फलस्तीन से यहूदियों को मुसलमानों ने कभी भी बाहर नहीं निकाला …

नई दिल्ली : (शम्स तबरेज क़ासमी) यहूदियों को फलस्तीनी के मुसलमानों ने कभी भी बाहर नहीं निकाला, तीसरी शताब्दी में जब रोमियो ने ईसाई धर्म को अपना लिया तो उन्होंने यहूदियों को परेशान करना शुरू किया और फलस्तीन से उनको निकाल दिया।

उनकी इबादत गाहों को तोड़ दिया गया। 637 में जब मुसलमानों ने यरुशलम को फतह किया तब उन्होंने ईसाइयों के साथ यहूदियों को भी वहां आने और रहने की इजाजत दी, उसके बाद ईसाइयों को जब भी मौका मिला उन्होंने मुसलमान और यहूदी दोनों का कत्ल किया।

जेरुशलम में जब सलाउद्दीन का राज आया, तो वहां रहने वाले ईसाईयों को अपनी मौत का खौफ सताने लगा। उन्हें डर था कि कहीं सलाउद्दीन की फौज उन लोगों की हत्या न कर दें। हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ और सलाउद्दीन ने अपनी उदारता और एक सच्चा मुस्लिम होने का सबूत देते हुए एक मिसाल कायम की और उसने न सिर्फ ईसाईयों को खुल कर जीने का हक दिया, बल्कि उन्हें समान हक भी दिए।

ऑटोमन एंपायर में भी यहूदियों को रहने की इजाजत हासिल थी इसके अलावा हस्पानिया, रूस दुनिया के कई मुल्कों में यहूदियों को सताया गया तो उनको खिलाफते उस्मानिया अपने यहां बसा लिया। यहूदियों के पास कभी दुनिया में कोई देश नहीं रहा, हमेशा मुसलमानों ने ही अपनी हुकूमत में उनको बाइज्जत जिंदगी आता की और नागरिक बनाया।

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शम्स तबरेज़ क़ासमी मिल्लत टाइम्स ग्रुप के संस्थापक एंड चीफ संपादक हैं, ग्राउंड रिपोर्ट और कंटेंट राइटिंग के अलावा वो खबर दर खबर और डिबेट शो "देश के साथ" के होस्ट भी हैं सोशल मीडिया पर आप उनसे जुड़ सकते हैं Email: stqasmi@gmail.com