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  • राजस्थान के मुस्लिम समुदाय मे भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों (IAS) के अन्य प्रदेशो से राजस्थान केडर मे आने से बदलाव देखा जा रहा है।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान के मुस्लिम समुदाय से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) मे सीधे तौर पर चयनित चंद अधिकारियों मे से किसी एक को भी अभी तक राजस्थान केडर एलाट नही हो पाया है। लेकिन 1976 मे गाजीपुर यूपी के नवाब खानदान से तालूक रखने वाले सलाऊद्दीन अहमद खान IAS सीधे तौर पर चयनित होकर राजस्थान केडर मे पदस्थापित होने के सालो साल बाद जम्मू काशमीर के कमरुल जमन चोधरी, फिर जम्मू काश्मीर के ही अतर आमिर व फिर केरल के मोहम्मद जुनेद राजस्थान केडर मे बतोर आईऐएस पदस्थापित होने के बाद राजस्थान मे शेक्षणिक व आर्थिक तौर पर पीछड़े मुस्लिम समुदाय मे भी भारतीय सिविल सेवा की परीक्षा देने का चलन जौर पकड़ने लगा है। चाहे अभ्यार्थी आईऐएस कभी कभार ही बन पा रहे हो लेकिन उक्त अधिकारियों की मोजूदगी मात्र से प्रभावित होकर जो युवक-युवती उक्त परिक्षाऐ दे रहे वो एलाईड सेवा मे जरूर स्थान पा रहे है।

    कल चोदाह आईऐएस की जारी सुची मे केरला के मलापुरम के रहने वाले मोहम्मद जुनेद को झालावाड़ उपखण्ड अधिकारी पद पर पदस्थापित होने के आदेश मिले है। जबकि इससे पहले इसी महीने जारी अन्य तबादला सूची मे अतर आमिर व कमर चोधरी को भी श्रीगंगानगर व उदयपुर पदस्थापित होने के आदेश मिले है।

    सीधे तोर पर चयनित आईऐएस अधिकारी सलाऊद्दीन अहमद खान राजस्थान मे पहले मुस्लिम पदस्थापित अधिकारी होने के बाद वो मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त होकर अब जयपुर मे ही अधिकांशतः निवास करते है। उनके सालो साल बाद सीधे तोर पर IAS चयनित होकर आये कमरुल जमा चोधरी, अतर आमिर, व मोहम्मद जुनेद अभी नये नये है। जिनमे से अभी किसी को भी जिला कलेक्टर पद पर रहने का अवसर नही मिल पाया है।

    भारतीय सिविल सेवा परीक्षा पास करके राजस्थान मे पदस्थापित होने वाले उक्त चारो अधिकारियों के अलावा राजस्थान प्रशासनिक सेवा व अदर सर्विसेज कोटे मे तरक्की पाकर भी अनेक मुस्लिम अधिकारी आईऐएस बने है। जिनमे वर्तमान मे हनुमानगढ़ कलेक्टर जाकीर हुसैन व झूंझुनू कलेक्टर उमरदीन खान भी है। उक्त दोनो वर्तमान जिला कलेक्टरस के अलावा जे.एम खान, एम.एस.खान, ऐ.आर खान, अशफाक हुसैन व शफी मोहम्मद कुरेशी भी भारतीय प्रशासनिक सेवा IAS अधिकारी रहे है। यह सभी जिला कलेक्टर पद पर पदस्थापित रह चुके है। इनके अलावा मोहम्मद हनीफ भी तरक्की पाकर भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी रहे है।

    कुल मिलाकर यह है कि उक्त उल्लेखित आईऐएस अधिकारियों के अलावा राजस्थान गठन के समय रियासतों के विलय के समय रियासतो से आईऐएस समान स्तर के छ मुस्लिम अधिकारी भी राजस्थान मे पदस्थापित रहे है जिनमे अलाऊद्दीन खिलजी व रहमत अली जाफरी जिला कलेक्टर भी रहे है। लेकिन अब सीवे तोर पर यूपीएससी द्वारा चयनित आईऐएस अधिकारियों के राजस्थान केडर मे पदस्थापित होने से राजस्थान के मुस्लिम समुदाय के युवाओं मे भारतीय सिविल सेवा की परीक्षा देने के प्रति लगाव बढने लगा है।

  • राजीव गांधी हर वर्ग की आवाज थे,देश के विकास के सूत्रधार थे:चौधरी आफताब अहमद

    हरियाणा कांग्रेस विधायक दल के उप नेता चौ. आफताब अहमद ने भारत रत्न स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के 75 वें जन्मदिन सदभावना दिवस पर खिराजे अकीदत पेश करते हुए उन्हें लेख समर्पित किया है:

