नई दिल्ली, यूपी के उन्नाव के बांगरमऊ में फीस न जमा करने पर निजी स्कूल के प्रबंधन ने बच्चों को कड़ी सजा दी। उन्हें दो दिन फीस लेट होने पर धूप में खड़ा रखा। इतना ही नही उन्हें परीक्षा तक में नहीं बैठाया गया। बच्चे कहते रहे हमारे पापा आएंगे और फीस जमा कर देगें। लेकिन फिर भी उन्हें यह सजा दी गई।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक रोती हुई बच्ची कह रही है कि हमें फीस ना जमा करने पर सजा दी गई, हमने कहा था पाप आएंगे, लेकिन फिर भी हमें धूप मे खड़ा रखा। दरअसल मामला बांगरमऊ क्षेत्र में वर्तमान विधायक के आवास के कुछ दूरी पर संचालित बाल विद्या मंदिर का है। स्कूल में इस समय परीक्षाएं करवाई जा रही हैं।
सोमवार को सभी बच्चे उत्साह पूर्वक परीक्षा में शामिल होने पहुंचे। लेकिन स्कूल में कुछ और चल रहा था। यहां जिन बच्चों की फीस नहीं जमा हो पाई थी, उन पर फीस जमा करने का दबाव बनाया जा रहा था।
उन्नाव के एक निजी स्कूल में फीस ना जमा करने पर प्रबंधन ने बच्चों को धूप में खड़ा रखा, परीक्षा तक में नहीं बैठने दिया, बच्चों ने कहा दो दिन पहले मिली थी जानकारी… pic.twitter.com/mu140ZixkJ
— Public Face (@publicfacetv) October 18, 2022
जिन्होंने फीस जमा नही की न सिर्फ कक्षों से बाहर निकाला बल्कि परीक्षा में भी बैठने नहीं दिया गया। इस दौरान सभी बच्चों ने परीक्षा दी लेकिन कुछ बच्चे बाहर धूप में खड़े रहे। परीक्षा खत्म होने के बाद सभी को घर भेज दिया गया। फीस न देने वाले बच्चों से फीस लेकर आने पर स्कूल आने को कहा। इसके बाद वहां से भगा दिया गया।
छोटे बच्चे रोते हुए अपने घर पहुंचे। उन्होंने अपने घर में इस घटना को बताया। इसके बाद अभिभावक बच्चों को लेकर स्कूल पहुंच गए। उन्होंने विद्यालय के स्टाफ के व्यवहार पर सवाल खड़े किए। बच्चों ने रोते हुए अध्यापकों द्वारा प्रताड़ित करने की बात कही। बताया कि फीस न जमा होने से धूप में खड़ा किया गया।
परीक्षा भी नहीं देने दिया और स्कूल से भगा दिया। अभिभावक अवनीश कुमार ने बताया कि इस तरह विद्यालय के व्यवहार से बच्चों के मानसिक विकास पर बुरा असर पड़ता है। साथ ही उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। ऐसी खबरों से लगने लगा है अब बच्चे स्कूलों में सुरक्षित नहीं, कभी होमवर्क ना करने पर उन्हें पीटा जाता है, कभी बच्चों को दलित होने की सजा दी जाती है, टीचर के मटके से पानी पीने हाल ही में राजस्थान के एक स्कूल में बच्चें को इतना मारा था कि उसकी मौत हो गई थी। ऐसी घटनाओं से बच्चों के दिमाग पर बूरा असर पढ़ता है और वह पढ़ाई नहीं कर पाते।
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