दिल्ली दंगा: कोर्ट ने 10 लोगों के खिलाफ आगज़नी के आरोप हटाए, कहा- पुलिस अपनी खामियों को छुपा रही है…

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23 September 2021 (Publish: 10:49 AM IST)

नई दिल्ली, (रुखसार अहमद) दिल्ली की एक अदालत ने फरवरी 2020 में हुए दंगों के दौरान दुकानों में कथित रूप से लूटपाट करने के 10 आरोपियों के खिलाफ आगजनी का आरोप हटा दिया है। इसके साथ ही अदालत ने कहा कि पुलिस एक खामी को छिपाने की और दो अलग-अलग तारीखों की घटनाओं को एक साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है।

यह मामला तीन शिकायतों के आधार पर दर्ज किया गया था। बृजपाल ने आरोप लगाया था कि दंगाई भीड़ ने 25 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के बृजपुरी मार्ग पर उनकी किराये की दुकान को लूट लिया था। वहीं, दीवान सिंह ने आरोप लगाया था कि 24 फरवरी 2020 को उनकी दो दुकानों में लूटपाट की गई।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने आगजनी के आरोप रद्द करते हुए कहा कि शिकायतकर्ताओं ने अपने शुरुआती बयानों में दंगाई भीड़ द्वारा आग या विस्फोटक पदार्थ के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा। दीवान सिंह ने अपने पूरे बयान में कहा कि दंगाई भीड़ ने उनकी दुकान में आग लगा दी। इस पर अदालत ने कहा कि अगर पुलिस में की गई शुरुआती शिकायत में आगजनी का अपराध नहीं था तो जांच एजेंसी पूरक बयान दर्ज करके खामी को नहीं ढंक सकती है।

अदालत ने आगे कहा कि केवल उन पुलिस गवाहों के बयानों के आधार पर आगजनी के आरोप नहीं लगाए जा सकते जो घटना की तारीख पर संबंधित क्षेत्र में ‘बीट’ अधिकारी के रूप में तैनात थे। अदालत ने कहा कि वह यह नहीं समझ पा रही है कि 24 फरवरी 2020 को हुई घटना को 25 फरवरी 2020 की घटना के साथ कैसे जोड़ा जा सकता है, जब तक कि यह स्पष्ट सबूत नहीं हो कि दोनों तारीखों पर एक ही दंगाई भीड़ थी।

न्यायाधीश ने कहा, ‘उपरोक्त चर्चा के मद्देनजर मेरा विचार है कि धारा 436 आईपीसी (आग या विस्फोटक पदार्थ से शरारत) की सामग्री जांच एजेंसी द्वारा रिकॉर्ड पर पेश की गई सामग्री से बिल्कुल भी नहीं बनाई गई है। दस आरोपी- मोहम्मद शाहनवाज, मोहम्मद शोएब, शाहरुख, राशिद, आजाद, अशरफ अली, परवेज, मोहम्मद फैजल, राशिद, मोहम्मद ताहिर हैं।

अदालत ने हालांकि धारा 147 (दंगा), 148 (दंगा, घातक हथियार से लैस), 149 (गैरकानूनी सभा), 188 (लोक सेवक द्वारा आदेश की अवज्ञा), 354 (हमला), 392 (डकैती), 427 (शरारत), 452 (घर में अतिचार), 153-ए (धर्म के आधार पर असामंजस्य को बढ़ावा देना), 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप तय किए।

उन्होंने मामले को मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट को स्थानांतरित करने का आदेश दिया। ऐसा पहली बार नहीं है जब दिल्ली पुलिस को दंगों की जांच के लिए अदालतों ने फटकार लगाई है। दिल्ली दंगों के विभिन्न मामलों से निपटने के तरीके को लेकर पुलिस पर अदालत हाल के दिनों में कई बार सवाल उठा चुकी है।

बीते 17 सितंबर को दिल्ली की एक अदालत ने ‘लापरवाही भरे रवैये’ को लेकर पुलिस को फटकार लगाई थी और कहा था कि पुलिस आयुक्त और अन्य शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने 2020 के दंगा मामलों के उचित अभियोजन के लिए सही कदम  नहीं उठाए हैं।

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