मुल्क बचाने के लिए है यह किसान आंदोलन : धीरेंद्र झा

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28 January 2021 (Publish: 09:24 AM IST)

भाकपा-माले नेता ने किसान आंदोलन के पक्ष में 30 जनवरी को महागठबंधन के मानव श्रंखला में शामिल होने का किया आह्वान

किसान गणतंत्र बचाने का संघर्ष कर रहे हैं: शशि यादव

किसान आंदोलन देश की आज़ादी की रक्षा के लिए हो रहा है: उमेश सिंह

*एआइपीएफ के नागरिक अभियान “किसानों के साथ हम पटना के लोग” के आठवें दिन जुटे सैकड़ों लोग, उठाई मोदी सरकार द्वारा पारित कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग

*जनगीत और कविता पाठ से लोगों को किया जागरूक

पटना ( मुजफ्फर आलम ): तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ गणतंत्र दिवस के दिन पटना के दीघा हाट पर ऑल इंडिया पीपल्स फोरम (एआइपीएफ) के बैनर तले आयोजित अभियान “किसानों के साथ हम पटना के लोग” के साथ प्रबुद्ध जनों ने आम लोगों को कृषि कानूनों के जनविरोधी पहलुओं से अवगत कराते हुए इनके खिलाफ आवाज़ उठाने का आह्वान किया.

बतौर मुख्य वक्ता भाकपा-माले के पॉलित ब्यूरो सदस्य और अखिल भारतीय खेत व ग्रामीण मजदूर सभा के राष्ट्रीय महासचिव धीरेंद्र झा ने गणतंत्र दिवस को याद करते हुए कहा कि इस देश को जिन मज़दूर-किसानों ने बनाया आज वही जब देश की राजधानी दिल्ली में प्रवेश कर रहे थे तो लोग जहां उनके स्वागत में फूल बरसा रहे थे वहीं दिल्ली पुलिस के जवान उन पर लाठियां बरसा रही थी.

बीते दशकों में देश में आए अकाल का हवाला देते हुए भाकपा-माले नेता ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों का गला घोंटकर संसद से पास कराए गए ये तीनों कृषि क़ानून अमल में जाएंगे तो धीरे-धीरे जन वितरण प्रणाली ख़त्म हो जाएगी और इस देश की 70 फीसद से भी अधिक लोगों की थाली से भोजन छिन जाएगा. इस तरह देश एकबार फिर अकाल की चपेट में आ जाएगा और लोग भूखे मरने को मजबूर हो जाएंगे जिसकी आशंका बार-बार अर्थशास्त्री जता चुके हैं.

उन्होंने कहा कि जिस तरह ईस्ट इंडिया कंपनी के अंग्रेज हमारे देश में व्यापार करने आए थे और धीरे-धीरे पूरे देश को ग़ुलाम बना दिया, उसी तरह मोदी सरकार एक-एक कर इस देश की सारी सार्वजनिक संपत्ति पूंजीपतियों के हाथों बेचकर देश में कंपनी राज स्थापित करते हुए एक बार फिर से इस देश को गुलाम बनाना चाहती है. किसान आज देश को उसी गुलामी से बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं. किसानों की यह लड़ाई महज खेती-किसानी बचाने की नहीं, इस देश की आज़ादी और संविधान बचाने की लड़ाई है.

लोगों से आज़ादी के लिए संघर्ष कर रहे किसानों के आंदोलन का समर्थन करने की अपील करते हुए भाकपा-माले नेता ने आह्वान किया कि महात्मा गांधी के शहादत दिवस 30 जनवरी को 12.30 बजे दिन से राज्य भर में लगाई जा रही मानव श्रंखला का हिस्सा बनें .

ऐपवा राज्य सचिव शशि यादव ने कहा कि गणतंत्र दिवस पर देश भर में लोग जहां जश्न मना रहा थे, वहीं किसान इस गणतंत्र को बचाने का संघर्ष कर रहे थे. कृषि कानूनों को किसान विरोधी और जन विरोधी बताते हुए उन्होंने एलान किया कि जब तक ये क़ानून वापस नहीं होंगे, किसान घर वापस नहीं जाएंगे. लिहाजा किसानों के इस संघर्ष में हमारा-आपका एकजुट होना ज़रूरी है.

अखिल भारतीय किसान महासभा के प्रदेश सह सचिव उमेश सिंह ने मोदी सरकार को आपदा में अवसर ढूंढने वाली सरकार बताते हुए कहा कि इस कोरोना महामारी के दौर में जहां दूसरे देश की सरकार अपने देश के लोगों के जान-माल की रक्षा में लगी है, वहीं हमारे देश की मोदी सरकार तमाम सार्वजनिक चीजों का निजीकरण कर देश बेचने में लगी है. रेल, तेल , एयरपोर्ट सब बेच दिया और एल आई सी के बाद अब बैंकों के बेचने की तैयारी चल रही है. लेकिन गणतंत्र दिवस पर हम संकल्प लेते हैं कि हम अपने देश, अपनी आज़ादी को ख़त्म नहीं होने देंगे.

कार्यक्रम का संचालन करते हुए इस नागरिक अभियान के संयोजक एआइपीएफ से जुड़े वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता ग़ालिब ख़ान ने कहा कि आज अगर मजदूर-किसान, छात्र-नौजवान-महिला राजनीति नहीं करेंगे तो कौन करेगा. किसानों के साथ खड़ा होना ही आज का सच्चा राष्ट्रप्रेम है. किसान आंदोलन से व्यापक समाज का जुड़ाव हो यह आज हम सबकी ऐतिहासिक जिम्मेदारी हो गयी है. जब तक सरकार ये काले क़ानून वापस नहीं लेती, इन क़ानूनों के ख़िलाफ़ नागरिक समाज अपनी आवाज़ बुलंद करता रहेगा.

इस दौरान सांस्कृतिक संगठन ‘कोरस’ की समता राय व जन संस्कृति मंच के अनिल अंशुमन ने मिलकर जनगीतों और कवि राजेश कमल व शारिक़ असीर ने अपनी कविताओं की प्रस्तुति कर लोगों से किसान आंदोलन के साथ जुड़ने का आह्वान किया.

इनके अलावा कार्यक्रम में वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता रणजीव, प्राध्यापक अनिल राय, इंसाफ मंच की आस्मां खान, कर्मचारी नेता प्रेमचंद सिन्हा , जीतेन्द्र कुमार, प्रशांत विप्लवी, रामकल्याण सिंह, मीना देवी व मो.सोनू समेत नागरिक समाज के दर्जनों लोग मौजूद थे.

ग़ालिब
ऑल इंडिया पीपल्स फ़ोरम (एआइपीएफ),
पटना

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