मोहम्मद साजिद और उनका परिवार जो भूप सिंह कॉलोनी,ग्राम भोंडसी, गुरुग्राम, हरियाणा के निवासी हैं की ज़िंदगी ने 21 मार्च की शाम को अप्रत्याशित मोड़ ले लिया। होली के दिन की एक आलसी दोपहर थी और धीरे धीरे शाम ढल रही थी जब साजिद, उनके बेटे और उनके कुछ रिश्तेदार जो छुट्टी का दिन होने की वजह से उनके घर पर थे, अपने घर के सामने एक परित्यक्त क्षेत्र में क्रिकेट खेल रहे थे । दो युवा लड़के, जो पड़ोस के नया गावं नामक गावं के निवासी थे एक बाइक पर आये और उनके साथ खेलने की मांग की। परिवार के बीच दोस्ताना क्रिकेट मैच पहले से ही चल रहा था और वो लोग इसे खेल रहे थे और इस सिलसिले को तोड़ना नहीं चाहते थे इसलिए उन्होंने उन्हें मना कर दिया । इस कारणवश थोड़ी तकरार हुई और साजिद के अनुसार उन पर और उनके परिवार पर एक सांप्रदायिक टिप्पणी की गयी ” तुम मुल्ले लोग पाकिस्तान जा कर क्रिकेट क्यों नहीं खेलते”. फिर वो लड़के चले गए और कुछ देर बाद दो बाइक के साथ वापस आये जिस पर छह लोग थे और सबके हाथ में लाठी,लोहे की छड़ और यहां तक भाले भी थे। उन लोगों के पीछे एक और भीड़ थी जिनके हाथों में लाठी डंडे और भले तक थे
भीड़ उनके घर में घुस गई और आक्रामकता के साथ हर एक को पीटना शुरू कर दिया । परिवार के कुछ सदस्य जो ऊपर छत पर फंसे हुए थे हमले की एक छोटी सी झलक कैमरे में कैद कर के एक वीडियो बना ली जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। तब तक कुछ हमलावरों को एहसास हो गया के उनकी वीडियो बनाई जा रही है जिसके बाद उन्होंने लोहे के रॉड और भालों से छत के दरवाज़े को तोड़ने की कोशिश असफ़ल रहे। उनके द्वारा की जा रही हिंसा की वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली गयी है ये जानने के बाद वो भाग गए लेकिन हमला कितना तेज़ और आक्रमक था इसे उस वीडियो को देख कर समझा जा सकता है।
भीड़ ने पूरे घर को घेर लिया था और घर में लगे कांच के शीशे को तोड़ने के लिए लगातार चट्टानों और पत्थरों से हमला करती जा रही थी वे सांप्रदायिक गालियां देते रहे और बच्चों सहित परिवार के सभी सदस्यों को पीटा जो नीचे और पहली मंजिल थे। यहाँ तक की उन्होंने भयभीत बच्चों जो अलमारी के पीछे छुप् अलमारी से बाहर खींच कर उन्हें पीटा। फिर अलमारी खोल कर गहने और कैश तक लूट लिए जो उन्हें मिल गया । मोहम्मद साजिद, मोहम्मद इरशाद, मोहम्मद शादाब, श्रीमती शाकेरीन आबिद, शाहरुख, समीना,दिलशाद, नरगिस, अफ़ीफ़ा और आमिर को सबसे ज्यादा बेरहमी से पीटा गया था और वास्तव में हमलावरों को लगा के वो मर चुके हैं ।
साजिद के डरे हुए परिवार ने 100 नंबर डायल करके पुलिस को कॉल करने की कोशिश की लेकिन वो उपलब्ध नहीं हुए. अंत में वो घायल लोगों को एक निजी कार से इलाज के लिए दिल्ली के एम्स ले कर आये और परिवार का एक व्यक्ति पुलिस रिपोर्ट करने के लिए स्थानीय थाने पहुंचा।
