New Delhi:(Millat Times)बांग्लादेश इस साल अपनी आज़ादी के पच्चास वर्ष पूरे होने के अवसर पर कई कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। कार्यक्रमों में जो सबसे अहम आयोजन है वह है “मुजीब दिबस” यानि यह आयोजन बांग्लादेश के निर्माता मुजीबउररहमान के सम्मान में खासतौर से मनाया जाता है।
कोरोना महामारी के चलते देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक कोई विदेशी दौरा नहीं किया है। ऐसे में बताया जा रहा है कि पीएम मोदी बांग्लादेश में होने वाले कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं और तालाबंदी के बाद प्रधानमंत्री का यह पहला विदेशी दौरा होगा। प्रधनमंत्री का दो दिवसीय दौरा 25 और 26 मार्च को है।
साल 1971 में बांग्लादेश पाकिस्तान से आज़ाद हुआ था। उस समय भारतीय सेना ने उनको आज़ादी दिलवाने में अहम रोल अदा किया था। उसके बाद से ही बांग्लादेश वजूद में आया।
बांग्लादेश भी भारत के स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों में शामिल होता रहा है। हाल ही में भारत के 72वें गणतंत्र दिवस में बांग्लादेश ने शिरकत की और बांग्लादेश सेना की एक टुकड़ी ने गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लिया था। जब बांग्लादेश की टुकड़ी दिल्ली के राजपथ पर परेड कर रही थी तो उस लम्हे को इस नजरिए से देखा जा रहा था कि दोनों देशों के बीच अच्छे रिश्ते क़ायम होंगे। दोनों देशों के बीच कई ऐसे मुद्दे रहे हैं जिसका ख़ात्मा नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार एनडीए के दौरान किया गया। इन दोनों के बीच जो सबसे अहम रहा वो दोनों देशों के बीच “एन्क्लेव” मुद्दे का ख़ात्मा था लेकिन इन दोनों के रिश्ते में खटास तब पैदा हुई जब भारत सरकार ने देश में नागरिकता संशोधन कानून पास किया। तब बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने इस कानून को गैर जरूरी बताया था। और उस वक़्त दोनों देशों के बीच कई प्रस्तावित द्विपक्षीय दौरों और मुलाकातों को रद्द कर दिया गया था। कई महीनों तक शेख़ हसीना ने वहां मौजूद भारत के उच्चायुक्त से मुलाक़ात करने से भी इंकार कर दिया था। विदेश मंत्री जयशंकर के अनुसार बांग्लादेश और भारत एक- दूसरे के नेताओं का अपने यहां स्वागत व सम्मान करते रहे हैं। इस बार भी जब प्रधानमंत्री वहां जायँगे तो ऐसा ही होगा। और इससे दोनों देशों के बीच अच्छे संबंध बनेगें।
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