अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर का ज़मीन घोटाला- चंपत की चम्पतगिरी के 18 करोड़।

(मासूमा तलत सिद्दीक़ी)

बंगाल से शुरू हुआ ‘खेला’ राम की नगरी अयोध्या में बड़े घोटाले का खेल कर गया। वैसे तो सियासत और राजनीति आम लोगों के साथ धोखा फरेब करने से कभी डरती नही, लेकिन राम से राजनीति। राम! राम! हाय राम! आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करा रहे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने संस्था के सदस्य अनिल मिश्रा की मदद से दो करोड़ रुपए कीमत वाली जमीन 18 करोड़ रुपये में खरीदी है। उन्होंने कहा कि यह सीधे-सीधे धन शोधन का मामला है और सरकार इसकी सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय से जांच कराए। वहीं, समाजवादी पार्टी के सरकार में मंत्री रहे और अयोध्या के पूर्व विधायक पवन पांडे ने भी अयोध्या में चंपत राय पर भ्रष्टाचार के ऐसे ही आरोप लगाए और मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की। आपको बता दें कि राम नगरी अयोध्या का ज़मीन घोटाला मामला गणेश की नगरी महाराष्ट्र से होते हुए मां दुर्गा की नगरी कोलकाता यानि टीएमसी तक जा पहुंचा है। जहां एक ओर महाराष्ट्र में शिवसेना सांसद संजय राव ने इस पूरे विवाद को लेकर पीएम मोदी, योगी और और संघ प्रमुख मोहन भागवत को सीधे निशाना साधा है वहीं दूसरी ओर इस बयानबाज़ी के बीच टीएमसी इस विवाद में पूरी तरह से कूद गई है और इस पूरे कथित मामले का सख़्ती से जवाब मांगा है। साथ ही टीएमसी ने इस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग की है। चंपत राय ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वह इस तरह के आरोपों से बिल्कुल नहीं डरते, ये सब उनके ख़िलाफ़ साज़िश के तहत किया जा रहा है। उन्होंने कहा, वह खुद पर लगे आरोपों का अध्ययन करेंगे। अध्ययन ही नही शायद गहन अध्य्यन की ज़रूरत है, और करना भी चाहिए आख़िर कैसे चंद मिनटों में ही 2 से 18 करोड़ हो गई ज़मीन की कीमत ये भी सोचना चाहिए।। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से मंदिर निर्माण के लिए खरीदी गई जमीन पर घोटाले के आरोप के बाद यूपी की सियासत गर्मायी हुई है। देखना ये है कि चंपत राय जी अपनी सफ़ाई में कोई पेशकश देंगे या घोटाले के साथ ही सब ले दे के चंपत हो जाएंगे।
संजय सिंह ने कुछ दस्तावेज पेश करते हुए कहा, “कोई कल्पना भी नहीं कर सकता कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के नाम पर कोई घोटाला और भ्रष्टाचार करने की हिम्मत करेगा। मर्यादा की बात आएगी तो ये भी कहना पड़ेगा कि मस्जिद को तोड़ना भी पुरुषोत्तम राम भगवान की न ही मर्यादा में था और न ही उनकी ऐसी शिक्षा थी। ये तो महज़ घोटाले की बात है, यहां तो मर्यादा वैसे भी ताक पे रख के ऐसे काम किये जाते हैं। संजय सिंह ने “दावा किया कि अयोध्या सदर तहसील के बाग बिजैसी गांव में पांच करोड़ 80 लाख रुपये की मालियत वाली गाटा संख्या 243, 244 और 246 की जमीन सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी नामक व्यक्तियों ने कुसुम पाठक और हरीश पाठक से 18 मार्च को दो करोड़ रुपए में खरीदी थी। फ़िर भला राम जन्मभूमि ट्रस्ट के नाम पर चंपत राय जी ने करोड़ों रुपए कैसे चंपत कर दिए? ये सोचने वाली बात है।जिस तेजी से जमीन की कीमत बढ़ी वह अपने आप में रेकॉर्ड है। आप सांसद ने कहा कि शाम सात बजकर 10 मिनट पर हुई इस जमीन की खरीद में राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा और अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय गवाह बने थें। साथ ही आरोप लगाया कि उसके ठीक पांच मिनट के बाद इसी जमीन को चंपत राय ने सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी से साढ़े 18 करोड़ रुपए में खरीदा, जिसमें से 17 करोड़ रुपए आरटीजीएस के जरिए पेशगी के तौर पर दिए गए। “प्रति सेकंड साढ़े पांच लाख रुपये जमीन का दाम