नई दिल्ली, पूजा स्थल अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक बैच पर जवाब देने के लिए केंद्र को 2 और सप्ताह का समय दिया और उसे 31 अक्टूबर तक हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा। सुप्रीम कोर्ट ने 14 नवंबर को सुनवाई के लिए याचिकाओं को पोस्ट किया। इन याचिकाकर्ताओं को भी तीन पेज का रिटन सबमिशन दाखिल करने को कहा गया है. अब इस मामले पर अगली सुनवाई 14 नवंबर को होगी.
मुख्य न्यायाधीश सीजेआई यूयू ललित की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि हम जानना चाहते हैं कि केंद्र सरकार का पक्ष क्या है। पीठ ने एसजी तुषार मेहता से पूछा कि आप कब तक जवाब दाखिल करेंगे। इस पर एसजी ने कहा कि दो हफ्ते में जवाब दाखिल कर देंगे। इस पर सीजेआई ललित ने कहा कि यह 1991 का अधिनियम है, उस समय के अधिकांश सांसद नहीं हो सकते हैं लेकिन यह रिकॉर्ड, संसदीय बहस आदि के रूप में है। जवाब में एसजी ने कहा कि फाइल नोटिंग भी है।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में 9 सितंबर को उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम 1991 के कुछ प्रावधानों के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब दाखिल करने के लिए 2 सप्ताह का समय दिया है। इस कानून में किसी भी धार्मिक स्थल की 15 अगस्त, 1947 की स्थिति में बदलाव या किसी धार्मिक स्थल को पुन: प्राप्त करने के लिए मुकदमा दर्ज कराने पर रोक है।
मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित, न्यायामूर्ति एस. रविंद्र भट और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की 3 सदस्यीय पीठ ने सभी आवेदकों को धार्मिक स्थलों की स्थिति में बदलाव करने पर रोक लगाने वाले उपासना स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के कुछ प्रावधानों की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई में हस्तक्षेप करने की अनुमति दे दी।
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