ऐसा रहा नेताजी कहे जाने वाले ‘मुलायम सिंह यादव’ का राजनीतिक सफर…

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10 October 2022 (Publish: 04:18 PM IST)

नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव का 82 साल की उम्र में निधन हो गया है। मुलायम सिंह गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में वह वेंटिलेटर पर थे। रविवार से उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी। मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद सपा कार्यकर्ताओं में शोक की लहर है।

उनकी मौत के बाद कई बड़े नेताओं ने शोक व्यक्त किया है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने मुलायम सिंह यादव के निधन को देश के लिए ‘‘अपूरणीय क्षति’’ बताते हुए ट्वीट किया, ‘‘मुलायम सिंह यादव का निधन देश के लिए अपूरणीय क्षति है। साधारण परिवेश से आए मुलायम सिंह यादव जी की उपलब्धियां असाधारण थीं।’राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ ‘धरती पुत्र’ मुलायम जी जमीन से जुड़े दिग्गज नेता थे। उनका सम्मान सभी दलों के लोग करते थे। उनके परिवार-जन एवं समर्थकों के प्रति मेरी गहन शोक-संवेदनाएं।’’

पीएम मोदी ने ट्वीट कर यादव को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा, ‘‘मुलायम सिंह यादव एक उल्लेखनीय व्यक्तित्व थे। उन्हें एक विनम्र और जमीन से जुड़े नेता के रूप में व्यापक रूप से सराहा गया, जो लोगों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील थे। उन्होंने लगन से लोगों की सेवा की और लोकनायक जयप्रकाश नारायण और डॉ. राम मनोहर लोहिया के आदर्शों को लोकप्रिय बनाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यादव को अद्वितीय राजनीतिक कौशल का धनी बताया और कहा कि आपातकाल के दौर में उन्होंने लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए बुलंद आवाज उठाई। पूर्व रक्षा मंत्री के निधन की खबर आते ही शाह मेदांता अस्पताल के लिए रवाना हो गए और वहां पहुंचकर परिवार के सदस्यों को सांत्वना दी।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मुलायम सिंह यादव के पुत्र अखिलेश यादव को भेजे शोक संदेश में कहा, ‘‘यादव समाजवादी आंदोलन के पुरोधा थे। वह उत्तर प्रदेश विधानसभा तथा लोकसभा के लिए कई बार निर्वाचित हुए….वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबों और पिछड़े समुदायों की सेवा में समर्पित कर दिया।’’

पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा, भाजपा नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों एवं प्रमुख नेताओं ने समाजवादी पार्टी (सपा) के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन पर शोक व्यक्त किया।

पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा कि यादव ने हिंदू-मुस्लिम भाईचारे को बनाए रखा और वह सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ खड़े हुए।

जनता दल (सेकुलर) के नेता एवं कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने यादव को याद करते हुए कहा कि वह देवेगौड़ा के नेतृत्व वाली पूर्व सरकार में रक्षा मंत्री रहे। कुमारस्वामी ने कहा, ‘‘मुलायम जी ने राजनीति में अपने लंबे कार्यकाल में कई अहम जिम्मेदारियां संभालीं और देश के लिए अथक काम किया।’’

आइए जानतें है मुलायम सिंह से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें

तीन बार यूपी के मुख्यमंत्री रहे। केंद्र में रक्षा मंत्री रहे। उन्हें बेहद साहसिक सियासी फैसलों के लिए भी जाना जाता है। देश की राजनीति में मुलायम सिंह यादव का कुनबा सबसे बड़ा है। परिवार के 25 से ज्यादा लोग ऐसे हैं जो राजनीति में सक्रिय हैं।

आगरा से मुलायम सिंह यादव का गहरा नाता था। उन्होंने राजनीति के दांव-पेंच आगरा विश्वविद्यालय से सीखे थे। 12वीं की पढ़ाई के बाद मुलायम सिंह यादव ने आगरा का रुख किया और आगरा विश्वविद्यालय से उन्होंने पॉलिटिकल साइंस की डिग्री हासिल की। 2 साल तक आगरा में रहकर उन्होंने पढ़ाई की। इस दौरान वे छात्र राजनीतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे थे।

कैसे हुई उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत…

उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुलायम सिंह यादव का उभार 1970 के दशक के बाद के तीव्र सामाजिक और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच हुआ था। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) ने तब यूपी में राजनीतिक प्रभुत्व हासिल करना शुरू कर दिया था। कथित उच्च जाति के नेताओं के वर्चस्व वाली कांग्रेस पार्टी को दरकिनार कर दिया गया था।

