नई दिल्ली : (रुखसार अहमद) देश की 15वें राष्ट्रपति बनने जा रही है द्रौपदी मुर्मू चुनाव जीत गई है। वह अब पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति रुप में शपथ लेगी। मुर्मू ने विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को बड़े अंतर से हराया।
जीत के लिए 5,43,261 मूल्य के वोट चाहिए थे और सत्ताधारी एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को तीसरे चरण की मतगणना में ही 5,77,777 मूल्य के वोट मिल गए। वहीं, विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को सिर्फ 2,61,062 मूल्य के वोट प्राप्त हुए हैं। जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके घर पहुंच कर उनको बधाई दी।
20 जून 1958 में जन्मी मुर्मू की पढ़ाई-लिखाई भुवनेश्वार के रमादेवी वुमेंस कॉलेज से हुई है। वह स्ना।तक हैं। द्रौपदी मुर्मू पहली आदिवासी महिला गवर्नर का भी है। अब वह राष्ट्रपति बनने वाली है जो उनके लिए गर्व की बात होगी।
आइए जानते है कौन है द्रौपदी मुर्मू जो बनाने जा रही है भारत की 15वें राष्ट्रपति…
झारखंड की नौंवी राज्यपाल रहीं 64 साल की द्रौपदी मुर्मु ओडिशा के मयूरभंज की रहने वाली हैं। वे ओडिशा के ही रायरंगपुर से विधायक रह चुकी हैं। द्रौपदी मुर्मू 18 मई 2015 से झारखण्ड की राज्यपाल हैं। वह एक सामान्य शिक्षक से राजनीति के सर्वोच्च शिखर की ओर बढ़ी हैं। उनका पूरा जीवन समाज सेवा के प्रति समर्पित रहा है। खासकर अुसूचित जनजाति के कल्याण के लिए उन्होंने काफी योगदान दिया है।
द्रौपदी मुर्मू के राजनीतिक करियर की शुरुआत 1997 में हुई थी, जब वह ओडिशा के रायरंगपुर अधिसूचित क्षेत्र में काउंसलर चुनी गई थीं और फिर उसकी वाइस चेयरपर्सन बनी थीं। बीजेपी ने उसी साल मुर्मू को ओडिशा अनसूचित जनजाति मोर्चा का प्रदेश उपाध्यक्ष भी बनाया था। बाद में वह इसकी अध्यक्ष भी बनीं।
2013 में पार्टी ने उन्हें एसटी मोर्चा का राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य नियुक्त किया था। 2007 में ओडिशा सरकार द्रौपदी मुर्मू को सर्वश्रेष्ठ एमएलए के लिए ‘नीलकंठ अवॉर्ड’ भी दे चुकी है। ओडिशा में राजनीति करने के दौरान उन्होंने आदिवासी समुदाय के उत्थान के लिए काफी सक्रिय योगदान दिया है।
बता दें राजनीति में आने से पहले मुर्मू टीचर रही हैं। समाज सेवा के प्रति उनका समर्पण ऐसा रहा है कि रायरंगपुर के श्री अरबिंदो इंटिग्रल एजुकेशन सेंटर में वह बिना सैलरी के पढ़ाती थीं।
वहीं ओडिशा में बीजेडी और बीजेपी गठबंधन सरकार के दौरान द्रौपदी मुर्मू 2000 और 2004 के बीच वाणिज्य और ट्रांसपोर्ट और फिर बाद में मत्स्य और पशुपालन संसाधन विभाग में मंत्री का दायित्व भी संभाल चुकी हैं। जब, केंद्र में 2014 में नरेंद्र मोदी की सरकार बनी तो 2015 में उन्हें झारखंड की पहली महिला और आदिवासी गवर्नर के तौर चुना गया। यानी उनके पास एक लंबा प्रशासनिक अनुभव है। बहुत ही गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली मुर्मू ओडिशा के एक बहुत ही पिछड़े जिले से आती हैं। लेकिन, सभी तरह की कठिनाइयों के बावजूद पढ़ाई के प्रति उनकी ललक ऐसी थी कि उन्होंने अपना शिक्षा पूर्ण किया।
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