नई दिल्ली: फरवरी माह से UAPA के तहत लखनऊ जेल में बंद केरल निवासी अंशाद व फिरोज़ से जेल मे मुलाकात करने पहुँची उनकी पत्नी,माँ और 7 वर्षीय बच्चे को पुलिस ने भेजा जेल, अब इस मामले में पुलिस ने कहां है कि उन महिलाओं के पास कोरोना रिपोर्ट का फ़र्ज़ी प्रमाण पत्र था इसलिए भेजा गया जेल।
अंशाद और फिरोज़ केरल के रहने वाले है जो कि फरवरी में काम के सिलसिले में ट्रेन से लखनऊ जा रहे थे, लखनऊ पुलिस ने उन्हें पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का सदस्य बता गिरफ्तार कर UAPA लगा जेल भेज दिया था, अंशाद की पत्नी मोहसिना अपने 7 वर्षीय बच्चे आतिफ़ के साथ अपने पति और फिरोज़ की माँ 23 सितंबर को लखनऊ जेल में मुलाक़ात करने पहुंची तो पुलिस ने अब उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
जेल में बंद आरोपियों से मिलने गई महिलाओं व नाबालिग बच्चे की गिरफ्तारी के मामले में जब पुलिस से सवाल किया गया तो “पुलिस ने कहा है कि इन महिलाओं के पास कोरोना रिपोर्ट के फ़र्ज़ी प्रमाण पत्र थे इसी आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है” महिलाओं की गिरफ़्तारी को लेकर केरल के मुस्लिम समुदाय में रोष व्याप्त हो गया है और उन्होंने त्वरित महिलाओं की रिहाई की मांग की है।
पुलिस द्वारा अंशाद और फिरोज़ को PFI के सदस्य बता गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने पर PFI के कार्यकर्ताओं ने कहां है कि दोनों पीड़ितों का PFI से कोई लेना देना नही है उनको सिर्फ़ मुस्लिम पहचान की वजह से गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है,सरकार के आदेश पर पुलिस किसी भी व्यक्ति को PFI का सदस्य बता गिरफ्तार कर जेल में डाल रही है,महिलाओं की गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ अब सोशल मीडिया पर सरकार व पुलिस की आलोचना हो रही है सभी इन गिरफ्तारियों को लोकतंत्र पर हमला बता महिलाओं व नाबालिग़ बच्चे की रिहाई की मांग की है।
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