नई दिल्ली, बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म मामले के 11 दोषियों की रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दायर की गई है। इस याचिका पर कोर्ट ने सहमति जताई है और सुनवाई के लिए तैयार हो गया है।
यह याचिका एक महिला संगठन की ओर से दायर की गई है। जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने यह याचिका भी मुख्य याचिका के साथ जोड़ दी। दोनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की जाएगी। शीर्ष कोर्ट ‘नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वूमन’ द्वारा दायर एक याचिका पर पहले से सुनवाई कर रही है।
इसमें सजा की छूट और मामले में दोषियों की रिहाई को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने 18 अक्तूबर को कहा था कि सजा में छूट को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर गुजरात सरकार का जवाब बहुत भारी है। इसमें कई फैसलों का हवाला दिया गया है, लेकिन तथ्यात्मक बयान गायब हैं। इसके बाद शीर्ष कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को गुजरात सरकार के हलफनामे पर जवाब दाखिल करने के लिए समय देते हुए 29 नवंबर को मामले की आगे सुनवाई तय की।
बता दें, यह मामला गोधरा कांड के बाद 2002 में हुए हुए गुजरात दंगों से जुड़ा है। तब बिलकिस बानो 21 साल की थी और पांच माह की गर्भवती थीं। दंगों के बीच भागते समय बिलकिस के साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ था और उसके परिवार के सात सदस्य की हत्या कर दी गई थी।
मृतकों में उनकी तीन साल की बेटी भी शामिल थी। इस मामले में गुजरात सरकार का कहना है कि उसने अपनी सजा माफी नीति के अनुरूप 11 दोषियों को छूट दी है। इन दोषियों को इसी साल 15 अगस्त को जेल से रिहा किया गया। दोषियों को गोधरा उप-जेल में 15 साल से अधिक की सजा काटने के बाद छोड़ा गया है।
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