शिक्षकों के वर्तमान हालात के लिए पूर्व एमएलसी केदार पांडे भी समान रूप से दोषी हैं. अगर वे सक्रिय रहे होते तो शिक्षा और शिक्षकों का यह हाल कभी नहीं हुआ रहता. यह बातें पूर्व एमएलसी चंद्रमा सिंह ने मढौरा में आयोजित प्रेस वार्ता में कही.उन्होंने कहा कि बिहार में 3.20 लाख प्राथमिक और मध्य विद्यालय के नियोजित शिक्षक हड़ताल पर है और 24 अप्रैल से 33 हजार हाई स्कूल के शिक्षक भी हड़ताल पर जाने की घोषणा कर चुके है. विद्यालय में तालाबंदी से शिक्षा व्यवस्था भी बेपटरी हो चुकी है. पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा ने विकास का सबसे बड़ा आधार शिक्षा को माना था. उन्होंने समाज के विकास के लिए शिक्षकों को सम्मान दिया था. अपने कार्यालय में सैकड़ों स्कूल-कॉलेज को अंडरटेक कर शिक्षकों को वेतनमान दिया.
वर्तमान में हजारों स्कूल कॉलेज के रहते सरकार मध्य विद्यालय को अपग्रेड कर हाई स्कूल बना रही है. शिक्षकों की उपेक्षा कर समाज की बेहतरी बेमानी है. सरकार व्यवस्था को पटरी पर लाने का प्रयास करें.
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