    देश के छठे प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की 75 वीं सालगिरह पर देश उन्हें याद कर रहा है, और याद कर रहा है उनके उस दौर को भी जिसमें लोकतंत्र, संविधान, धर्मनिरपेक्षता, विकास सब का बोलबाला था। आज के दौर में भले ही लोकतंत्र, संविधान, धर्मनिरपेक्षता, विकास मौजूदा सरकार के लिए कोई खास अहमियत नहीं रखते हैं। लेकिन किसी भी मुल्क की तरक्की में इन सभी का होना बड़ा जरूरी है।

    स्वर्गीय राजीव गांधी सभी के आदर्श व्यक्ति हैं, वो आधुनिक भारत के निर्माता थे जिन्होंने कम्प्यूट्रीकृत युग का सपना देखा फिर उसे पूरा करने के लिए अपना जीवन न्याछौवर कर दिया। आज उन्ही के मेहनत और लगन से हम एक क्लिक पर ही सारे काम आसानी से कर सकते हैं । उनके योगदान को भारतवासी कभी भुला नहीं सकता। उनके द्वारा देश की उन्नति के कार्यो की जितना तारीफ की जाए वो कम है।आज ऐसे प्रधानमंत्री कहीं देखने को नहीं मिलते ये केवल दुर्भाग्य ही है।

    स्वर्गीय राजीव गांधी में परिस्थितियों को परखने, समझने और निर्णय लेने की अद्भुत क्षमता थी। इस महान् नेता की निष्छलता एवं प्राकृतिक सेवा की प्रवृत्ति ने भारत को दुनिया की एक सृदृढ़ शक्ति के रूप में स्थापित किया। भारत रत्न राजीव एक संवेदनशील, कोमल दिल के महान् नेता थे, जो उनके दिल में होता था वही जबान पर होता था, आज तो नेता केवल जुमलेबजी तक ही सीमित रह गए हैं। आज के भारत की कल्पना सिर्फ भाषण की लफ्फाजी नहीं थी बल्कि इसके परिप्रेक्ष्य में नीहित एक कल्पनाशीलता एवं नियोजन था, इस नियोजन को कार्यक्रम में परिवर्तित करने के लिए राजीवजी ने अपने जीवन को समर्पित कर दिया।

    देश में पंचायत राज की व्यवस्था, औद्योगिक क्रान्ति, हर हाथ को रोजगार, संचार युग की क्रान्ति, सूचना युग का भारत में प्रतिस्थापन हो, अन्र्तराष्ट्रीय स्तर पर भारत की मजबूत स्थिति जैसे क्रांतिकारी कदम एवं उनका क्रियान्यवन भारत के लिए वरदान साबित हुए हैं ।
    आज देश अगर दुनिया में एक मजबूत देश के रूप में जाना जाता है तो वो राजीव गाँधी की मेहनत का फल है।

    इंदिराजी की हत्या के बाद राष्ट्र की पूरी जिम्मेदारी राजीव गांधी के युवा और मजबूत कंधों पर आ गई। जब सारा देश जल रहा था उस समय देश को एक धेर्येशील मार्ग एवं सांत्वना की आवश्यकता थी, अचानक ही देश को एक प्रखर, उज्जवल, महाव्यक्तित्व से साक्षात्कार हुआ वे थे देश के नये प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी। राजीव जी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि ‘‘वह केवल मेरी मां ही नहीं हम सब की मां थी, हिंसा, घृणा व देश से इंदिरा जी की आत्मा को दुख पहुंचता था, आप शांत रहे और धैर्य से काम ले’’। उनके इन शब्दों का देश के नागरिकों पर जादुई असर हुआ, लोगों के आंसू थमने लगे। ये उनके व्यक्तित्व का ही प्रभाव था कि देश में नफरत की आंधी रूक सी गई।

    अमेरिका की पत्रिका ने राजीव जी को दुनिया का सबसे लोकप्रिय व्यक्तित्व का खिताब देते हुए लिखा था कि ‘‘राजीव गांधी पूरब के सूरज है जिनसे पश्चिमी सभ्यता और संस्कृति को एक सांस्कृतिक, वैचारिक प्रकाष प्राप्त होगा’’।उसी विदेशी अखबार ने उनके निधन पर लिखा था कि ‘‘पूरब का सूरज दोपहर से पहले ही अस्त हो गया’’।

