तस्वीर का प्रयोग सांकेतिक रूप मे किया गया है
मिल्लत टाइम्स: संसद के अंदर अलग-अलग मंत्रालयों की स्थायी समिति होती है, जिसे स्टैंडिंग कमेटी कहते हैं. इससे अलग जब कुछ मुद्दों पर अलग से कमेटी बनाने की ज़रूरत होती है तो उसे सेलेक्ट कमेटी कहते हैं.
इसका गठन स्पीकर या सदन के चेयरपर्सन करते हैं. इस कमेटी में हर पार्टी के लोग शामिल होते हैं और कोई मंत्री इसका सदस्य नहीं होता है. काम पूरा होने के बाद इस कमेटी को भंग कर दिया जाता है.
अगर सरकार बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास नहीं भेजती है तो बिल का भविष्य क्या होगा?
इस सवाल के जवाब में नीरजा चौधरी कहती हैं, “किसी भी पार्टी को इस बिल के भविष्य की चिंता नहीं है. और बीजेपी दिखाना चाहती है कि हमने कोशिश की. बीजेपी ये भी चाहती है कि विपक्षी पार्टियां अल्पसंख्यकों के साथ खड़ी दिखें, ताकि उनको एंटी हिंदू क़रार दे दिया जाए. दरअसल बीजेपी इस तीन तलाक़ बिल के ज़रिए अपनी आज़माई हुई ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है.”
नीरजा कहती हैं कि इस बिल को आपराधिक नहीं बनाया जाना चाहिए, ये एक सिविल अपराध है.
“और जब सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक़ को अवैध क़रार दे दिया था तो इस बिल की क्या ज़रूरत है. मुझे लगता है कि ज़रूरत पड़ने पर दोनों पार्टियां अपने स्टैंड को चुनाव में भी भुनाएंगी.”
Support Independent Media
Click Here and Join the Membership of Millat Times to Support Independent Media.
Support Millat Times