नई दिल्ली, स्वतंत्रता संग्राम और असहयोग आंदोलन से जन्मी संस्था जामिया मिल्लिया इस्लामिया की स्थापना को 102 साल पूरे हो गए है। 28 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक अलग अलग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाना है।
जामिया मिलिया इस्लामिया की स्थापना 1920 में अलीगढ़ में हुई थी। जामिया मिलिया इस्लामिया का कैंपस हमेशा से दिल्ली में नहीं था। दरअसल जामिया की स्थापना 29 अक्टूबर 1920 को मोहम्मद अली जौहर, हकीम अजमल खान, मुख्तार अहमद अंसारी, अब्दुल मजीद ख्वाजा और जाकिर हुसैन ने महमूद हसन देवबंदी की अध्यक्षता में अलीगढ़ में की थी।
ऐसा इसलिए किया गया था क्योंकि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों का एक धड़ा अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से अलग एक नए नेशनलिस्ट कॉलेज की स्थापना करना चाहता था. दूसरे शब्दों में कहे तो जामिया की स्थापना राष्ट्रवाद के मुद्दे पर हुई थी।
स्थापना दिवस समारोह का उद्घाटन समारोह विश्वविद्यालय के डॉ. एम ए अंसारी सभागार के लॉन में कुलपति प्रो. नजमा अख्तर द्वारा जामिया का झंडा फहराने के साथ शुरू हुआ और छात्रों द्वारा ‘ये जामिया का परचम’ गीत गाया।
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष सरकार ने अपने संबोधन की शुरुआत टीचिंग और नॉन-टीचिंग बिरादरी, छात्रों, पूर्व छात्रों और सभी हितधारकों को बधाई देकर की। उन्होंने कहा, “अपनी स्थापना के बाद से, विश्वविद्यालय ने बेशुमार उपलब्धियां हासिल की हैं, जो देश के लिए यादगार और महत्वपूर्ण रहेंगी। मैं आप सभी को बधाई देता हूं, यह बहुत गर्व की बात है कि संस्थान ने एक और उपलब्धि हासिल है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जामिया भारत के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में से एक है। छात्र, शोधार्थी और शिक्षक अध्ययन, शिक्षण, अनुसंधान और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में लगातार उत्कृष्ट रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं इस अवसर पर कुलपति प्रोफेसर नजमा अख्तर के प्रयासों की सराहना करता हूं, जो विश्वविद्यालय की बेहतरी और उत्कृष्टता के लिए कुशलतापूर्वक काम कर रही हैं।
जामिया की कुलपति प्रो नजमा अख्तर ने पिछले कुछ वर्षों में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय सरकार से अपील करता है कि एक मेडिकल और नर्सिंग कॉलेज की स्थापना के लिए मंजूरी दी जाए, जो न केवल इस क्षेत्र के लिए बल्कि नोएडा जैसे आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए भी उपयोगी होगा।
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