    राजीव गांधी के मन मे यह विचार बसा हुआ था कि भारत के निर्माण और ऊर्जा में बढ़ोत्तरी के लिये युवाओं को प्रोत्साहन और जिम्मेदारी सौंपना जरुरी है, इसलिए उन्होंने तमाम अन्र्तविरोधों की दरकिनार करते हुए युवाओं को 18 वर्ष में मताधिकार का अधिकार प्रदान किया। युवाओं के लिए अनंत संभावनाओं का भण्डार विकसित करने के लिए देश में आई.टी. संस्कृति को बढ़ावा दिया था । आज आधुनिक टेक्नोलॉजी से हम विश्व की विकास दर से कदम मिला रहे है।
    उस वक़्त विपक्ष ने बैलगाड़ी से संसद पहुच कर राजीव जी के सपनो का उपहास उड़ाया था लेकिन उन्होंने परवाह न करते हुए आज देश को एक नए मुकाम पर पहुचाया है । आज बीजेपी सरकार के छह सालों के गलत फैसलों के कारण युवा बेरोजगार है, मंहगाई आसमान छू रही है, किसान मर रहे हैं, महिलाएं महफूज़ नहीं है, देश की जीडीपी लुड़क गई है।

    इस समय देश को राजीव जी की याद आती है जो एक मौन कर्मषील व्यक्तित्व के धनी थे, जिनके भाषण में सच और भोलापन था, कुटिलता बिलकुल नहीं थी, जो फैसलें लेने में निडर और निर्णयों को क्रियान्वित करने में देर नहीं करते थे। यह भारत का दुर्भाग्य ही है जब भी इस देश में गैर कांग्रेसी सरकारें बनी है भारत की तरक्की और अन्तराष्ट्रीय छवि में धूमिलता ही आई है।

    ( इस लेख के लेखक कांग्रेस विधायक दल के उप नेता, नूह विधायक चौधरी आफताब अहमद हैं )

  • जब बिहार विधान पार्षद ने ही उड़ा डाली social distancing की धज्जियां, जमकर मनाया जश्न – देखें वीडियो

    • पूर्वी चंपारण में रोज़ पहुंच रहे हैं सौ के पार आंकड़े
    • फिर भी शहर के प्रथम नागरिक ने की नियमों की अवेहलना
    • जश्न के दौरान नव निर्वाचित एमएलसी अति उत्साह में भूल गए सोशल डिस्टेंसिंग ।
    • ज्यादातर नेताओं ने मास्क पहनने से भी किए परहेज
    • स्वागत कार्यक्रम में नेताओं ने जमकर उड़ाई Social Distancing की धज्जियां
    • डीएम शीर्षत कपिल अशोक करेंगे करवाई ?? 

     

    पटना  / मिल्लत टाइम्स डेस्क

    भले ही बिहार में कोरोना संक्रमितों का आकड़ा रोज़ हजार के पास पहुंच  रहा हो लेकिन बावजूद इसके आम जनता तो आम जनता, जिममेदार पदों पर बैठे लोग भी कोरोना प्रोटोकॉल के नियमों की अनदेखी करने में पीछे नहीं है। सोमवार को ऐसा ही वाकिया सामने आया है, जिसमें क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिक  यानी नव निर्वाचित एमएलसी फारूक शेख ने कोरोना प्रोटोकॉल के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई। दरअसल विधान परिषद सदस्य बनाए जाने के बाद पहली बार पूर्वी चंपारण जिले के ढाका विधानसभा का दौरा करने आए थे जहां उनके कार्यकर्ता  उनका फूल माला से स्वागत करने के लिए पहुंचे थे। वो पटना से चल कर ढाका पहुंच रहे थे जिसके मद्दे नज़र उनके कार्यकर्ताओं ने उन्हें पूर्वी चंपारण जिला अंतर्गत चकिया में रिसीव किया जिसमें सैकड़ों बाइक तथा चारपहिया वाहन शामिल थे । हजारों की इस भीड़ से गद गद एमएलसी फारूक शेख मास्क लगाना भूल गए।  जबकि उनका अभिनंदन करते हुए कई नेताओं ने ना सिर्फ सोशल डिस्टेंसिंग की  अनदेखी की, बल्कि धज्जियां भी उड़ाई । हालांकि अभी भी पूरे राज्य में लॉक डाउन जारी है जिसमें किसी भी राजनैतिक , सामाजिक अर्थात सांस्कृतिक कार्यक्रम पर रोक है ।

     

