नई दिल्ली: (रुखसार अहमद) बिहार के शिवहर से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। जहां दो बच्चे नदी में डूबने से मौत हो गई। उनमें से एक नाम नफीस है और एक नाम मनीष है। लेकिन इस मामले में नफीस के पिता अशरफ अली का कहना है कि उनके बेटे की हत्या हुई है, और पुलिस इसपर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है।
वहीं इस मामले में मिल्लत टाइम्स ने जब पुलिस से बात की तो उनका कहना है कि मामले की जांच चल रही है। अभी पोस्टमार्टम की रिपोर्ट नहीं आई है, इसलिए दोनों की लाश नदी में मिली है तो डूबने की वजह से मौत हुई है, असल वजह हम पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने तक ही बता पांएगे।
लेकिन नफीस के पिता ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह अमन नाम के लड़के को बचाने की कोशिश कर रहे है। क्योंकि अमन थाना प्रभारी की जाति का है, कुर्मी जाति से अमन ताल्लुक रखता है और मनीष और नफीस का अच्छा दोस्त है।
बता दें नफीस के पिता ने बताया कि 15 जुलाई को तीन से चार लड़के मेरे बेटे को घर से खेलने के लिए बुलाकर ले गए थे। उसी दिन इस घटना को अंजाम दिया। अमन, नफीस, मनीष यह तीनों एक साथ गए थे, जिनमें से बेरे बेटे और मनीष की लाश मेरे घर से 65 किलोमीटर दूर बरामद हुई है।
मुझे शक है अमन का हाथ मेरे बेटे की हत्या में हो सकता है, क्योंकि उसके घर से नफीस का चश्मा मिला है। तीनों की उम्र भी 15-16 साल की है। अमन ने पुलिस के सामने ही तीन बार अपना बयान बदला है, कभी वह कहता है कि हम नदी में नहा रहे थे, तो हम तीनों डूबने लगे मैंने जल्दी से भाग कर अपनी जान बचाई, लेकिन बाद में वह बोलता है कि मैं डूब रहा था वह दोनों मुझे बचाने आए थे, मैं तो बच गया लेकिन वह दोनों डूब गए।
नफीस के पिता ने कहा कि मेरे बेटे को तैरना तक नहीं आता तो पानी में जाने का सोच कैसे सकता है। मेरा बेटा 3 दिन से लापता था मैंने गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की और अमन ने 3 दिन तक यह बात छुपाई की दोनों की मौत हो चुकी है।
बाद में पुलिस को नदी के पास मेरे बेटे नफीस और मनीष की लाश बरामद हुई। अगर अमन बेकसूर है तो फिर उसने 3 दिन तक यह घटना के बारे में क्यों नहीं बताया। इतना ही नहीं यह तीनों बागमती नदी के पास गए थे तो मेंरे बेटे की लाश बहकर औराई बेनीपुर में से कैसे बरामद हुई।
नफीस के पिता ने कहा कि मेरे बेटे के शरीर पर चोट के निशान मिले हैं मनीष का पूरा मुंह बिगड़ा था और मेरे बेटे का भी पूरा चेहरा बिगाड़ दिया गया था, हमने बिना चेहरे देखे अपने बेटे को दफन किया है, क्योंकि पोस्टमार्टम के बाद उसके अंदर कुछ नहीं बचा था।
अगर मौत डूबने से हुई है, तो फिर जीभ बाहर कैसे आ सकती है, ऐसा लग रहा है कि मेरे बेटा का गला दबाया गया है, चेहरा बिगाड़ दिया गया है। नफीस के पिता ने कहा जो वह कपड़े पहन के निकला था वह भी पुलिस ने बरामद नहीं किए। कहने पर भी पुलिस टालमटोल कर रही है मेरे बेटे के शरीर से किसी बड़े शख्स के कपड़े बरामद हुए हैं।
यह घटना 15 जुलाई को हुई लेकिन अमन ने इसकी कोई जानकारी नहीं दी। 18 जुलाई को मेरे बेटे की लाश एक नदी के पास से बरामद हुई। अशरफ ने पुलिस पर आरोप लगाया कि इस केस में पुलिस बहुत लापरवाही कर रही है, ना हमारा फोन उठाती है, और ना ही हम से बात करती है, मेरा भाई जब किसी मामले को लेकर बात करने गया तो पुलिस ने उनके साथ गाली गलौज की।
मनीष के बारे में नफीस के पिता ने बताया कि उसके मां-बाप को तो उसकी परवाह ही नहीं है ऐसा लग रहा है, जैसे उनका बेटा मरा ही नहीं है। नफीस के पता ने कहा है हमें बस SP ने आश्वासन दिया है कि आप घबराए नहीं उचित कार्रवाई की जाएगी।
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