यूनाइटेड अगेंस्ट हेट की एक टीम ने पहली बार दिल्ली स्थित लोक नायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल में 25 मार्च 2019. को भर्ती किए गए घायल पीड़ितों से मुलाक़ात की और दो दिन बाद उनके घर का दौरा किया।
वो घर अस्पताल की तरह दिख रहा था। टूटे हुए कांच के शीशे हर जगह बिखरे हुए थे और दीवारों पर छड़ और भालों के निशान भी थे । खिड़कियों और दरवाज़े तोड़ कर गुंडों ने जबरन घर में घुसने का प्रयास किया था।घर के प्रत्येक कमरे और बिस्तर पर एक या दो घायल व्यक्ति पड़े थे। परिवार का प्रत्येक डरा हुआ और तनाव में था ” बच्चे तब से हर दिन रोते हैं । ‘ वो रंगवाले लोग फिर से आ जायेंगे अब्बु. भाग चलते है यहाँ से “. जिन हमलावरों ने सुबह होली खेली थी और शाम को लाठी और भाले के साथ उन सब को मारने के लिए आये थे बच्चों के दिमाग में हमेशा के लिए हैं है । उन्होंने हर दरवाजे को तोड़ दिया था बस एक छत का दरवाजा वो नहीं तोड़ पाए थे जहाँ कुछ कुछ महिलायें और लड़कियां छुपे हुए थे और परिवार की एक लड़की दनिश्ता ने वहीँ से इस पूरी घटना का वीडियो बनाया था। उस दरवाज़े को जबरन तोड़ने और भालों से दरवाज़े पे प्रहार के निशाँ स्पष्ट दिखाई देते हैं। लेकिन वो लोग दरवाज़े को नहीं तोड़ पाए ” साजिद की युवा बहू नरगिस बताती हैं के अल्लाह, हमारे साथ खड़ा था, दरवाजा पकड़ रहा था वरना हम बस कुछ लड़कियां एक तरफ और हथियारबंद गुंडे दूसरी तरफ थे।
साजिद बताते हैं के उनके परिवार को गुंडों से बचाने कोई स्थानीय पड़ोसी नहीं आया क्यूंकी एक तो होली के कारण उनमें से ज्यादातर यहाँ नहीं थे और जो मौजूद थे वो दूर से ही हमें पीटता हुआ देख रहे थे और शायद डरे हुए थे इसलिए कोई भी नहीं आया। भूपसिंह कॉलोनी में कोई बहुत पुराने पड़ोसी नहीं हैं क्यूंकी यह एक कम आबादी वाली नई विकसित कॉलोनी है, जहां ज्यादातर प्रवासी श्रमिक जो गुड़गांव के विशाल औद्योगिक बेल्ट में काम करते हैं, किराए पर रहते हैं इसलिए कोई बहुत गहरा संबंध नहीं है एक दुसरे के साथ क्यूंकी अधिकतर लोग बाहर से आये हैं। वहीँ दूसरी ओर हमलावर नए गाँव से आए थे , जो एक अपेक्षाकृत बड़ी बस्ती है और अधिकतर गूजर समुदाय के लोग हैं जो स्थानीय जाति हैं, और उनके द्वारा हिंसा की घटनाएं आम हैं। इसी डर के कारण से पड़ोसी,जो भी उस दिन के चश्मदीद थे और स्थानीय गुंडों को पहचानते भी थे उन्होंने हस्तक्षेप करने से मना कर दिया
पुलिस की भूमिका:
पुलिस ने साजिद और उनके परिवार को पीटने वाले भीड़ के किसी भी सदस्य का नाम प्राथमिकी में शामिल नहीं किया हालांकि वे इंटरनेट पर उपलब्ध वीडियो से बहुत आसानी से पहचान सकते हैं यानी एफआईआर नामज़द नहीं हुई है।
पुलिस के दावे के अनुसार कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है लेकिन इतने दिनों के बाद भी हिरासत में लिए गए आरोपी की कोई पहचान परेड नहीं हुई है ।
