लखनऊ में एक न्यूज़ चैनल के रिपोर्टर रहे 30 साल के युवा शख़्स की कानपुर में कोरोना से बीते दिनों मौत हो गई. कोरोना वायरस के संक्रमण की पुष्टि होने के बाद से वह कानपुर में अपने घर पर ही होम आइसोलेशन में थे.
कोरोना पॉज़िटिव रिपोर्ट आने के चौथे दिन उनकी तबीयत बिगड़ने लगी. जिसके बाद उन्हें पहले एक प्राइवेट कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया. हालत में सुधार नहीं होने पर कानपुर कैंट में स्थित सेवन एयरफ़ोर्स हॉस्पिटल में रेफ़र कर दिया गया
परिवार वालों के मुताबिक़ इलाज के दौरान उन्हें दो बार प्लाज़्मा थेरेपी दी गई, साथ ही रेमडेसिवीर इंजेक्शन भी लगाए लगे. उन्हें लगातार वेंटीलेटर पर ही रखा गया. उनके बड़े भाई ऋषि शुक्ला बताते हैं कि रात तक डॉक्टर्स ने भाई की हालत स्थिर होने की जानकारी दी थी, लेकिन सुबह जब वह अस्पताल पहुंचे तो उनको भाई की मौत की ख़बर मिली.
शुक्ला परिवार जिस असमय दुख के दौर से गुज़र रहा है, वैसा दुख कानपुर के कई परिवारों को झेलना पड़ रहा है और हर दिन उनकी संख्या बढ़ती जा रही है.
भारत के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण से सबसे ज़्यादा मौतें कानपुर में ही हुई हैं. हालांकि, प्रदेश की राजधानी लखनऊ बहुत पीछे नहीं है. 12 सितंबर तक कोरोना से कानपुर में 527 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लखनऊ में 516 लोगों की.
लेकिन कानपुर की स्थिति इसलिए भी ज़्यादा गंभीर है क्योंकि लखनऊ की तुलना में कोरोना संक्रमण के मरीज़ों की संख्या कानपुर में आधी है. रविवार को लखनऊ में जहां 847 नए संक्रमण के मामले सामने आए वहीं, कानपुर में महज़ 338. लखनऊ में कुल सक्रिय मरीज़ों की संख्या नौ हज़ार से ज़्यादा है जबकि कानपुर में 4500 से ज़्यादा.
इस हिसाब से देखें तो 12 सितंबर तक कानपुर में कोरोना से होने वाली मृत्यु दर 2.65 प्रतिशत है जबकि लखनऊ में मृत्युदर 1.31 प्रतिशत है. मृत्युदर के हिसाब से कानपुर के बाद यूपी में मेरठ दूसरे नंबर पर है जहां कोरोना संक्रमण से होने वाली मृत्युदर 2.63 प्रतिशत है. अभी तक वहां 171 लोगों की मौत हुई है.
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