एक समाजवादी नेता के रूप में उभरे मुलायम सिंह यादव ने जल्द ही खुद को एक ओबीसी दिग्गज के रूप में स्थापित किया और कांग्रेस के अवसान से खाली हुए राजनीतिक स्थान पर कब्जा कर लिया। उन्होंने 1989 में यूपी के 15वें सीएम के रूप में शपथ ली, उसके बाद से आज तक राज्य की सत्ता कांग्रेस के पास नहीं गई है। मुलायम सिंह यादव तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे।

1989 के विधानसभा चुनाव के बाद मुलायम पहली बार भाजपा के बाहरी समर्थन से मुख्यमंत्री बने। 1993 में सपा नेता के रूप में दूसरी बार मुख्यमंत्री बने, इस बार उन्हें कांशीराम के नेतृत्व वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का समर्थन हासिल था। 2003 में वह तीसरी बार सपा के नेतृत्व वाले गठबंधन के नेता के रूप में मुख्यमंत्री बने। उनके तीनों कार्यकाल की कुल अवधि करीब छह साल और 9 महीने थी।

पहलवान से शिक्षक बने मुलायम का जन्म 22 नवंबर, 1939 को इटावा में हुआ था। उनके पास एमए (राजनीति विज्ञान) और बी.एड की डिग्री थी। वह 1967 में पहली बार संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार के रूप में इटावा के जसवंतनगर से विधायक चुने गए थे।

हालांकि 1969 के चुनाव में कांग्रेस के विशंभर सिंह यादव से हार गए थे। 1974 के मध्यवर्ती चुनाव से पहले मुलायम सिंह चौधरी चरण सिंह के भारतीय क्रांति दल (BKD) में शामिल हो गए थे। उन्होंने BKD के टिकट पर जसवंतनगर सीट से चुनाव लड़ा और जीता। साल 1977 में उन्होंने जनता पार्टी के टिकट पर जसवंतनगर सीट को फिर से जीता। 1970 के दशक के अंत में वह राम नरेश यादव सरकार में सहकारिता और पशुपालन मंत्री भी बने।

1980 के चुनावों में जब कांग्रेस ने वापसी की तो मुलायम अपनी सीट बलराम सिंह यादव ( कांग्रेस नेता) से हार गए। बाद में वह लोकदल में गए और राज्य विधान परिषद के उम्मीदवार के रूप में चुने गए। 1985 के विधानसभा चुनाव में मुलायम जसवंतनगर से लोकदल के टिकट पर चुने गए और विपक्ष के नेता बने।

1989 में 10वीं यूपी विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले मुलायम सिंह वीपी सिंह के नेतृत्व वाले जनता दल में शामिल हो गए। उन्हें यूपी इकाई का प्रमुख नियुक्त किया गया। प्रमुख विपक्षी चेहरे के रूप में उभरने के बाद उन्होंने राज्यव्यापी क्रांति रथ यात्रा शुरू की। उनकी रैलियों में एक थीम गीत बजता था, “नाम मुलायम सिंह है, लेकिन काम बड़ा फौलादी है…।”

इस चुनाव में जनता दल 421 सीटों में से 208 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी। हालांकि यह संख्या बहुमत के जादुई आंकड़े से कम था। भाजपा को 57 और बसपा को 13 सीटों पर जीत मिली थी। मुलायम सिंह यादव एक बार फिर जसवंतनगर से चुने गए थे। उन्होंने 5 दिसंबर 1989 को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी।

नवंबर 1990 में जब जनता दल वीपी सिंह और चंद्रशेखर के नेतृत्व में दो गुटों में बंटा, तो कांग्रेस ने केंद्र में चंद्रशेखर सरकार और यूपी में मुलायम सिंह सरकार का समर्थन किया। बाद में कांग्रेस ने दोनों सरकारों से समर्थन खींच लिया, जिसके कारण यूपी और केंद्र में नए सिरे से चुनाव हुए।

साल 1992 में मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी’ के नाम से नई पार्टी की स्थापना की। 1993 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 176, सपा ने 108 और बसपा ने 68 सीटों पर जीत हासिल की थी। मुलायम शिकोहाबाद, जसवंतनगर और निधौलीकलां से चुनाव लड़े और तीनों सीटों से जीते थे। भाजपा ने सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सरकार बनाने का दावा पेश किया। वहीं मुलायम ने सभी गैर-भाजपा दलों और कुछ निर्दलीय विधायकों को मिलाकर 242 सदस्यों के समर्थन का दावा किया।

1996 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव पहली बार सांसद चुने गए। वह एचडी देवेगौड़ा और बाद में आईके गुजराल के नेतृत्व वाली संयुक्त मोर्चा सरकारों में रक्षा मंत्री रहे।

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