सी.ए.ए. के खिलाफ विशाल कैंडल मार्च में सभी धर्मो के लोग शामिल हुए

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10 January 2020 (Publish: 04:40 PM IST)

भारत की एकता और अखंडता को काले कानून के नाम पर टूटने नहीं देंगे- शाही इमाम पंजाब

लुधियाना 10 जनवरी (मेराज़ आलम) बीती रात 10 बजे फील्ड गंज चौंक स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद से जगराओं पुल तक हजारों लोगों ने केंद्र सरकार के काले कानून और जे.एन.यू. में की गई गुंडागर्दी के खिलाफ विशाल कैंडल मार्च निकाला गया। मार्च की अगुवाई शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी कर रहे थे उनके साथ एलाइंस ऑफ सिख के सरदार परमपाल सिंह, सरदार गुरप्रीत सिंह विंकल, ईसाई भाईचारे से अलीशा मसीह, बी.अन फैड्रिक पादरी साहिब, श्री नरेश धींगान, रमनजीत लाली, बलजीत सिंह बिंद्रा समेत बड़ी संख्या में हिन्दू मुसलमान सिख ईसाई और दलित भाईचारे ने हिस्सा लिया। कैंडल मार्च जामा मस्जिद से शुरू होकर सुभानी बिल्डिंग, सी.एम.सी. रोड , कामरान रोड-जेल रोड से होता हुआ जगराओं पुल पहुंचा।

इस मार्च को संबोधित करते हुए शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान लुधियानवी ने कहा कि आज देश भर में सभी धर्मो के लोगों का एक साथ रोष प्रदर्शन में आना इस बात का ऐलान है कि कोई भी काला कानून हमें धर्म के नाम पर बांट नहीं सकता , उन्होंने कहा कि वह कान खोल कर सुन लें हम उनके वंश है जिन्होंने अंग्रेजो के खिलाफ इस धरती से अनेकता में एकता बना कर देश आज़ाद करवाया था, शाही इमाम ने कहा कि जे.एन.यू में जिन बच्चों को मारा पीटा गए वह मुस्लिम नहीं है, इस काले कानून को धर्म से जोडऩे वाले नाकाम हो गए है, सरदार परमपाल सिंह ने कहा कि आज इंकलाब के नारे हमें शहीद भगत सिंह की याद दिला रहे हैं की इन काले अंग्रेज के खिलाफ लडऩा सब का फर्ज हो गया है। उन्होंने कहा कि सिख मुस्लिम और हिन्दू कभी भी अलग नहीं हो सकते सत्ता वालों का गरूर काला इतिहास बन के ख़तम हो जाएगा।

नरेश धींगान ने कहा कि यह देश सब का है किसी एक की जागीर नहीं कोई यह बताएगा की कौन यहां रहेगा कौन नहीं। धीगान ने कहा कि आज सी.ए.ए. में धर्मों कि व्याखय करने वाले कल को बाक़ी वर्गों को देश निकाला देने की साज़िश रच रहे हैं, नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उस्मान लुधियानवी ने कहा कि सी.ए.ए. और एन.आर.सी. देश के अभी नागरिकों के खिलाफ है। सत्ता में बैठे लोग रोजगार की बजाए नफरत बांटने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत के करोड़ों मुसलमानों वह है जिनके पूर्वजों ने 1947 में मुहम्मद अली जिन्ना की बात मानने से इंकार कर दिया था, तो फिर आज कैसे देश के संविधान के खिलाफ कोई बात कबूल कर लेंगे।

वर्णन योग है कि मोमबत्ती और मोबाइल टॉर्च जला कर लोग, इंकलाब जिंदाबाद, भगत सिंह वाली आज़ादी, गांधी वाली आज़ादी, डा. अम्बेडकर वाली आजादी और फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की गज़़ल हम देखेंगे, के नारे लगा रहे थे।

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