नई दिल्ली….. महिलाओं के मदद के लिए बनाए गए राष्ट्रीय महिला आयोग की भूमिका पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा से लेकर इसकी सदस्य ऐसे बेतुके बयान देती रही हैं, जिन्हें कभी भी स्वीकार नहीं किया जा सकता। महिला आयोग की सदस्य चंद्रमुखी देवी के जरिये बदायूं में महिला के साथ हुई बर्बरता और रेप को लेकर दिए गए बयान के कारण महिला आयोग की चरों ओर आलोचना हो रही है। ।
चंद्रमुखी देवी ने बदायूं में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा, ‘किसी के प्रभाव में महिला को समय-असमय नहीं पहुंचना चाहिए। देवी ने कहा कि मैं सोचती हूं कि अगर शाम के समय वह महिला नहीं गई होती या परिवार का कोई बच्चा साथ में होता तो शायद ऐसी घटना नहीं होती।’ चंद्रमुखी देवी ने आगे कहा कि इसके लिए पहले से योजना बनाई गई थी क्योंकि महिला को फ़ोन करके बुलाया गया था, वह चली गई और बेहद ख़राब हालत में लौटी। चंद्रमुखी देवी ने बदायूं पहुंचकर पीड़ित परिवार और एसएसपी से मिलकर घटना की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि वह इस मामले में पुलिस की भूमिका से संतुष्ट नहीं हैं।
आप को बता दें कि बदायूं में 50 वर्षीय महिला के साथ बदायूं में उस समय बर्बरता हुई थी जब वह पिछले रविवार की शाम को मंदिर गयी थी। मंदिर के महंत और उसके दो चेलों पर महिला के साथ बलात्कार और उसकी हत्या करने का आरोप है। इस भयानक वारदात के बाद मंदिर का महंत कई दिनों तक ग़ायब रहा और चार दिन बाद पुलिस उसे गिरफ़्तार कर पाई है। पुलिस ने उसकी जानकारी देने पर 50 हज़ार रुपये का इनाम घोषित किया था। मामले में दो अन्य आरोपियों की गिरफ़्तारी पहले ही हो चुकी है। महंत का नाम सत्यानंद के रूप में हुई है।
चंद्रमुखी देवी के कहने का मतलब यह है कि महिलाएं घर से बाहर न निकलें अगर निकल भी रही हैं तो घर का कोई जिम्मेदार साथ में हो। अगर कोई जिम्मेदार साथ नहीं है तो महिलाएं घर से न निकले।
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