उत्तर प्रदेश सरकार ने रविवार को विशेष सुरक्षा बल के गठन की अधिसूचना जारी कर दी, जिसके तहत सुरक्षा बलों को किसी भी व्यक्ति को बिना वारंट गिरफ़्तार करने, तलाशी लेने और ऐसे ही कई असीमित अधिकार मिल जाएँगे.
विशेष सुरक्षा बलों की तैनाती शुरुआत में सरकारी इमारतों, धार्मिक स्थलों जैसी महत्वपूर्ण जगहों पर होगी और निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठान भी पैसे देकर इनकी सेवाएँ ले सकेंगे.
हाल ही में विधानसभा के संक्षिप्त मॉनसून सत्र में इस विधेयक को पारित किया गया था और फिर राज्यपाल की मंज़ूरी मिलने के बाद इसे लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी गई है.
उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी ने विशेष सुरक्षा बल के गठन की अधिसूचना जारी करते हुए बताया कि इसका मुख्यालय लखनऊ में होगा और अपर पुलिस महानिदेशक स्तर के अधिकारी इस विशेष पुलिस बल के प्रमुख होंगे.
अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने बताया कि यूपी एसएसएफ़ के पास इलाहाबाद हाईकोर्ट, लखनऊ खंडपीठ, ज़िला न्यायालयों, राज्य सरकार के महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यालयों, पूजा स्थलों, मेट्रो रेल, हवाई अड्डों, बैंकों और वित्तीय संस्थाओं, औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी होगी.
पैसे देकर निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठान भी इसकी सेवाएँ ले सकेंगे और उन परिस्थितियों में भी पुलिस बल के ये असीमित अधिकार बने रहेंगे.
अधिनियम के अनुसार अगर विशेष सुरक्षा बल के सदस्यों को यह विश्वास हो जाए कि कोई भी अभियुक्त कोर्ट से तलाशी वारंट जारी करने के दौरान भाग सकता है या अपराध के साक्ष्य मिटा सकता है, तो ऐसी स्थिति में उस अभियुक्त को तुरंत गिरफ़्तार किया जा सकता है.
यही नहीं, अभियुक्त के घर और संपत्ति की तत्काल तलाशी भी ली जा सकती है. इसके लिए सर्च वारंट या मजिस्ट्रेट की अनुमति की ज़रूरत नहीं होगी. हालांकि ऐसा करने के लिए एसएसएफ़ जवान के पास पुख़्ता सबूत होने चाहिए.
अधिनियम के मुताबिक़, ऐसी किसी भी कार्रवाई में सुरक्षा बल के अधिकारी या सदस्य के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज नहीं कराया जा सकेगा और बिना सरकार की इजाज़त के न्यायालय भी विशेष सुरक्षा बल के किसी सदस्य के विरुद्ध किसी अपराध का संज्ञान नहीं लेगा.
इस अधिनियम के गठन पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. राजनीतिक दलों ने अधिनियम को काला क़ानून बताते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की है.
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