नई दिल्ली, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक रिपोर्ट में कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक पर फैली रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ हेट स्पीच के लिए मेटा कंपनी को भारी मुआवजा देना होगा।
इस बात की जानकारी गुरुवार को दी। AFP की एक रिपोर्ट के मुताबिक अपने देश म्यांमार से निकाले गए रोहिंग्याओं के खिलाफ अक्सर लोग सोशल मीडिया प्लेटफार्म फेसबुक पर जहर उगलते देखे जाते है। संस्था का कहना है कि बावजूद इसके फेसबुक इन्हें रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठा। साथ ही नफरती स्पीच को बढ़वा दे रहा है।
संस्था की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उनके खिलाफ फैली हिंसा को फेसबुक के एल्गोरिदम द्वारा बढ़ा दिया गया था। इसमें रोहिंग्या के खिलाफ भड़काऊ वीडियो और पोस्ट को फेसबुक पर बड़ी मात्रा में शेयर करना शामिल है। एमनेस्टी ने अपनी रिपोर्ट में आगे कहा कि कई रोहिंग्याओं ने फेसबुक के ‘रिपोर्ट’ फीचर के माध्यम से रोहिंग्या विरोधी सामग्री को रिपोर्ट करने की कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। यह वीडियो उसके बाद म्यांमार में फैली जिससे उनके खिलाफ हिंसा भड़क गई।
रिपोर्ट में अक्टूबर 2021 में व्हिसल-ब्लोअर ‘फेसबुक पेपर्स’ के खुलासे को नोट किया, जो दर्शाता है कि कंपनी के अधिकारियों को पता था कि सोशल मीडिया साइट ने अल्पसंख्यकों और अन्य समूहों के खिलाफ जहरीली सामग्री के प्रसार को बढ़ावा दिया है। फेसबुक के खिलाफ रोहिंग्या प्रतिनिधियों द्वारा अमेरिका और ब्रिटेन में तीन कानूनी मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
पिछले साल दिसंबर में अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया में फेसबुक के खिलाफ दर्ज की गई एक शिकायत में रोहिंग्या शरणार्थी $150 बिलियन (लगभग 12,27,000 करोड़ रुपये) के हर्जाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि फेसबुक ने कहा है कि अपने प्लेटफार्म पर ऐसे पोस्ट की जानकारी के लिए उसने कई कंपनियों को हायर किया है जो झूठे पोस्ट को पहचानकर उन्हें हटाने में मदद करती हैं।
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