घोसी (मऊ)लगातार कई दिनों से हो रही बरसात कच्चे मकानों के लिए कहर बनकर आयी है। जो फसलों के साथ पर्यावरण और जल स्तर के लिए वरदान ,किंतु गरीबों के आशियाने के लिए अभिशाप साबित हो रही है। हर रोज घरों के गिरने का सिलसिला जारी है और लोग बेघर होते जा रहे हैं सरकारी सहायता ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है। इन गिरे घरों के मलबे में दबकर अब तक आधा दर्जन से अधिक जाने जा चुकी हैं। और दर्जनों लोग जख्मी होकर जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं, तमाम ऐसे परिवार हैं जो जर्जर घर में रात भर जागने को विवश है और तमाम लोगों ने दूसरे के घरों में रहने को मजबूर हुए हैं।
मामला मऊ जनपद के घोसी थाना क्षेत्र के जमालपुर बंजारा बस्ती का है जहाँ पर लगभग दर्जनों कच्चे मकानों के गिरने से गरीब परिवार वालों का सर का आशियाना छिन गया है ,कोई भी जिम्मेदार बड़े अधिकारी वहां झांकने तक नहीं गए। लगभग 100 घरो का पुरवा है ,जो कि सभी के कच्चे मकान हैं और उन गरीबों को अभी तक कोई सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल सका है।
मगर शासन के कर्मचारी अभी तक इस गांव में गरीब पीड़ितों की आवाज को सुनने को नामुमकिन दिखाई दे रहे हैं। और गरीब पीड़ितों का या भी कहना है अब ना तो किसी के पास रहने को कोई माकन है हम लोग जाएं तो जाएं कहां जाए। लेकिन इस बात को सुनने को जिलाधिकारी भी आनाकानी कर रहे हैं। जिला अधिकारी द्वारा अभी तक किसी कर्मचारी को गिरे हुए मकानों का निरीक्षण करने के लिए भेजा ही नहीं गया है।
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