    वहीं दूसरी तरफ आम लोगों से वाहन अधिनियम का पालन कराने वाली आम लोगों को वाहन अधिनियम का पाठ पढ़ा कर हजारों का जुर्माना ऐंठने वाली बिहार पुलिस के सामने वाहन अधिनियम की भी खूब धज्जियां उड़ाई गई । और पुलिस सिर्फ तमाशाई बनी रही। 
    अब ऐसे में प्रश्न ये उठता है कि क्या सिर्फ आम लोगों के लिए लॉक डाउन है और कुर्सी पर बिराजमान राजनैतिक हस्तियों के लिए कुछ भी नहीं ??
     क्या पूर्वी चंपारण के डीएम शीर्षत कपिल अशोक इस पर कार्रवाई करेंगे ?? क्या
    ज्ञात हो कि : इस से पूर्व जिले के ढाका विधायक फैसल रहमान कोरेंटाइन सेंटर में रह रहे प्रवासी मजदूरों के साथ हो रही कू-व्यवस्था को लेकर ढाका गांधी चौक पर धरने पर बैठे थे । जिसके बाद पूर्वी चंपारण के डीएम शीर्षत कपिल अशोक के आदेश पर ढाका अनुमंडल पदाधिकारी ज्ञान प्रकाश ने उनके विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई थी ।
    प्रशासन ने ये आरोप लगाया था कि सामाजिक दूरी का पालन न करने , बिना परमीशन धरना पर बैठने तथा लॉक डाउन के नियमों का उलंघन करने को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई है ।

  • पप्पू यादव ने दरभंगा में 200 बाढ़ पीड़ित परिवारों की आर्थिक मदद की, पूरे शहर को बाढ़ प्रभावित इलाका घोषित करने की माँग की

    जन अधिकार पार्टी लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय पप्पू यादव जी पूर्व से घोषित कार्यक्रम में आज दरभंगा के श्यामा रेसीडेंसी होटल पहुंचे जहां उन्होंने जिला अध्यक्ष डॉक्टर मुन्ना खान के साथ एक प्रेस वार्ता किया, उन्होंने सीधे तौर पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 15 सालों में सिर्फ प्रचार प्रसार किया गया मगर थोड़ा ट्रिपल कोई काम नजर नहीं आता नीतीश जी अच्छे इंसान हो सकते हैं लेकिन अच्छे मुख्यमंत्री नहीं मेरी सरकार अगर आती है तो नियोजित नाम का कोई शब्द नहीं होगा शिक्षक हो या कोई भी विभाग सब में परमानेंट नौकरी का प्रावधान होगा और जो नियोजित पर काम कर रहे हैं उनको परमानेंट करने का सबसे पहले काम किया जाएगा,नीतीश जी शिक्षा में,स्वास्थ्य में,
    कारोना महामारी में,बाढ़ में पूरे तौर पर विफल हैं, जिस विभाग का जो काम है और जिस विभाग में बहाली हुई है उसी विभाग में ही काम करना होगा उनसे कोई दूसरा काम नहीं लिया जाएगा,शिक्षक पढ़ने पढ़ाने के लिए बहाल किए गए हैं तो उनको सिर्फ बच्चों को पढ़ा कर बिहार के भविष्य के निर्माण के लिए प्रयोग किया जाएगा,उनसे कोई दूसरा काम करवा कर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं किया जाएगा, सुशांत सिंह राजपूत पर मैंने तो डेढ़ महीना पहले ही कह दिया था नीतीश बाबू अब जाके हैं क्योंकि वोट की राजनीति उन्हें करनी आती है।

