नई दिल्ली, मुरादाबाद के एक गांव में घर में नमाज पढ़ने पर पुलिस ने 26 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। अब इस मामले में पुलिस ने केस को हटा दिया है। यानी की सभी मुकदमों को खत्म कर दिया गया है।
SSP हेमंत कुटियाल का कहना है कि विवेचना में आरोप प्रमाणित नहीं होने पर केस को एक्सपंज किया जा रहा है। मुरादाबाद में नमाजियों पर दर्ज हुए इस केस को लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार पर निशाना सादा था।
ओवैसी ने कहा था- क्या अब मुसलमान अपने घर में भी नमाज नहीं पढ़ सकते? उन्होंने आरोप लगाया था कि मुसलमानों के साथ दोयम दर्जे का सलूक किया जा रहा है। मामला सुर्खियों में आने के बाद मुरादाबाद पुलिस की जमकर फजीहत हुई। इसके बाद आनन-फानन में अधिकारियों ने केस को एक्सपंज करने का फैसला किया। इस मामले में पुलिस अधिकारियों को शासन स्तर से कड़ी फटकार लगी है। बिना किसी ठोस तैयारी के मीडिया में बयान जारी करने को लेकर भी पुलिस अधिकारियों की क्लास लगाई गई है।
पुलिस के ACS होम अवनीश अवस्थी ने इस मामले में मुरादाबाद के अधिकारियों को सख्त किया और जल्द से जल्द मामले को खत्म करने का निर्देश दिए है। बता दें कि मुरादाबाद के छजलैट थाना क्षेत्र में दूल्हापुर गांव की यह घटना 24 अगस्त की है। मुरादाबाद पुलिस ने अपने ट्वीट में ये दावा भी किया था कि समाज में घृणा और वैमनस्यता बढ़ाने के मकसद से यह नमाज पढ़ी गई थी।

लेकिन जैसे ही मामले ने में लोगों ने अलोचना करनी शुरू कर दी तो अधिकारियों को शासन से फटकार पड़ी तो उन्होंने इस केस हटाया दिया। अधिकारियों ने इस पूरे मामले को ही झूठा करार दे दिया है। दरअसल गांव के रहने वाले चंद्रपाल सिंह ने एक घर में सामूहिक नमाज पढ़े जाने की शिकायत उसी दिन पुलिस से की थी। चंद्रपाल ने कहा था कि गांव में कोई मस्जिद या मदरसा नहीं है।
कभी सामूहिक नमाज भी नहीं पढ़ी गई है। मगर, 24 अगस्त को अज्ञात मौलवी ने गांव में अनवार और मुस्तकीम ने घरों में सामूहिक नमाज अदा कराई। चंद्रपाल ने कहा कि इस तरह सामूहिक नमाज पढ़कर गांव में शत्रुता, घृणा और वैमनस्यता की भावनाएं पैदा करने का काम किया जा रहा है।
पुलिस ने इस मामले में दूल्हेपुर के रहने वाले वाहिद, अनवार, मुस्तकीम, सईद, जाकिर, अलीशेर, रमजानी, मुस्लिम, मोहम्मद अली, ईदा, हाकमअली, हनीफ, शौकीन, सलीम, नूरा और 11 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था।
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