नई दिल्ली : ( शयान असकर ) जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के बयान पर एक बार फिर से बवाल मचा हुआ है। उन्होंने एक बयान में कहा है कि लड़कियों के लिए अलग से स्कूल खोला जाए । लड़के और लड़कियों को साथ नहीं पढ़ाया जाए । इस दौरान उन्होंने कहा कि गैर मुस्लिम भाइयों को भी इससे परहेज करना चाहिए। मौलाना अरशद मदनी के इस बयान को लेकर कुछ लोग समर्थन करते दिख रहे हैं तो वहीँ कुछ लोग इसकी आलोचना भी कर रहे हैं ।
मुफ्ती अरशद क़ासमी ने मौलाना अरशद मदनी का समर्थन करते हुए कहा है कि जिस तरह से माहौल खराब है इसी के मद्देनजर मौलाना ने जो कहा है वो बिल्कुल सही कहा है।
वहीं केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने पलटवार करते हुए कहा है कि हिंदुस्तान संविधान से चलता है ना की शरीयत से। ये लोग लड़कियों के स्वतंत्रता के खिलाफ हैं और यह कौन होते हैं तय करने वाले की बच्चियां कहां पढ़ेंगी और कहा नहीं पढ़ेंगी । इस तरह के मानसिकता वालों को न कभी देश स्वीकार किया है और न करेगा।
वही मुस्लिम धर्मगुरु खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा है की स्कूल तक तो को -एजुकेशन ठीक है लेकिन कॉलेज लेवल पर इस पर सोचना जरूरी है।
वहीँ अरशद मदनी के बयान पर यूपी के मंत्री मोहसिन रजा ने अपनी प्रतिकिर्या दी है कहा कि ये तालिबानी विचारधारा के लोग हैं, ये लड़कियों को कलम की जगह हथियार देना चाहते हैं, ये लोग महिलाओं को तीन तलाक की बेड़ी में रखना चाहते हैं । ऐसे लोगों को पिछली सरकार में संरक्षण मिलता रहा है हम ऐसे लोगों को न संरक्षण देंगे और न ही समर्थन करेंगे।
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