दिल्ली के चर्चित तरुण हत्याकांड मामले में अब बड़ा मोड़ सामने आया है। उत्तर पश्चिम दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में हुई इस हत्या के मामले में गिरफ्तार किए गए एक युवक को अदालत ने बेगुनाह बताते हुए बाइज्जत रिहा करने का आदेश दिया है।
यह मामला हालिया होली के दौरान दो परिवारों की पुरानी रंजिश से जुड़ा बताया गया था। तरुण नाम के युवक की हत्या के बाद दिल्ली समेत कई इलाकों में तनाव का माहौल बन गया था।
गलत व्यक्ति की गिरफ्तारी का मामला
पुलिस ने 25 मार्च 2026 को घायल मानसिंह के बयान के आधार पर हत्या का केस दर्ज किया था। इसी मामले में इमरान उर्फ बंटी को गिरफ्तार किया गया था।
हालांकि, अदालत में सुनवाई और जांच आगे बढ़ने के बाद कई अहम तथ्य सामने आए। गवाहों के बयान और सीसीटीवी फुटेज की जांच में साफ हो गया कि गिरफ्तार किया गया इमरान उर्फ बंटी घटना में शामिल ही नहीं था।
जांच में पता चला कि असली आरोपी इमरान पुत्र उमरदीन था, जबकि पुलिस ने गलती से इमरान उर्फ बंटी पुत्र सैफी मोहम्मद को गिरफ्तार कर लिया।
अदालत ने पुलिस पर उठाए सवाल
सभी सबूत सामने आने के बाद अदालत ने कहा कि इमरान उर्फ बंटी के खिलाफ कोई विश्वसनीय आपराधिक सबूत मौजूद नहीं है। अदालत ने माना कि गलत पहचान के आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया और लंबे समय तक हिरासत में रखा गया।
अदालत ने यह भी कहा कि समय रहते उसकी रिहाई के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए, जो गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। इसके बाद अदालत ने युवक को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया।
पुलिस अधिकारियों की जांच के निर्देश
मामले को गंभीर मानते हुए अदालत ने अपने आदेश की प्रति जॉइंट पुलिस कमिश्नर को भेजने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाए और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई भी की जाए।
जमीयत उलमा-ए-हिंद ने की कानूनी मदद
इस पूरे मामले में जमीयत उलमा-ए-हिंद (JUH) ने भी अहम भूमिका निभाई। जानकारी के मुताबिक संगठन के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के निर्देश पर एडवोकेट अब्दुल गफ्फार ने मामले की पैरवी की।
वहीं, संगठन के महासचिव मौलाना महबूब कासमी की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने जॉइंट पुलिस कमिश्नर से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने इलाके में शांति बनाए रखने, सांप्रदायिक तनाव रोकने और बेगुनाह लोगों को परेशान न किए जाने की मांग की।
परिवार ने ली राहत की सांस
रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान के पिता की अपील पर एडवोकेट मौलाना नियाज अहमद फारूकी की देखरेख में युवक को तुरंत कानूनी सहायता उपलब्ध कराई गई थी।
अब अदालत के फैसले के बाद परिवार ने राहत की सांस ली है। वहीं, इस मामले ने पुलिस जांच और गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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