जयपुर। ।अशफाक कायमखानी। सिंधिया की ही तरह जितिन प्रसाद के पिता जितेन्द्र प्रसाद को राजीव गांधी के समय कांग्रेस ने सब कुछ दिया था। मगर 22 साल पहले सोनिया गांधी के खिलाफ उन्होंने चुनाव लड़ा। लेकिन सोनिया ने उनके न रहने पर पत्नी कांता प्रसाद को टिकट दिया। वो हार गईं। फिर बेटे जितिन प्रसाद को टिकट दिया। मंत्री बनाया। दो साल पहले फिर जितिन ने धमकी दी कि वो भाजपा जा रहे हैं। रोका, मनाया। फिर 23 लोगों के साथ मिलकर अस्पताल में भर्ती सोनिया को पत्र लिखा कि चुनाव करवाओ। कांग्रेस ने महासचिव बनाकर बंगाल का इन्चार्ज बना दिया। मगर खुश फिर भी नहीं हुए। अब जाकर सिंधिया की तरह आज भाजपा ज्वाइन कर ली। सिंधिया की तरह ही जितिन भी राहुल, प्रियंका से कम किसी नेता से बात नहीं करते थे।
हालांकि सिंधिया व जितिन जैसे कितने ही दिग्गज नेता कांग्रेस छोड़कर भाजपा मे गये व जायेगे।
बंगाल चुनाव के पहले भी भाजपा ने रणनीति के तहत तृणमूल कांग्रेस सहित अन्य दलो के विधायकों व नेताओं को भाजपा जोइन करवा कर दवाब बनाया था। बंगाल मे भाजपा के सभी जीते विधायकों मे मात्र तीन विधायक मूल भाजपा के वर्कर है बाकी सभी दुसरे दल से आये हुये है।
2022 मे होने वाले चुनाव मे यूपी, हरियाणा, पंजाब व अन्य प्रदेशों के अनेक गैर भाजपा दलो के नेताओ को भाजपा नेतृत्व एक अभियान के तहत भाजपा जोइन करवायेगे। जिनमे कांग्रेस नेता अधिक होगे। उसके बाद 2023 मे राजस्थान मे भी यही खेल शुरू होगा।
गौरतलब है कि कांग्रेस मे सत्ता के लालची व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नजदीकी नेताओं की लम्बी चोड़ी फौज पहले से ही मोजूद रही है। वो कांग्रेस के सत्ता मे रहने के समय सत्ता सुख पाने के लिये कांग्रेस का गुणगान करते थे। वही नेता अब भाजपा की नावं मे बैठने को उतावले नजर आ रहे है।
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