नई दिल्ली: (रुखसार अहमद) देश के प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने राजस्थान के उदयपुर में एक दर्जी की जघन्य हत्या और कुछ अन्य घटनाओं का हवाला देते हुए बुधवार को कहा कि ऐसी प्रतिक्रिया की इजाजत इस्लाम नहीं देता और नफरत को नफरत से नहीं हराया जा सकता।
उन्होंने जमीयत की ओर से आयोजित ‘सद्भावना सम्मेलन’ में कहा कि जो लोग ऐसी घटनाओं को क्रिया की प्रतिक्रिया कहते हैं वे ‘बेईमान’ हैं। सम्मेलन की अध्यक्षता जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने की। मदनी ने कहा, ‘देश में जो हालात चल रहे हैं, अगर ऐसे चलते रहे तो नुकसान किसी विशेष धर्म या समुदाय का नहीं, देश का होगा।
हमारी सरकार और देश के बड़े लोगों का सपना है कि भारत विश्वगुरु के रूप में अपनी पहचान बनाए। विश्वगुरु बनने का अधिकार भारत का है, लेकिन यह अधिकार वे लोग छीन रहे हैं जो नफरत के सौदागर हैं। उन्होंने उदयपुर और कुछ अन्य जगहों पर हुई हाल की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा, ‘हाल के दिनों में कुछ घटनाएं हुई हैं।
अगर कोई कहता है कि यह क्रिया की प्रतिक्रिया है तो वह बेईमान है। इस्लाम किसी प्रतिक्रिया की इजाजत नहीं देता है, इस तरह की प्रतिक्रिया की इजाजत तो बिल्कुल नहीं देता। मदनी ने कहा, ‘इस्लाम में इजाजत है तो इसकी है कि आप मोहब्बत का पैगाम दें। नफरत का इलाज नफरत नहीं है।
अगर आग लगी है तो पानी की जरूरत होती है, आग की जरूरत नहीं होती है। नफरत का इलाज मोहब्बत है। इस कार्यक्रम में जैन धर्मगुरु आचार्य लोकेश मुनि और सिख, ईसाई एवं बौद्ध समुदायों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
विशेष संबोधन में सर्वधर्म संसद के राष्ट्रीय संयोजक गोस्वामी सुशीलजी महाराज ने कहा कि आज भारत एक ऐसे मोड़ पर है जहां इस तरह के कार्यक्रमों की पहले से कहीं ज्यादा आवश्यकता है। आज लड़ाई हमारी साझा संस्कृति को बचाने की है।

आजकल टीवी पर जो बहस हो रही है, उस पर सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया ने समाज में जहर घोल दिया है जिससे देश में सांप्रदायिकता का माहौल खतरनाक स्तर तक पैदा हो गया है। लेकिन याद रखें कि जो देश को तोड़ना चाहते हैं वे कभी सफल नहीं होंगे। यह भारत सबका है और हमेशा सबका रहेगा। इस देश के लिए सभी ने कुर्बानी दी है, जिसकी प्रतीक सौ साल पुरानी जमीयत उलेमा-ए-हिंद है।

आचार्य लोकेश मुनि ने कहा कि धर्म जोड़ना सिखाता है, तोड़ना नहीं। मौलाना मदनी साहब देश को बनाने वाले इंजीनियर हैं। हम उनसे आशा करते हैं कि आज उन्होंने जो कार्यक्रम शुरू किया है, उसे देशभर में ले जाएंगे।
अगला कार्यक्रम काशी, अयोध्या और अजमेर में हो और इस कार्यक्रम केवल खानापुरी के रूप में नहीं किया जाना चाहिए बल्कि यहां से जो संदेश जाए, वह हर घर तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि मतभेद जरूर हों लेकिन मनभेद नहीं होना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर नफरत का कचरा डालने पर दुख व्यक्त किया और कहा कि इस कचरे साफ करने की बहुत आवश्यकता है।

रविदास समाज के प्रसिद्ध धर्मगुरु स्वामी वीर सिंह हितकारी महाराज ने कहा कि मनुष्य की मनुष्य से शत्रुता न हो, क्योंकि मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना। उन्होंने मौलाना मदनी साहब की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत के निर्माण की जो नींव आज रखी गई है, उससे भारत में बराबरी के अधिकार की मांग करने वालों को प्रोत्साहन मिलेगा।
सम्मेलन में विशेष तौर पर भारतीय सर्वधर्म संसद के राष्ट्रीय संयोजक सुशील महाराज, अहिंसा विश्व भारती के अध्यक्ष आचार्य लोकेश मुनि महाराज, रविदास समाज के प्रसिद्ध धर्मगुरु स्वामी वीर सिंह हितकारी महाराज, बौद्ध धर्मगुरु आचार्य यशी फुंत्सोक, पादरी मोरेश पारकर इत्यादि ने भाग लिया।
इन वक्ताओं के अलावा जमीयत उलेमा-ए-हिंद के सचिव मौलाना नियाज अहमद फारूकी, डॉ. सिंधिया जी, स्वामी विवेक मुनि जी, रमेश कुमार पासी, रिजवान मंसूरी, अल्पसंख्यक आयोग दिल्ली के चेयरमैन जाकिर खां, केके शर्मा, मुकेश जैन, रमेश शर्मा, रजनीश त्यागी राज, डॉ. संदीप जी, डॉ. सुरेश जी, नरेंद्र शर्मा जी, इशरत मामा, दबू अरोड़ा, मौलाना दाऊद अमीनी, प्रतीम सिंह जी, डॉ. भाटी जी, नरेंद्र तनेजा, अरुण गोस्वामी, डॉ. अख्तर, नरगिस खान, इब्राहीम खां, सुशील खन्ना इत्यादि ने भी अपने विचार व्यक्त किए या कार्यक्रम में भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन जमीयत सद्भावना मंच के संयोजक मौलाना जावेद सिद्दीकी कासमी ने किया।
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