नई दिल्ली: चीन इन दिनों बिजली की भारी कटौती से जूझ रहा है और वहां लाखों घर और कारखाने इस मुसीबत का सामना कर रहे हैं। पावर ब्लैकआउट यहां असामान्य नहीं है लेकिन इस साल कई अन्य वजहों ने बिजली आपूर्तिकर्ताओं के लिए मुसीबत ज्यादा बढ़ा सकता हैं।
बिजली की भारी कटौती का सामना कर रहे चीन के पूर्वोत्तर हिस्से के ‘इंडस्ट्रियल हब’ में यह समस्या और भी गंभीर होती जा रही है क्योंकि सर्दी आ रही है और यह कुछ ऐसा है जिसका प्रभाव दुनिया के बाकी हिस्सों पर भी पड़ सकता है। बीते सालों के दौरान चीन ने बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने में संघर्ष किया है जिसकी वजह से चीन के कई प्रांतों में बिजली की कटौती का संकट पैदा हो गया है।
गर्मियों और सर्दियों के दौरान बिजली की जब सबसे अधिक मांग होती है तो कटौती की यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। लेकिन साल 2021 में और भी कई ऐसे मुद्दे आए जिसने इस समस्या को और भी विकराल बना दिया है।
कोरोना महामारी के बाद जैसे जैसे पूरी दुनिया एक बार फिर खुलने लगी चीन के सामानों की मांग भी बढ़ने लगी और उन्हें बनाने वाले चीन के कारखानों को इसके लिए अधिक बिजली की ज़रूरत पड़ी।
2060 तक देश को कार्बन मुक्त बनाने के लिए चीन ने जो नियम बनाए है उसकी वजह से कोयले का उत्पादन पहले से धीमा पड़ा है, इसके बावजूद अपनी आधे से अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए चीन आज भी कोयले पर ही निर्भर है और जैसे जैसे बिजली की मांग बढ़ी है, कोयला भी महंगा हो रहा है। लेकिन चीन की सरकार वहां बिजली की कीमतों को सख्ती के साथ नियंत्रित करती है, ऐसे में कोयले से चलने वाले पावर प्लांट घाटे में काम करने के लिए तैयार नहीं हैं और उनमें से कई ने तो अपने उत्पादन में कटौती कर डाली है।
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