सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में मौजूदा हालात को लेकर केंद्र और राज्य प्रशासन से जवाब मांगा है. कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन से पूछा कि आखिर आप कब तक जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंद लगाए रखेंगे. और आम लोगों के लिए कब तक इंटरनेट सेवाएं बंद रखी जाएंगी. कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन से पांच नवंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा है. कोर्ट के कड़े रुख के बीच केंद्र सरकार ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के हालात पर रोजाना नजर रखी जा रही है. अभी तक राज्य से 99 फीसदी प्रतिबंध उठाए जा चुके हैं. धीरे-धीरे ही सही लेकिन हालात सामान्य हो रहे हैं.
कोर्ट में सरकार ने कहा कि राज्य में अभी इंटरनेट को इसलिए बंद रखा गया है ताकि सीमापार से होने वाली हरकतों को रोका जा सके. सरकार के इस जवाब पर वी रमना ने कहा कि बेंच के एक जज निजी कारणों से छुट्टी लेना चाहते थे लेकिन मैनें आने को कहा नहीं तो लोग कहते कि हम मामले को सुनना नहीं चाहते. उन्होंने कहा कि हमारी कोई निजी जिंदगी नहीं है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट कश्मीरी व्यवसायी मुबीन की याचिका पर सुनवाई कर रही था. कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य प्रशासन से चार हफ्तों में जवाब मांगा है.
कुछ दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाए जाने को चुनौती देने वाली सभी याचिकाएं पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के पास भेजीं थी .अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर केन्द्र और जम्मू कश्मीर प्रशासन को नोटिस जारी किया था. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह अनुच्छेद 370 हटाए जाने की संवैधानिक वैधता की समीक्षा करेगा. अनुच्छेद 370 के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई पांच जजों की बेंच करेगी. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट को केंद्र सरकार ने बताया है कि जम्मू-कश्मीर हालात सामान्य हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाए जाने के राष्ट्रपति आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं के संबंध में केन्द्र सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन को नोटिस भी जारी किया था. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली पीठ केन्द्र की उस दलील से सहमत नहीं दिखी कि अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल और सॉलिसिटर जनरल के अदालत में मौजूद होने के कारण नोटिस जारी करने की जरूरत नहीं है.
पीठ ने नोटिस को लेकर ‘सीमा पार प्रतिक्रिया’ होने की दलील को ठुकराते हुए कहा, ‘हम इस मामले को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के पास भेजते हैं.’ अटॉर्नी जनरल ने कहा कि इस अदालत द्वारा कही हर बात को संयुक्त राष्ट्र के समक्ष पेश किया जाता है. दोनों पक्ष के वकीलों के वाद-विवाद में उलझने पर पीठ ने कहा, ‘हमें पता है कि क्या करना है, हमने आदेश पारित कर दिया है और हम इसे बदलने नहीं वाले.’
अनुच्छेद 370 रद्द करने के फैसले के खिलाफ याचिका अधिवक्ता एमएल शर्मा ने दायर की है, जबकि नेशनल कांफ्रेंस सांसद मोहम्मद अकबर लोन और न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) हसनैन मसूदी ने जम्मू कश्मीर के संवैधानिक दर्जे में केंद्र द्वारा किये गए बदलावों को चुनौती दी है. पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैसल, जेएनयू की पूर्व छात्रा शेहला रशीद और राधा कुमार जैसे प्रख्यात हस्तियों सहित अन्य भी इसमें शामिल हैं..INPUT(NDTV)
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