नई दिल्ली : देश के वरिष्ठ नेता फारूक अब्दुल्ला, सलमान खुर्शीद और अजीज कुरैशी सहित अन्य जाने माने व्यक्तियों के साथ रविवार को नई दिल्ली के आईवान-ए-गालिब ऑडिटोरियम में मुस्लिम बुद्धिजीवियों की बैठक में शामिल हुए।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने रविवार को सभा के दौरान कहा कि जम्मू-कश्मीर में तब तक शांति नहीं हो सकती, जब तक आप लोगों का दिल नहीं जीत लेते। नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में बोलते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि भारत के पड़ोसी को भी यह महसूस करना चाहिए कि हमें खुशी से साथ रहना है।
फारूक अब्दुल्ला ने कहा भारत के मुसलमान आज अपने आप को असुरक्षित महसुस करते हैं। मुसलमानों ने स्वतंत्रता के लिए राष्ट्रीय संघर्ष में भाग लिया और देश के सम्मान के लिए अपनी जान दे दी। मुसलमानों को आज इस तथ्य के बावजूद संदेह की नजर से देखा जाता है शेर ए कश्मीर शेख अब्दुल्ला भी निस्वार्थ नायकों की उस जमात से थे, जिन्होंने देश को अंग्रेजों से मुक्त करने के लिए कई बार जेल गए और कठिनाइयों का सामना किया।
फारूक अब्दुल्ला ने आगे कहा हम चीनी, रूसी, अमेरिकी मुसलमान नहीं हैं हम पर भरोसा करें। आप जितनी चाहें उतनी सेना ला सकते हैं। आप कश्मीर में शांति नहीं ला पाएंगे, जब तक आप लोगों का दिल नहीं जीतेंगे। और यह युद्ध के माध्यम से संभव नहीं है। जब तक हम अपने पड़ोसी से बात नहीं करते और वे भी आश्वस्त नहीं हो जाते कि हमें खुशी-खुशी साथ रहना है, तब तक कश्मीर में शांति नहीं होगी।
मुस्लिम जमात के गठन के मुद्दे पर रविवार को राजधानी के आईवान-ए-गालिब में दिन भर चर्चा हुई, जिसमें जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद और के. रहमान खान, पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी, अनंतनाग से नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद हसनैन मसूदी, उत्तर प्रदेश के संभल से सपा सांसद शफीकुर रहमान बर्क और इत्तेहाद मिल्लत-ए-काउंसिल के तौकीर रजा खान शामिल थे।
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