अशफाक कायमखानी।जयपुर।
लोकसभा चुनाव मे राजस्थान की सभी पच्चीस सीटो से चुनाव लड़ चुके कांग्रेस उम्मीदवारों मे से दो-चार को छोड़कर अधिकांश उम्मीदवार प्रदेश मे पल पल घट व बदल रहे राजनीतिक घटनाटक्रम पर नजर रखते हुये अपनी महत्ती भूमिका अदा करने का तय करके राजनीतिक करवट लेकर मोजुदा समय मे अहम किरदार निभा सकते है।
राजनीतिक सुत्र बताते है कि कांग्रेस से जुड़े अधिकांश लोकसभा उम्मीदवार व पार्टी से जुड़े पूर्व सांसद जयपुर मे जल्द एक बैठक करके मोजूदा राजनीतिक घटनाटक्रम पर मंथन करके व्यू रचना बनाकर उस पर अमल कर सकते है। प्रदेश मे माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अब केन्द्र सरकार से सीधा टकराव होने की सम्भावना पूरी तरह बन चुकी है। वही कांग्रेस विधायक भी कम ज्यादा तादाद मे दो भागो मे बंट चुके है। गहलोत सरकार बहुमत सिद्ध करे या अल्पमत मे आये या फिर राष्ट्रपति शासन लगे। लेकिन सम्भवतः चालू वर्ष के आखिर मे बिहार चुनाव के साथ राजस्थान मे भी मध्यवर्ती विधानसभा चुनाव होना माना जा रहा है।
राजस्थान के राजनीतिक घटनाटक्रम के तहत कांग्रेस विधायक गहलोत-पायलट खेमो मे विभक्त होकर होटल्स मे कैद हो चुके है। वही लोकसभा चुनाव लड़ चुके उम्मीदवारों व कांग्रेस पार्टी से जुड़े पूर्व सांसद एक जगह बैठकर मोजुदा राजनीतिक संकट मे नया कुछ कर सकते है। इनमे से अनेक उम्मीदवार तो काफी मजबूत व सीनियर लीडर्स की श्रेणी मै
मे आते है।
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