90 एकड़ में बना एक ऐसा शैक्षणिक संस्थान जो प्राथमिक स्कूल से एमबीबीएस तक कि शिक्षा देता है, ऐसा संस्थान जिसमे लगभग 13 हजार स्टूडेंट्स एक कैंपस में अध्यन करते हैं। प्राइमरी स्कूल, मिडिल स्कूल, हाई स्कूल, बीएड कॉलेज, आई टी आई, डिप्लोमा इंजीनियरिंग कॉलेज, बी टेक इंजीनियरिंग कॉलेज, बी फार्मा, बी यूनानी मेडिसिन, 100 एमबीबीएस एडमिशन सीट, 300 बेड हॉस्पिटल, प्रतिदिन 600 ओपीडी और 230 आई पी डी पेशेंट चिकित्सा सेवा, प्रतिदिन 30 ऑपरेशन (सभी विभाग को मिलाकर) के संस्थापक एक मौलाना है, चंदे के पैसे से मौलाना ने इतना बड़ा शैक्षणिक संस्थान खोल दिया जहाँ 2 लाख से अधिक बच्चो ने प्रोफेशनल कोर्सेज में ग्रेजुएशन किया है। एक लाख से अधिक बच्चे बिल्कुल मुफ्त प्रोफेशनल कोर्सेज में ग्रेजुएट हुए हैं।
महाराष्ट्र के अक्कलकुंवा के एक मोहल्ला “मकरानी” से एक झोपड़ी से एक मदरसे की शक्ल में शुरू हुआ जामिया इस्लामिया ईशातुल उलुम की बुनियाद 1979 में रखी गई थी। 6 बच्चों से शुरू हुआ यह मदरसा आज पुरे देश में 1 एक लाख 70 हजार स्टूडेंट्स को शिक्षा देता है। इस संस्थान का 70% से 75% खर्च चंदे से पुरा होता है, 25% से 30% अमीर बच्चों के द्वारा दिये गये फीस के द्वारा।
इस संस्थान के संस्थापक और व्यवस्थापक एक मशहूर आलिम ए दीन हैं, नाम है : मौलाना मोहम्मद गुलाम वस्तानवी। जो लोग मौलवियों पर चंदा खाकर पेट मोटा करने वाला आरोप लगाता है , जो लोग मौलवियों पर फोरचुनर से घूमने का आरोप लगाता है, वह ऐसे मौलवी के बारे कभी जानने की कोशिश भी नही करता है, आपके मॉडर्न एडुकेशन हासिल करने वाले कई लोगों ने मेडिकल कॉलेज खोला है लेकिन एक भी एम बी बी एस की सीट में फ्री एडमिशन नही देता है, यहाँ तो 50% से 75% स्टूडेंट्स फ्री में एम बम बी बी एस भी करता है। अगर मौलवियों को अपना पेट मोटा करना होता तो लाखों स्टूडेंट्स को प्रोफेशनल कोर्सेज का शिक्षा फ्री में नही देता। आखिर आपकी मानसिकता में मौलवीयों को चन्दाखोर कहने का क्या कारण है? आप ने आजतक कितने बच्चों को मुफ्त बी एड, इंजीनियरिंग, बी फार्मा, एम बी बी एस कराया है? नही कराया है तो क्युँ नही कराया? नही कराया है तो मौलवियों पर सवाल क्युँ उठाते हैं? एक नही, कई मौलवियों ने तो शिक्षा के छेत्र में इतिहास रच दिया है। कहिये तो इस पर एक सिरीज चला दुं, आप इतिहास नही जानते हैं तो खामोश क्युँ नही रहते? बिला वजह मौलवियों पर उँगली क्युँ उठाते?
यह अलग बात है की ऐसे शिक्षाविद को भी आर एस एस का दलाल, बीजेपी का एजेंट और कई बेबुनियाद आरोप लगाकर इंसल्ट किया गया है लेकिन सच तो सच होता है, ऐसे इल्जामात के बाद भी कारवाँ नही रुका और न रुकेगा। मेरी अपील मिल्लत के उस मॉडर्न लोगो से है की मौलवियों को चन्दाखोर कहने से पहले मौलवियों के इतिहास को पढ़ लें, हर जमाने मे मौलवियों ने इतिहास रचा है। आप तो 40 व 50 या 100 की भीड़ को नही संभाल सकते, छोटे से संस्था को नही संभाल सकते, एक दूसरे पर चन्दाखोर का आरोप लगाकर अपने को ऊंचा दिखाना चाहते हो। खुले आम भसढ़ मचाते हो। अपने को ऊंचा बनने के लिए किसी को नीचा करने के लिए ऊर्जा को बर्बाद न करें, लंबी लाइन खिंचे, मौलवियों ने एक मेडिकल कॉलेज खोला है, मौलवी 50% से 75% फ्री शिक्षा देता है तो आप 100% फ्री शिक्षा दीजिये, मौलवी छोटे छोटे मौलवियों से चंदा करवाता है, आप प्रोफेशनल बिज़नेस डेवलपमेंट एग्जीक्यूटिव से डोनेशन / फण्ड जेनेरेट कीजिये। किसने मना किया। आप दो खोलिये, फिर मिल्लत का हक़ अदा होगा।
लेखक: Mustaqim Siddiqui
इंसाफ इंडिया
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