नई दिल्ली, मध्य प्रदेश के खरगोन में रामनवमी पर 10 अप्रैल को हुए दंगे के दौरान नुकसान की भरपाई के लिए एक ट्रिब्यूनल का गठन किया गया था। इस ट्रिब्यूनल में 12 साल के मुस्लिम लड़के को नोटिस जारी किया है।
इसमें उसे दंगे के दौरान संपत्ति के नुकसान को लेकर 2.9 लाख रुपये का भुगतान करने को कहा गया है। बताया जा रहा है कि दंगों के समय मुस्लिम लड़के की उम्र 11 साल थी। दऱअसल खरगोन में हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद मध्य प्रदेश प्रिवेंशन एंड रिकवरी ऑफ डैमेज टू पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट के तहत ट्रिब्यूनल का गठन किया गया था।
अगस्त 2022 में एक महिला ने शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि दंगे के दौरान उसकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था। इसके बाद महिला की शिकायत पर मुस्लिम लड़के और सात अन्य को नोटिस जारी किया था। महिला द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के में लड़के पर 10 अप्रैल को रामनवमी समारोह के दौरान भीड़ द्वारा भगदड़ मचाने और उसके घर को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया था।
सांप्रदायिक हिंसा ने राज्य प्रशासन को पूरे खरगोन जिले में महीनों तक कर्फ्यू लगाया। जिसे स्थिति सामान्य होने के बाद ही धीरे-धीरे हटा लिया गया था। मुस्लिम लड़के के परिवार ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के समक्ष एक अपील दायर कर नोटिस को रद्द करने की मांग की थी।
लेकिन 12 सितंबर को अदालत ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की रोकथाम और वसूली अधिनियम के तहत गठित न्यायाधिकरण में कोई आपत्ति दर्ज कराई जानी चाहिए। यदि कोई आपत्ति दर्ज की जाती है, तो उस पर विचार किया जाएगा और न्यायाधिकरण द्वारा कानून के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।
मिली जानकारी के अनुसार इस नोटिस में लड़के की उम्र का भी जिक्र किया गया है। साथ ही उस पर 2.9 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। ट्रिब्यूनल के सदस्य प्रभात पाराशर ने बताया कि यह कार्रवाई नियम कानून के अनुसार ही की गई है। उन्होंने कहा कि अगर यह आपराधिक मामला होता तो बच्चे को किशोर न्याय अधिनियम का संरक्षण मिलता।
उन्होंने कहा की ऐसे में हम दीवानी प्रकृति के मामलों पर फैसला सुना रहे हैं.। यह सिर्फ जुर्माना लगाने के बारे में है न कि सजा देने की। उन्होंने कहा कि राशि बच्चे के माता-पिता को देनी होगी क्योंकि वही उसके लिए जिम्मेदार हैं। लड़के के अलावा, लड़के के पिता सहित सात अन्य लोगों को भी इसी तरह के नोटिस जारी किए गए थे।
वहीं लड़के के वकील अशर अली ने बताया कि नोटिस मिलने के बाद हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में याचिका दायर की गई। जिसमें इसे रद्द करने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने 12 सितंबर को ट्रिब्यूनल में जाने का विकल्प दिया। इसके बाद लड़के ने अपनी मां की तरफ से एक दिन बाद ट्रिब्यूनल में आवेदन दायर किया। इसमें यह कहा गया कि उस पर अपराध का आरोप नहीं लगा है, ऐसे में उसे कानून के उल्लंघन का आरोपी नहीं बनाया जा सकता. हालांकि ट्रिब्ल्यूनल में आवेदन को खारिज कर दिया।
ट्रिब्यूनल के सदस्य प्रभात पाराशर ने बताया कि लड़के पर तोड़फोड़ और आगजनी का भी आरोप लगा है। शिकायतकर्ता ने उसको नामजद किया है। बच्चे के वकील यह साबित नहीं कर सके कि वह भीड़ में नहीं था। वहीं लड़के के वकील कहा कि वह महिला के दावे पर ट्रिब्यूनल के अंतिम आदेश का इंतजार कर रहे हैं। उसके बाद हम तय करेंगे कि आगे क्या करना है।
बता दें खरगोन में बीते 10 अप्रैल 2022 को रामनवमी पर हुई हिंसा, इस बीच मुसलमानों के घरों को भी तोड़ और उनकी पीटाई के कई मामले सामने आए थे। पथराव, लूट और लोगों के घर जलाने जैसे मामलों पर 50 लोगों से 7.37 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि वसूल की जाएगी। यह फैसला ट्रिब्यूनल ने शुक्रवार को एक साथ छह मामलों पर सुनाया था। इनमें से चार प्रकरण में हिंदू और दो में मुस्लिम पीड़ित पक्ष हैं। दोनों पक्षों की सुनवाई, साक्ष्य और गवाहों के आधार पर जिला प्रशासन के आकलन को आधार मानकर राशि तय की है। तय गाइडलाइन अनुसार क्लेम ट्रिब्यूनल का फैसला क्रिमिनल कोर्ट के फैसले से प्रभावित नहीं होगा।
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