नई दिल्ली:(Shayan Ashkar) उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में मनीष गुप्ता नामक व्यक्ति की पुलिस द्वारा बर्बरता पूर्ण हत्या कर दी जाती हैं। वहीं असम में भी मोईनुल की भी हत्या पुलिस के द्वारा बर्बरता पूर्ण कर दी जाती हैं। फर्क सिर्फ़ इतना हैं एक मनीष था और दूसरा मोईनुल । मनीष गुप्ता के हत्या के बाद टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर कोहराम सा मच जाता हैं।
यहीं तक नहीं राजनीतिक पार्टियां भी उनके परिवार से मिलने जाती हैं, मनीष को न्याय दिलाने का भरोसा दिलाती हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने मनीष के पत्नी को सरकारी नौकरी और कुछ आर्थिक मदद का ऐलान भी कर देती हैं। जो भी पुलिस वाले दोषी हैं उनके ऊपर एफआईआर भी कर दिया जाता हैं।
लेकिन सवाल ये है जब मोईनुल की हत्या बर्बरता पूर्ण कर दी जाती हैं तो राजनेता से लेकर टीवी चैनल तक सभी खामोश बैठ जाते हैं। क्या वह इस देश का नागरिक नहीं था ? क्या उनके बच्चे यतीम नहीं हुए हैं ? क्या इस देश में इंसाफ़ धर्म के नाम पर दिया जायेगा? मोईनुल का जूर्म बस इतना था कि वह एक मुस्लमान था।
मुसलमानों के नाम पर देश की मीडिया भी गूंगी बहरी हो जाती हैं । जब हमनें रिसर्च किया तो पाया कि सिर्फ़ दो मीडिया चैनल ने मोईनुल की घटना को दिखाया है । वही मनीष की हत्या पर सैकड़ों टीवी चैनल पर डिबेट होते हैं।
मशहूर पत्रकार रोहिणी सिंह लिखती है अगर मनीष की जगह मोहसिन होता तो अभी तक आतंकवादी घोषित कर दिया जाता है ।
मीडिया चैनल विदेशी फंडिंग , आईएसआई से कनेक्शन जोड़कर उसे एक देशद्रोही साबित कर दिया जाता। इससे पहले भी देश में अखलाक , पहलू ख़ान को लिंचिंग कर मार दिया गया । लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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