बढ़ा” उन्होंने आरोप लगाया, “दो करोड़ रुपए में खरीदी गई जमीन का दाम लगभग प्रति सेकंड साढ़े पांच लाख रुपए बढ़ गया। हिंदुस्तान तो क्या, दुनिया में कहीं भी किसी जमीन का दाम इतनी तेजी से नहीं बढ़ सकता। सबसे मजे की बात यह है कि जो राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा और अयोध्या के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय बैनामा कराने में गवाह थे, वो ही इस जमीन को ट्रस्ट के नाम पर खरीदने में भी गवाह बन गए। यह साफ तौर पर धन शोधन और भारी भ्रष्टाचार का मामला है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार से मांग करता हूं कि तत्काल ईडी और सीबीआई के जरिए इस मामले की गहन जांच कराकर इसमें शामिल भ्रष्टाचारी लोगों को जेल में डाला जाए। क्योंकि यह इस मुल्क के करोड़ों राम भक्तों की आस्था के साथ-साथ उन करोड़ों लोगों के भरोसे का भी सवाल है जिन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा राम मंदिर निर्माण के लिए दिया है.”
उन्होंने आगे कहा, ‘इस मामले में एग्रीमेंट के स्टांप का समय और बैनामे के स्टांप का समय भी सवाल खड़ा करता है. जो जमीन बाद में ट्रस्ट को बेची गई उसका स्टांप शाम को पांच बजकर 11 मिनट पर खरीदा गया और जो जमीन पहले रवि मोहन तिवारी और अंसारी ने खरीदी उसका स्टांप पांच बजकर 22 मिनट पर खरीदा गया.’आखिर ट्रस्‍ट ने स्टांम्प पहले ही कैसे खरीद लिया। किसी भी ट्रस्‍ट में जमीन खरीद के लिए बोर्ड की मीटिंग करके प्रस्‍ताव पास किया जाता है। ऐसे में सवाल है कि मात्र पांच मिनट में कैसे ट्रस्‍ट ने प्रस्‍ताव पास करके जमीन खरीद ली। भई! राम नगरी है अंधेर नगरी नहीं। ज़रा बच के साहब जी,, ये पब्लिक है जो सब जानती है, ये पब्लिक है।
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी ट्विटर की चिड़िया को चहकाया और ट्वीट कर आरोप लगाया, “हे राम, ये कैसे दिन… आपके नाम पर चंदा लेकर घोटाले हो रहे हैं। बेशर्म लुटेरे अब आस्था बेच रावण की तरह अहंकार में मदमस्त हैं। सवाल है कि दो करोड़ में खरीदी जमीन 10 मिनट बाद राम जन्मभूमि को 18.50 करोड़ में कैसे बेची? अब तो लगता है …”कंसों का ही राज है, रावण हैं चहुं ओर”। देखो अहंकार में मदमस्त तो होना ही था,, ज़मीन राम के नाम पर तो है पर रक्षक कार्य रावणों के हांथ में, तो होगा क्या। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी इस पर ट्रस्ट को घेरा है और राम मंदिर के लिए चंदे के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, कि साफ़ तौर पे देखा जाय तो ये ‘भक्तों की आस्था का अपमान’ है। करोड़ों लोगों ने आस्था और भक्ति के चलते भगवान के चरणों में चढ़ावा चढ़ाया। उस चंदे का दुरुपयोग अधर्म है, पाप है, उनकी आस्था का अपमान है। आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने आगे कहा, करोड़ों लोग जो लोग भगवान राम पर आस्था रखते हैं, उन्हें गहरी चोट पहुंची है इस मामले से। लोगों ने अपना पेट काटकर चंदा दिया था चाहे मजदूर हो, किसान हो या कर्मचारी। उस चंदे के पैसे में चोरी हुई है, घोटाला हुआ है। आपने कितना घोटाला और भ्रष्टाचार किया, सामने आकर बताइए। अब बात ये आती है कि बीजेपी को घोटालेबाजों से कितना हिस्सा मिला। बीजेपी घोटालेबाजों के समर्थन में कियूं खड़ी हो गई। बीजेपी का मेयर भी इसमें कियूं शामिल था?
इतने में यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, भी बोल पढ़े कि “जिनके हाथ राम भक्तों के खून से रंगे हैं, वे लोग सलाह न दें, जिसने गड़बड़ किया होगा, ट्रस्ट उनके खिलाफ कार्रवाई करेगा। जो लोग दोषी होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। राम लला के भव्य मंदिर का निर्माण होगा। सलाहकार न बनें, जो वहां साधु-संत हैं उन्हें यकीन है कि ट्रस्ट कार्रवाई करेगा”। अब देखना ये है कि जांच और कार्यवाई में और क्या सुनने को मिलेगा और कब दूध का दूध और पानी का पानी दिखेगा।

15.06.2021