ज़ैन शाहब उस्मानी
झारखंड के सरायकेला खरसावां जिले में भीड़ ने तबरेज अंसारी को चोरी के संदेह में कथित रूप से पीट पीट कर मार डाला था. तबरेज अंसारी की 17 जून को पिटाई की गई और 22 जून को उसने दम तोड़ दिया.
17 जुलाई को सोनभद्र के उम्भा गांव में ट्रैक्टर ट्रॉलियों पर सवार होकर सैकड़ों की संख्या में लोग जमीन पर कब्जा करने पहुंचे थे और विरोध करने पर 10 लोगों को बेरहमी के साथ हत्या कर डाला था .
बिहार के छपरा ज़िले में 19 जुलाई शुक्रवार को भीड़ ने मवेशी चोरी के कथित आरोप में तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी. मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन तब तक तीनों की मौत हो चुकी थी.
21 जुलाई को झारखंड में एक बार फिर सुनियोजित तरीके से मॉब लिंचिंग कर मानवता का खून किया गया है। यहां डायन के संदेह में चार लोगों को पहले बुरी तरह पीटा गया और फिर गला काटकर निर्मम हत्या कर दी गयी है। गुमला जिले के सिसई प्रखंड मुख्यालय से 25 किलोमीटर की दूरी पर सिसकारी गांव में हुए इस नरसंहार में रविवार तड़के 3 बजे 10 से 12 अपराधियों ने घर में से खींचकर चार लोगों को बाहर निकाला और फिर उनकी गला काटकर हत्या कर दी। नरसंहार को अंजाम देने से पहले गांव में हत्यारों ने पंचायत लगाई थी। चारों लोगों पर ओझा गुनी और टोना-टोटका का आरोप लगाकर उनकी हत्या कर दी गई।
ख़बर के ये मुताबिक़ ये सारी घटनाएं सुनियोजित तरिके से भिड़ तंत्र के द्वारा अंजाम दिया गया है, जो कि बहुत ही दुखद और निंदनीय है। और मानवता को शर्मसार कर देने वाली है।
अब ऐसा मालूम होता है कि जैसे कुछ लोगों के अंदर क़ानून का डर समाप्त हो चुका है और वह लोग लगातार क़ानून को अपने हांथों में लेकर धर्म और जाती के नाम पर अमानवीय घटना को अंजाम दे रहे हैं। इस प्रकार की घटना से मैं बहुत आहत हूँ और केन्द्र सरकार और सभी राज्य सरकारों से विनम्रता के साथ निवेदन करता हूँ कि तत्काल मामले को गंभीरता से लेते हुए संसद और सभी राज्यों के विधानसभा में एक मोब लीचिंग के विरुद्ध एक मज़बूत कानून बनाया जाए।
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