अशफाक कायमखानी।जयपुर।
राजस्थान लोकसेवा आयोग मे रिक्त चल रहे चार सदस्यों के पद पर सभी स्तर की एक्सरसाइज हो जाने के बाद अब शीघ्र मनोनयन होने की सम्भावना जताई जा रही है। लेकिन मनोयन मे आवश्यक पात्रता के अलावा एक राजनीतिक मजबूरियों के चलते जातीय संतुलन की पात्रता ने सभी को चकित कर रखा बताते है।
भाजपा सरकार मे राजस्थान लोकसेवा आयोग मे किसी मुस्लिम के मनोनयन ना होने के बावजूद तत्तकालीन चेयरमैन हबीब खान को त्याग पत्र देने को मजबूर करने के जख्म को भरने के लिए अब कांग्रेस सरकार के समय सदस्यों के होने वाले मनोनयन मे एक सदस्य मुस्लिम का बनना लगभग तय माना जा रहा है। मुस्लिम सदस्य अभी नही होने के कारण होने वाले मनोनयन मे दो पुलिस अधिकारी व एक प्रोफेसर के अलावा सामजिक वर्कर के नामो पर भी मंथन हो चुका बताते। एक सदस्य पर किसी जाट जाती के व्यक्ति का मनोनयन होना तय है। क्योंकि दोनो जाट सदस्य सेवानिवृत्त हो चुके है। एक अनुसूचित या जनजाति मे से सदस्य बनने के अतिरिक्त एक मूल ओबीसी मे से माली जाती से सदस्य का मनोनयन होना लगभग तय बताया जा रहा है।
कुल मिलाकर यह है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सोनिया गांधी के पार्टी की कार्यवाहक अध्यक्ष बनने के बाद लगातार दिल्ली के अनेक दौरे होने से राजनीतिक नियुक्तियों पर मंथन होना भी माना जा रहा है। जिसके चलते मनोनयन का सीलसीला जो शूरु हुवा है वो अब धीरे धीरे रफ्तार पकड़ने वाला बताते है। जल्द ही इस सीलसीले मे राजस्थान लोकसेवा आयोग के रिक्त चार पदो पर मनोनयन होने की सम्भावना बन चुकी है।
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