मौजूदा दौर में शिक्षा का किया महत्व है और इस की कितनी आवश्यकता है इस से हम सभी भली भांति परिचित हैं।इसी के महत्व को ले कर दिनांक तीन अक्टूबर 2020 को
बिहार के नवादा शहर के रांची पटना हाइवे पर स्थित होटल रोज़ गार्डन में दिन के 11 बजे से एक मिलन समारोह और शैक्षिक सम्मेलन का आयोजन किया गया जो दिन के 3 बजे तक चला।
जिस के आयोजन कर्ता बीएमजी है। समारोह को क़ुरान ए पाक की तिलावत से शुरू किया गया। जिसे मौलाना ज़ुबैर मलिक साहब ने पढ़ा, उस के बाद the Quint Hindi के पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता खुर्रम मलिक ने अपनी बात रखते हुए यह कहा के मौजूदा समय में शिक्षा एक ढर्रे पर चल रही है जिसे हमें बदलना होगा। आज देखने में यह आ रहा है के हमारे बच्चे बी टेक करने को ही तरजीह देते हैं और फिर बाहर जा कर कमाते हैं। लेकिन किया हम इस के अलावा हमारे पास और विकल्प नहीं है? किया हम सिविल सेवा की तैयारी नहीं कर सकते? इस के आलावा वकालत का एक बहुत अच्छा विकल्प है। साथ ही पत्रकारिता भी एक बहुत अच्छा विकल्प हो सकता है आज के युवाओं के लिए। तो किया हमारे माता पिता ऐसा ज़ेहन बना सकते हैं के अपने बच्चों को एक ढर्रे वाली शिक्षा से इतर कोई अलग रास्ता दिखाएं।
उस के बाद इंजीनियर राशिद लतीफ़ ने अपनी बात रखते हुए कहा के मैट्रिक और इंटर के बाद बच्चों को किस फ़ील्ड में जाना चाहिए इस की तरफ़ गार्जियन को ध्यान देने की ज़रूरत है। साथ ही कई सारे साथ ही इंजीनियर आमिर शहज़ाद ने अपनी बात रखी और कहा के मौजूदा दौर में हमें अपनी आंखें खुली रखनी होंगी। साथ ही यह भी कहा के बीटेक कर के भी कैरिर्यर बनाया जा सकता है। और हमें एक धारे में बंध कर नहीं रहना है। प्रोफ़ेसर मेराज अहमद ने सरकारी नौकरी पर ज़ोर देते हुए कहा के आज के दौर में हमें सरकारी नौकरी में अवसर तलाशने की आवश्यकता है। सरकारी विभागों में कई सारे पद हैं जिस में मुसलमान आते ही नहीं हैं। जिस के लिए हमें कड़ी मेहनत करनी होगी। अधिवक्ता फ़ैसल अज़ीज़ ने अपनी बात रखते हुए कहा के वकालत अभी के समय में बहुत ही बेहतर विकल्प है और इस में अपार संभानाएं हैं। उन्हों ने ज़ोर दे कर कहा के अगर किसी बच्चे को लॉ की तैयारी करनी है तो मुझ से संपर्क कर सकता है । मैं ख़ुद उस के लिए गाइड करूंगा। और उसे दिल्ली विश्वविद्यालय के लॉ की परीक्षा में उत्तीर्ण होने की हर संभव प्रयास करूंगा। इस के अलावा रांची मेडिकल कॉलेज से मेडिकल की पढ़ाई कर रहे साइम आफ़तब ने कहा के अपने मन से डर को निकालना होगा और बच्चे और गार्जियन की साझा परयासों से हम हर वह कुछ हासिल कर सकते हैं जो हम करना चाहते हैं।
साथ ही पटना से आए खुर्शीद अनवर साहब ने भी अपनी बात रखी। आख़िर में शाही मिलन के डायरेक्टर कलीम मलिक ने लोगों का आभार व्यक्त किया।
समारोह में नवादा शहर के कई जाने माने लोग उपस्थित थे।
इस के साथ ही नवादा, गया,पटना, जहानाबाद, जमुई, ज़िले के अलग अलग गांव से भी लोग शामिल हुए। सब ने इस प्रोग्राम को काफ़ी पसंद किया।और कहा के इस तरह का प्रोग्राम हर ज़िले में होना चाहिए। प्रोग्राम को कामयाब बनाने में अहम योगदान इंजीनियर राशिद लतीफ़, अधिवक्ता फ़ैसल अज़ीज़, हाफ़िज़ और पत्रकार खुर्रम मलिक। शाही मिलन के डायरेक्टर कलीम मलिक, इशू मलिक, रागिब मलिक, नौशाद ज़ुबैर मलिक। फ़ज़ल इमाम मलिक,समारोह की समाप्ति पर सभी वक्ताओं को प्रशंसा का प्रमाण पत्र (Certificate of Appreciate) दिया गया।
ख़ुर्रम मलिक के द्वारा लिखी गयी ये रिपोर्ट। लेखक एक पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता है
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