नई दिल्ली: (Samir) केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन को जेल में बंद हुए एक वर्ष हो गए हैं। ये वही सिद्दीक कप्पन हैं जिन्हें पिछले साल 5 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के हाथरस में पीड़ित परिवार से मिलने जाने के दौरान गिरफ़्तार किया गया था। उनके साथ पीएफ़आई सदस्य अतिकुर रहमान, मसूद अहमद और उनका ड्राइवर आलम भी थे। उस समय कथित तौर पर गैंग रेप के बाद दलित युवकी की हत्या और रात को शव को जलाने के मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
बता दें कि हाथरस में इस दलित युवती से अगड़ी जाति के चार व्यक्तियों ने 14 सितंबर को कथित तौर पर बलात्कार किया था। पीड़िता की इलाज के दौरान 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मौत हो गई थी। इसके बाद उसकी 30 सितंबर की रात उसके घर के पास रात में शव का अंतिम संस्कार कर दी गई थी। युवती के परिवार ने आरोप लगाया था कि स्थानीय पुलिस ने आनन-फानन में शव को जलाने के लिए उन पर दबाव डाला था और इस मामले में योगी सरकार की किरकिरी हुई थी।
कप्पन को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) आन्दोलन, दिल्ली दंगा, राम मंदिर के मामले में एक विशेष समुदाय को भड़काने के खिलाफ अनलॉफुल एक्टिविटीज़ प्रीवेन्शन एक्ट (UAPA) लगा दिया गया था। इस मामले में ज़मानत के लिए दायर की गई उनकी याचिकाओं को बार-बार खारिज किया गया। सुनवाई के दौरान कंपन के वकील कपिल सिब्बल भी मौजूद रहे थे । हालांकि कप्पन को उनकी 90 वर्षीय बीमार मां से मिलने की इजाजत 5 दिन के लिए दे दी गई थी। एक बार फिर 1 अक्टूबर को उनकी जमानत याचिका फिर से खारिज कर दी गई और अभी मामला कोर्ट में लंबित है।
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