अमेरिकी ड्रोन मार गिराने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भड़के, कहा-ईरान बहुत बड़ी गलती कर चुका है’

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20 June 2019 (Publish: 04:39 PM IST)

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा अमेरिकी ड्रोन मार गिराने पर अपनी बहुत तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान बहुत बड़ी गलती कर चुका है। ईरान के सशस्त्र बल ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ ने बृहस्पतिवार को दावा किया था कि उसने हर्मुज जलसंधि के पास अपने हवाई क्षेत्र में एक अमेरिकी जासूसी विमान को मार गिराया है। सामरिक महत्व के इस समुद्री मार्ग में तनाव बढ़ाने वाली यह ताजा घटना है। अमेरिका के रक्षा मंत्रालय मुख्यालय पेंटागन ने इस बात की पुष्टि की है कि ईरानी सैन्य बलों ने अमेरिकी नौसेना के एक निगरानी ड्रोन को मार गिराया है। साथ ही यह भी कहा कि यह अंतराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में था, ना कि ईरान के हवाई क्षेत्र में ।

अमेरिकी मध्य कमान के प्रवक्ता एवं नौसेना कैप्टन बिल अर्बन ने एक बयान में कहा बीएएमएस- ड्रोन को एक ईरानी मिसाइल ने उस वक्त मार गिराया जब यह होर्मुज जलसंधि के ऊपर अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में था। उन्होंने कहा कि विमान के ईरान के हवाई क्षेत्र में होने की ईरानी रिपोर्ट झूठी है।

इससे पहले, रिवोल्यूशनरी गार्ड ने एक बयान में कहा कि अमेरिका निर्मित ग्लोबल हॉक निगरानी ड्रोन विमान को एक मिसाइल से निशाना बनाया गया। उस पर यह हमला उस वक्त किया गया, जब वह होरमोजगन प्रांत के जल क्षेत्र के ऊपर था। ईरानी सेना ने ड्रोन की तस्वीरें अभी प्रकाशित नहीं की है। उल्लेखनीय है कि इस जल क्षेत्र में करीब हफ्ते भर पहले दो टैंकरों पर हमला हुआ था और अमेरिका ने इस हमले के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया था। इस घटना से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ रहा है। हालांकि, ईरान ने इसमें अपनी किसी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है।

ईरान ने संकेत दिया है कि अमेरिका ने ही यह हमला (जहाजों पर) कराया होगा ताकि इसके बहाने इस्लामी गणराज्य (ईरान) के खिलाफ बल प्रयोग किया जा सके। तसनीम समाचार एजेंसी ने रिवोल्यूशनरी गार्ड प्रमुख हुसैन सलामी के हवाले से बताया कि ड्रोन विमान को गिराना ईरान की सीमाओं की हिफाजत करने वालों की ओर से एक स्पष्ट संदेश है। सलामी ने कहा, ‘‘हम यह घोषणा करते हैं कि हम युद्ध नहीं चाहते हैं लेकिन हम युद्ध की किसी भी घोषणा का जवाब देने के लिए तैयार हैं।’’ गौरतलब है कि 2015 के ऐतिहासिक परमाणु करार से पिछले साल मई में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हटने की घोषणा के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। (इनपुट-भाषा)

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