नई दिल्ली (मिल्लत टाइम्स) सीमांचल में बाढ़ से हर साल तबाही मचती है, जिसमें हजारों लोगों की जान चली जाती है। क्षेत्र में सरकारी उदासीनता का एक उदाहरण चचरी पुल है। बाढ़ के बाद, चचरी पुलों को एक गांव से दूसरे गांव में फिर से जोड़ने के प्रयास में बनाया जाता है और किसी भी तरह से पटरी से उतरी हुई जिंदगी को बहाल क्या जाता है,और वह भी लोग एक दूसरे से चंदा करके बांस का पुल बनाते हैं।
इन विचारों को व्यक्त करते हुए, श्री अख्तरूल ईमान, विधायक, अमौर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र और प्रदेश अध्यक्ष, मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल-मुस्लिमीन, बिहार ने कहा: “बाढ़ की संभावित स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने जो तैयारी की है, उस पर हमने बैठक की है। इसलिए कि लोगों के जान-माल की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।”
बहादुरगंज विधानसभा क्षेत्र से मजलिस के विधायक श्री अन्जर नईमी ने कहा कि:
“सीमांचल में हर साल बाढ़ आने के कारण हजारों लोग बेघर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कई सालों से बाढ़ पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि बस्तियों का बाढ़ के लिए कोई सुरक्षात्मक कार्य नहीं हुआ है। सरकार को बाढ़ आने से पहले बस्तियों का सुरक्षात्मक कार्य कर लेनी चाहिए।”
उन्होंने कहा कि “सीमांचल के लोग भी सरकार को टैक्स देते है और सरकार कोई हर साल आ रहे बाढ़ की समस्या का समाधान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को बाढ़ प्रभावित कच्चे मकानों को 95 हजार और पक्के मकानों एक लाख रुपए की आर्थिक मदद करना चाहिए।”
कोचाधामन विधान सभा क्षेत्र के विधायक श्री इजहार असफी ने कहा कि:
“सीमांचल के किसान बहुत गरीब और दुखी है। इतनी मेहनत से उगाए मक्का को सिर्फ 1100-1200 रूपये प्रति क्विंटल बेचने पर मजबूर हैं। सरकार को ओर से इन मक्का किसानों को इंसाफ मिलना चाहिए। सरकार को मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य कम-से-कम 2000 रूपये प्रति क्विंटल करना चाहिए।”
पूर्णिया विधान सभा क्षेत्र से मजलिस के विधायक सैयद रुकनुद्दीन ने कहा कि:
“सीमांचल में हर साल आ रहे बाढ़ के कारण हजारों लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सीमांचल में हर साल बाढ़ आने के कारण लोग राहत शिविरों में रहने के लिए मजबूर हो जाते हैं। सरकार को सीमांचल में बाढ़ के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा करना चाहिए।”
जोकी हाट विधान सभा क्षेत्र से मजलिस के विधायक श्री शहनवाज आलम ने कहा कि:
“कोरोना के कारण सीमांचल में हजारों लोग बेरोजगार हो गए हैं। यह मजदूर लोग काफी कठिनाईयों काफिर सामना कर रहे हैं। सरकार को इनके परिवारों को 5 हजार रुपए की आर्थिक पैकेज देनी चाहिए।”
मजलिस के सभी विधायकों ने सीमांचल में बीजली की बुरी स्तिथि की भी चर्चा की। सभी ने कहा कि सीमांचल में बिजली की स्थिति बदहाल है। थोड़ी सी हवा चलती है या बारिश होती है तो घंटों तक ब्लकि कभी कई दिनों तक ठीक नहीं होती है। उन्होंने कहा, ‘एक बार जब तार कट जाते हैं, पोल गिर जाते हैं या ट्रांसफार्मर जल जाते हैं, तो हमें बिजली के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है।”
एएमयू किशनगंज के संबंध में बताया गया कि एएमयू का किशनगंज सेंटर उपेक्षा का शिकार है। 2013 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का सेंटर दूसरे राज्यों में बनाया गया था। जिसमें बिहार में किशनगंज, पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद और केरल के मल्लापुरम में एएमयू के सेंटर बनाए गए थे। किशनगंज शाखा के लिए बिहार सरकार ने जमीन मुहैया कराई थी पर केंद्र सरकार की तरफ से 136 करोड़ रुपए की राशि किशनगंज शाखा के लिए स्वीकृत की गई थी। लेकिन नौ साल बाद भी किशनगंज सेंटर उपेक्षित है। केवल 10 करोड़ रुपये ही अब तक सेंटर के लिए रिलीज हो सका है। विधायकों ने फंड रिलीज करने का व्यवस्था करने की मांग की।
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