जानें, निशांक की आत्महत्या का क्या है मामला? मीडिया ने कि मुसलमानों को बदनाम करने की कोशिश

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01 August 2022 (Publish: 03:17 PM IST)

नई दिल्ली:(रुखसार अहमद) मध्य प्रदेश में एक हिंदू लड़के का शव रेलवे ट्रैक पर मिलने के बाद, उसकी मौत को सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों ने हिंदू-मुस्लिम का एंगल देना शुरू कर दिया था। जिसका शव मिला है उसका नाम निशांक राठौर था और उसे कन्हैया की हत्या जैसा दर्दनाक मौत कहकर खबरों में खूब चलाया गया।

निशांक के फोन से किए गए कुछ विवादित मैसेज और इंस्टाग्राम स्टेटस के आधार पर इस घटना को मज़हबी रंग देकर झूठी अफवाह फैलाकर मुसलमानों को बदनाम करने की पूरी साजिश की गई। कहा गया कि निशांक की हत्या तथाकथित ‘इस्लामी जिहादियों’ ने की है क्योंकि वे नूपुर शर्मा का समर्थन कर रहा था।

बता दें कि 25 जुलाई की शाम से ही सोशल मीडिया पर #nishankrathore #justicefornishank #hinduunderattack जैसे हैशटैग ट्रेंड करके चलाया गया। सोशल मीडिया पर सभी हैशटैग के साथ दावा किया जा रहा था कि नुपूर शर्मा के समर्थन और नबी की शान में गुस्ताख़ी के कारण मध्य प्रदेश में निशांक राठौर नामक युवक की हत्या कर दी गई है। दावे के साथ साथ निशांक राठौर के विवादित व्हाट्सऐप चैट और इंस्टाग्राम स्टेटस के स्क्रीनशॉट भी बहुत ख़ूब वायरल किया जा रहा था।

बीबीसी की खबर के मुताबिक निशांक के मोबाइल से जो व्हाट्सऐप मैसेज पिता को मिला उसमें लिखा था कि ‘राठौर साहब आपका बेटा बहुत बहादुर था’, ‘नबी से गुस्ताख़ी नहीं। इसी तरह का मैसेज उसके दोस्तों के पास भी गए। इसके साथ ही उनके इंस्टाग्राम स्टेटस पर लिखा था कि “सारे हिन्दू कायरों, देख लो, अगर नबी के बारे में ग़लत बोलोगे तो इस तरीके का अंजाम होगा। कई बड़े-बड़े चैनलों ने भी इस ख़बर को प्रमुखता से चलाया और बिना जांच-पड़ताल किए घटना को सांप्रदायिक रंग देकर भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश की।

दरअसल रायसेन ज़िला पुलिस के मुताबिक़ 24 जुलाई शाम 7 बजे, थाना ओबेदुल्लागंज की चौकी बरखेड़ा के अंतर्गत रेलवे ट्रैक पर एक अज्ञात शव बरामद हुआ जिसकी पहचान निशांक राठौर नाम के 21 साल युवक के तौर पर हुई थी। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से बीटेक की पढ़ाई करने वाले निशांक सिवनी का रहना वाला था। शुरुआत में आत्महत्या लगने वाली मौत की गुत्थी तब उलझ गयी जब घटना के दिन ही निशांक के पिता को उनके फ़ोन पर बेटे के फ़ोन से किए गए “सर तन से जुदा” वाले मैसेज कथित तौर पर मिले।

इस बीच सोशल मीडिया पर इस घटना को राजस्थान के कन्हैयालाल हत्याकांड और अमरावती के उमेश कोल्हे हत्यकांड की कड़ी के तौर पर पेश किया जाने लगा। राजस्थान और अमरावती में हुई ये दोनों ही घटनाएं मज़हबी कट्टरपंथ का नतीजा थी। निशांक मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मामले की जांच के लिए सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया।

निशांक की मौत की जांच कर रहे एसआईटी प्रमुख अमृत मीणा ने कहा कि, “उन्होंने कर्ज़ न चुका पाने की वजह से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी। निशांक की हत्या नहीं हुई है, जैसा कि पहले संदेह जताया जा रहा था।

अमृत मीणा बताते है, “निशांक के फ़ोन की साइबर जाँच के बाद सामने आया कि निशांक ने क़रीब 18 ऑनलाइन ऐप से लोन ले रखा था, इसके अलावा उसने अपने कई दोस्तों से भी पैसे उधार ले रखे थे, पर उसके पास कर्ज़ चुकाने के पैसे नहीं थे। निशांक के मोबाइल फ़ोन से अपने पिता के लिए लिखा गया आख़िरी मैसेज हिंदी में था जिसमें ‘सिर तन से जुदा’ करने की बात कही गई थी। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी इसी तरह का मैसेज पोस्ट किया था।

एसआईटी प्रमुख आगे कहते हैं, “साइबर जांच से पता चला कि इंस्टाग्राम स्टोरी लगाने के बाद निशांक के पास तीन दोस्तों से विवादित स्टोरी पर रिएक्शन आए थे जिसका निशांक ने जवाब भी दिया था। इस घटना से पहले निशांक ने कभी भी किसी धर्म या मज़हब के पक्ष या विपक्ष में किसी तरह की कोई सामग्री सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पोस्ट या शेयर नहीं की थी। मीणा के अनुसार, निशांक के फ़ोन पर पासवर्ड लगा था। उनके फ़ोन पर किसी भी बाहरी व्यक्ति ने किसी तरह की कोई छेड़छाड़ नहीं की है, और न ही घटनास्थल पर निशांक के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की उपस्थिति के कोई सबूत पाए गए।

फ़ोन से 24 जुलाई को शाम आखिरी बार छह बजे निशांक अपने पिता को फ़ोन करते हैं, पर उनके पिता वह कॉल नहीं उठा पाते, और उसके कुछ मिनटों बाद निशांक ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस की चपेट में आते हैं, जिसके कारण उनकी मौत हो जाती है।

जाँच से ये बात साफ़ हो जाती है कि निशांक राठौर की मौत का किसी षड़यंत्र, हत्या या मज़हबी कट्टरपंथ से कोई लेना-देना नहीं है। बल्कि ये एक आत्महत्या है।

बता दें गोदी मीडिया ने निशांक की मौत को पूरी तरीके से यह कहकर खबरों में चलाया कि उसकी हत्या नूपुर शर्मा के समर्थन करने पर मारा गया है, क्योंकि उसने नबी की शान में गुस्ताखी की थी। इससे सबित होता है कि मुसलमानों के प्रति जहर घोलने और उनका छवि खराब करने में गोदी मीडिया का सबसे बड़ा हाथ है।

 

 

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