पुलिस स्टेशन में हर कोई अपने होंठ सिले हुए था और मामले के बारे में कुछ भी बात करने के लिए तैयार नहीं था। उनका कहना था के कमिश्नर श्री अकील ने निर्देश दिए हैं कि पुलिस विभाग को बाहर से किसी भी व्यक्ति से इस पर बात नहीं करनी चाहिए ।
एक काउंटर केस और एफआईआर देने से इनकार:
परिवार पर एक काउंटर केस दर्ज किया गया है और सात दिनों के बाद, आरोपीयों ने एक लड़के को सामने लाया है जो उनके अनुसार पीड़ित परिवार द्वारा चोटिल हुआ है और उसके सर पर टाँके लगे हैं। अजीब बात है कि इस लड़के का उल्लेख उस आरोपी द्वारा कहीं नहीं किया गया था जब मीडिया ने व्यापक रूप से हमले की घटना को कवर किया था। काउंटर एफ़आईआर स्पष्ट रूप से पीड़ित लोगों को कानूनी रूप से और मामले को सेटल करने के लिए पीड़ितों को डराने धकाने और संतुलन बनाने का एक प्रयास है । इस काउंटर एफआईआर की कॉपी परिवार द्वारा मांगे जाने के बावजूद भी परिवार को नहीं दी गई है जो की उनका अधिकार है UAH के सदस्यों ने कुछ मीडिया वालों की मदद से कॉपी हासिल करने की कोशिश की, लेकिन पत्रकारों को भी उस एफआईआर की कॉपी नहीं मिल पाई है।
1 अप्रैल को परिवार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बताया के किस तरह उन्हें धमकी दी जा रही है और यहां तक कि सामूहिक आत्महत्या करने की बात तक पीड़ित परिवार के लोग कर रहे हैं।
ठीक उसी समय गूजर पंचायत भी किया गया है जहां इस मामले में परिवार को धमकाने और कानूनी करवाई से हट कर बाहर ही इस मामले को हल करने की रणनीति बनाई गयी
हम जब दूसरी बार परिवार से मिले तो हमने स्थानीय विधायक तेजपाल तंवर को भी परिवार से मिलते देख। विधायक ने कहा: “दोनों लोगों को साथ बैठा कर मिलवा देंगे”. विधायक के साथ आये लोगों का लहजा दोषियों को दंडित करने के बारे में बात करने के बजाय समझौता करने के लिए अधिक था । गुरुग्राम में इस घटना को एक बार फिर से एक बार फिर से बताया गया है कि मुसलमानों के खिलाफ नफरत और कट्टरता भयानक हिंसा की ऐसी घटनाओं को भड़का रही है और सम्प्रदायिक गुंडे पूरी तरह बेलगाम हो चुके हैं जिन्हें कानून का कोई डर नहीं है और पूरा तंत्र इन गुंडों के सामने आत्मसमर्पण कर चूका है। अगर मोहम्मद साजिद का परिवार मौन में भयभीत है या अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर है, और अगर इन गुंडों को उनके खिलाफ स्पष्ट साक्ष्य के बावजूद सजा नहीं दी जाती तो ये हमारे लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था के लिए बहुत बड़ा आघात होगा और भारतीय लोकतंत्र और कानून पर इस देश की जनता के विश्वास को कमज़ोर करेगा
फैक्ट फ़ाइंडिंग टीम के सदस्य:
ये रिपोर्ट #UnitedAgainstHate के सदस्यों द्वारा फ़ैक्ट फाइंडिंग के बाद जारी की गयी है। टीम ने 27 मार्च 2019 को गुरुग्राम के भोंडसी गावं का दौरा किया था और पीड़ित परिवार के सदस्यों से मुलाक़ात की थी।
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