पर्यटन और पुरातत्व विभाग कर रही है पीर शाहनूर शाह माजार शरीफ का अनदेखा।एकता,मजहबी भाईचारा का प्रतीक है बारपेटा जिला के भेल्ला खन्दकारपारा गांव के पीर हजरत शाहनुर शाह देवान माझार शरीफ।
चाईजुर रहमान/मिल्लत टाइम्स,आसाम:आसाम के बारपेटा जिला के अन्तर्गत भेल्ला खन्दकारपारा गांव के पीर हजरत शाहनुर शाह देवान का माझार शरीफ सौ सौ सालो से एकता, मजहबी भाईचारा का प्रतीक बनकर खड़ा है। 15 सौ शताब्दी मे बगदाद शरीफ से आये पीर आउलीया शाहनुर शाह देवान साहाब ने यहा द्वीन ईसलाम का शान्ति के वाणी प्रचार की थी। उसके लाखो तादाद के भक्त बने थे।
पीर सहाब द्वारा ईसलाम के वाणी सुनकर आसपास के बहुत सारे गांव के लोगो ने ईसलाम कबुल किये थे। गौरतलब है कि उस समय पुरे आसाम मे आहोम का राज था और आहोम राजा शिवसिंह भी पीर हजरत शाहनुर शाह देवान साहाब का मुरीद बने थे। आहोम राणी तथा नि:सन्तान फुलेश्वरी को पीर साहाब की दुआ से सन्तान प्राप्त हुआ था। बहुत सालो तक यहा पर रहने के बाद पीर साहाब इसी जगह पर इन्टेकाल की थी। उस समय से पीर साहाब के माझार मे जियारत करने के लिए हिन्दू, मुस्लिम, सिख हर समुदाय के लोग आते है।
देश के मुम्बई, दिल्ली से भी लोग यहा शिरकत करके जियारत करते है। मोहरम महीने मे लोगो का तादाद काफी ज्यादा होते है। माझार के साथ यहा एक मस्जिद और मादारचा भी है। मादारचा मे आसाम के विभिन्न जगह से तालेबा द्वीन ईसलाम का ज्ञान हासिल कर रहे है । दुख और दुर्भाग्य की बात यह है कि पर्यटन और पुरातत्व बिभाग का नजर अभीतक नही पड़ा है इस एतिहासिक जगह पर। अगर सरकार मदद के लिए आगे आए तो बहुत ही सुन्दर पर्यटन स्थल बन सकते है। स्टूडेंट्स की गवेषणा का विषय भी बन सकता है पीर आउलीया शाहनुर शाह देवान का यह माझार शरीफ।
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