वैली ऑफ़ वर्ड्स २०२० के अंतिम दिन संसदीय चर्चा-परिचर्चा का आयोजन किया गया, जिसका विषय -‘राज्यों का पुनर्गठन: अपरिहार्य या न्यायसंगत?!’ रहा। पिछले तीन वर्षों में, वॉक्स पॉपुली वैली ऑफ़ वर्ड्स में सबसे लोकप्रिय सत्रों में से एक रहा है। सांसदों को एक ऐसे मुद्दे पर स्वतंत्र रूप से बातचीत करनी होती है, जो संसदीय एवं राजनैतिक परिप्रेक्ष्य में सटीक बैठता हो ।
इस वर्ष, सत्र दिवंगत सांसद डीपी त्रिपाठी को समर्पित था। वॉक्स पॉपुलीसत्र का आरम्भ स्वर्गीय डी पी त्रिपाठी डी को समर्पित एक श्रद्धांजलि वीडियो से हुआ, जिसमे महाराष्ट्र के महामहिम राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी और अनेको देश विदेश के दिग्गजों –
श्री विमलेन्द्र निधि (पूर्व उप प्रधान मंत्री और के गृह मंत्री, नेपाल),श्री पंकज चौधरी(भाजपा),श्री
सुनील तटकरे एमपी लोकसभा राकाँपा रयगढ़ महाराष्ट्र-
ने अपने विचार और त्रिपाठी जी के साथ के अनुभव साझा किये।
चुना गया विषय त्रिपाठी जी के बेहद करीब था – क्योंकि वह अक्सर भारत के राज्यों के बीच राजनीतिक शक्ति की विषमता के बारे में बात करते थे। नए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का लगातार निर्माण, सामाजिक सांस्कृतिक उप क्षेत्रों की अधूरी आकांक्षाओं जैसे उप विषयो पर भी सफल चर्चा हुयी। कार्यक्रम में बतौर पेनलिस्ट मनोज कुमार झा (राजद), श्री राजीव प्रताप रूडी (भाजपा),श्री विवेक तन्खा (कांग्रेस), श्री संजय सिंह (आप), श्री सीताराम येचुरी (CPI),आदि उपस्थित रहे। डॉ आमना मिर्जा और श्री बृजेश त्रिपाठी द्वारा यह सत्र क्यूरेट किया गया था । प्रसिद्ध अकादमिक, सामाजिक उद्यमी और लेखक डॉ आमना तीन साल से इस संसदीय बहस के आयोजन में शामिल है और इस वर्ष भी सत्र का संचालन किया ।
श्री बृजेश त्रिपाठी द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया
जहाँ उन्होंने भावनात्मक रूप से कहा कि स्वर्गीय
डी पी त्रिपाठी जी जैसे महान व्यक्तित्व से प्रेरणा लेते हुए, राष्ट्र की सेवा में विचार, लोक कल्याण, कला, के क्षेत्र में निरंतर प्रयास होंगे ।
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