नई दिल्ली, आगरा में ताजमहल और तेजो महल के विवाद को हवा देने वालों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) ने जवाब देकर यह साफ किया है ताजमहल में मूर्तियां का दावा झूठा है। पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के जवाब में माना है कि मंदिर की जगह ताजमहल को नहीं बनवाया गया था।
ताजमहल के अंदर किसी भी बंद कमरे में देवी-देवताओं की मूर्तियां नहीं रखी गई हैं। एक शख्स ने सूचना के अधिकार के तहत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से जानकारी मांगी थी कि क्या ताजमहल को किसी मंदिर की जगह बनवाया गया था। इसके साथ ही यह जानकारी मांगी गई थी कि क्या किसी बंद कमरे में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां रखी गई हैं।
बता दें कि हिंदूवादी संगठनों से जुड़े लोग लगातार ताजमहल को तेजो महालय कहकर विवाद खड़ा करते रहे हैं। एक किताब में किए गए दावे को आधार बनाकर कुछ लोगों ने हनुमान चालीसा पढ़ने की भी मांग की थी। हालांकि प्रशासन ने इजाजत नहीं दी थी।
दरअसल वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद विवाद के दौरान कुछ लोगों ने दावा किया था कि ताजमहल मंदिर की जगह बनाया गया था। साथ ही दावा किया गया था कि ताजमहल के तहखान में मौजूद बंद 22 कमरों में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां हो सकती हैं। इस मामले को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में एक याचिका भी दायर की गई थी।
याचिका में मांग की गई थी कि ताजमहल के 22 कमरे खोले जाएं। ताकि यह पता चल सके कि उसमें मूर्तियां या शिलालेख हैं या नहीं। दरअसल, ताजमहल को लेकर विवाद की शुरुआत इतिहासकार पीएन ओक की किताब टू स्टोरी ऑफ ताज से शुरू हुआ था। किताब में ताजमहल के शिव मंदिर होने से संबंधित कई दावे किए गए थे। इस किताब के सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ा और हाई कोर्ट भी मामला पहुंचा।
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