नई दिल्ली: (रुखसार अहमद) जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र उमर ख़ालिद को लंबे समय से जेल में रखने और लगातार ज़मानत याचिका खारिज किए जाने के मामले में भारत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनामी हो रही है।
जाने माने बुद्धिजीवी नोम चॉमस्की और महात्मा गांधी के पोते राजमोहन गांधी ने उमर ख़ालिद को क़ैद में रखे जाने के पर सवाल उठाए हैं और उन्हें तुरंत रिहा करने की अपील की है। दिल्ली पुलिस ने उमर ख़ालिद को सितंबर 2020 में गिरफ़्तार किया था। उन पर दिल्ली दंगा 2020 में शामिल होने का आरोप लगाया था।
जमानती आदेश को तीन बार टाले जाने के बाद खालिद को 23 मार्च को दिल्ली की एक अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की है। चोमस्की ने अपने एक रिकॉर्डेड बयान में कहा, ‘खालिद का मामला ऐसे कई मामलों में से एक है जो दमन काल के दौरान भारत की न्याय व्यवस्था की गंभीर और चिंताजनक तस्वीर पेश करता है, जहां स्वतंत्र संस्थानों और नागरिक अधिकारों के स्वतंत्र अभ्यास को कमजोर किया जा रहा है, जो धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र की भारत की सम्मानित परंपरा को क्षतिग्रस्त करने और हिंदू संस्कृति को थोपने के बड़े पैमाने पर सरकारी प्रयासों का हिस्सा है।

चोमस्की ने यह भी कहा कि ‘एकमात्र सबूत जो प्रस्तुत किया गया है वह यह है कि वह बोलने और विरोध जताने के अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग कर रहे थे, जो एक स्वतंत्र समाज में नागरिकों का मौलिक अधिकार है। चोमस्की ने पाया कि भारत के लोकतंत्र की प्रकृति, जिसकी क्रूर ब्रिटिश शासन से उबरने के लिए प्रशंसा की जाती रही, हाल ही में इसका इस कदर पतन हुआ है जो ‘बेहद दुखद’ है।
चोमस्की ने कहा, ‘हम सभी सिर्फ आशा कर सकते हैं कि कई युवा कार्यकर्ताओं की तरफ से न्याय की स्वतंत्रता की साहसी रक्षा इस दुखद समय को वापस बदलने में सफल होगी, और एक बेहतर दुनिया की तलाश में भारत के नेतृत्व में वापसी का मार्ग प्रशस्त करेगी।
अर्बाना-शैंपेन के इलिनोइस विश्वविद्यालय में रिसर्च प्रोफेसर राजमोहन गांधी ने भी चोमस्की के समान ही एक वीडियो बयान जारी किया है, जिसमें जेएनयू में डॉक्टरेट छात्र के रूप में खालिद के विद्वत्तापूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला है। उन्होंने कहा है, ‘खालिद के रूप में भारत के पास एक ऐसा उत्तम दिमाग है जो संवेदनशील समझ रखता है।
भारत के इस प्रतिभाशाली युवा बेटे को लगातार 20 महीनों से खामोश कर दिया गया है। गांधी का मानना है कि खालिद की ‘निरंतर चुप्पी दुनिया में भारत की छवि पर धब्बा है और भारत की प्रगति में बाधा है।
उन्होंने कहा, ‘हम सभी जानते हैं कि आज वर्चस्व और समानता के बीच एक वैश्विक संघर्ष चल रहा है, जो निरंकुश शासन और लोकतंत्र व उत्पीड़न और मानवीय गरिमा के बीच का संघर्ष भी है। भारत इस संघर्ष के केंद्र में है. उमर खालिद और गलत तरीके से हिरासत में लिए गए अन्य लोगों, जिनकी संख्या हजारों में है, का हिरासत में बिताया हर अतिरिक्त दिन दुनिया में लोकतंत्र के खिलाफ, मानवीय गरिमा के खिलाफ और भारत की स्वच्छ छवि के खिलाफ एक धक्का है।
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