    इस प्रेस वार्ता में युवा जिला अध्यक्ष चुनमुन यादव युवा कार्यकारिणी प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत सिंह, पुतुल बिहारी,एडवोकेट सुनील कुमार, अकलियत जिला अध्यक्ष चांद हामिद, प्रदेश छात्र कार्यकारणी अध्यक्ष दीपक झा,मोहन यादव आदि मौजूद थे, प्रेस वार्ता के बाद जदयू,आरजेडी, आप,भाजपा को छोड़कर इन लोगों ने जन अधिकार पार्टी लोकतांत्रिक की सदस्यता राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय पप्पू यादव जी के समक्ष ले लिया जिसमें आमतौर पर ज्योति शुक्ला, भारती सिंह,सियाराम पासवान,अरविंद कुमार, विसंबर यादव,अरविंद कुमार,मोहम्मद आलम, अभिषेक कुमार,अविनाश कुमार,मुरारी कुमार यादव, अवधेश यादव,राम नरेश यादव,गौरव दत्ता,शंकर कुमार राय,दिनेश साह, ललित जी,सतीश प्रसाद, सदस्यता दिलाने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू यादव डीएमसीएच पहुंचे ज्ञात हो कि बीते दिनों ढाई साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ था,उस बच्ची और उनके पूरे परिवार से मिले और उन्हें 25000/- की आर्थिक मदद किया और डॉक्टर बी एस प्रसाद से बात करते हुए भावुक हो गए और कहा कि इस बच्ची की ऑपरेशन में जो भी खर्च आएगा जन अधिकार पार्टी लोकतांत्रिक दरभंगा इकाई उठाएगी,मगर इस बच्ची का जान किसी भी हाल में बचना चाहिए, उसके बाद दरभंगा के बाजीदपुर होते हुए रत्नों पट्टी बाइक पर सवार होकर बाढ़ ग्रस्त इलाकों का दौरा करने पहुंचे और बाढ़ ग्रस्त परिवारों को लगभग दो लाख रुपए (₹200000) की आर्थिक मदद 200 परिवारों के बीच में 500-500 की आर्थिक मदद दिया और नगर अध्यक्ष पप्पू सरदार से कहा कि यहां अभिलम्ब खाना और दवा जन अधिकार पार्टी की ओर से पहुंचाने का प्रबंध करें,फिर वहां के बाद बाईक की सवारी करते हुए ही आजमनगर के चतरिया पहुंचे और वहां के मोहल्ले वासियों से मुलाकात करने के बाद जिलाधिकारी महोदय से मोबाइल से बात करके निवेदन किया की पूरे शहर को बाढ़ ग्रस्त घोषित कर देना चाहिए, बहुत बुरी स्थिति है शहरी इलाके में इसलिए इस पर कृपया ध्यान दें,

    प्रेस विज्ञप्ति- डॉक्टर मुन्ना खान, जिला अध्यक्ष जन अधिकार पार्टी लोकतांत्रिक दरभंगा

  • ज़ियाउल्लाह खान : प्रखर वक्त एवं समर्पित समाजसेवी

    14 अगस्त 1935 को सैनिटरी इंस्पेक्टर अब्दुर्रहीम खान साहब के घर जन्मे ज़ियाउल्लाह खान में समाजसेवा का जुनूर बचपन से ही था। 42 वर्ष की आयु में 20 नवंबर 1977 को वे सर्वप्रथम पटना नगर निगम अंतर्गत वार्ड 24 में बतौर पार्षद निर्वाचित हुए। परिसीमन उपरांत उन्होंने 1983 एवं 2002 में क्रमशः वार्ड 31 व वार्ड 50 का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 1990 से 2002 तक वे पटना के उप महापौर रहे। जनप्रतिनिधि होने का महत्त्व वो बख़ूबी समझते थे। यही कारण था कि न तो अधिकारियों के आगे झुके न ही कभी उनकी जी हुज़ूरी की। राजनीतिक प्रतिद्वंदिता को उन्होंने व्यक्तिगत संबंधों में कभी आड़े नहीं आने दिया। जनता का काम करवाने की उनमें अद्भुत प्रतिभा थी, साथ ही वे निगम कर्मचारियों के हक़ हुक़ूक़ों की लड़ाई में भी कभी पीछे नहीं रहे। वे प्रखर वक्ता भी थे। उनकी वाणी का ओज और प्राण श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता था। वे पक्के दोस्तपरस्त थे। उस ज़माने के पार्षदों में बैजनाथ गोप, जगदीश प्रसाद यादव एवं श्याम बाबू राय आदि कुछ उनके ऐसे ही दोस्त थे जो एक दूसरे पर जान छिड़कते थे। कसेरा टोली निवासी महेंद्र प्रसाद कसेरा भी उनके अनन्य मित्रों में से थे।

    खान साब शिकार के बड़े शौक़ीन थे। पर, शिकार के नियमों का अनुपालन करना वे कभी नहीं भूलते। कभी भी बैठे हुए परिंदों का शिकार उन्होंने नहीं किया। खाने खिलाने के भी वे बड़े शौक़ीन थे। लोगों से मिलना-जुलना और घूमना-फिरना उन्हें अत्यंत रुचिकर था। राजनीति को उन्होंने सर्वदा सेवा और मिशन समझा। यही कारण है कि उन्होंने सर्जना पर ध्यान दिया, अर्जन पर कभी नहीं। उन्हें झूठ से सख़्त नफ़रत थी।

    29 जुलाई 2020 की मनहूस सुबह 3 बजकर 20 मिनट पर पटना सिटी के कंघइया तोला स्थित अपने निवास स्थान पर “नम्मू चाचा” ने अंतिम सांस ली और इस तरह से गंगा-जमुनी तहज़ीब के पक्के हामी और निष्ठावान समाजसेवी की जीवन यात्रा का अवसान हो गया।

  • जैसलमेर मे मुख्यमंत्री गहलोत ने मीडिया से बात करते हुये सवालों के जवाब दिये।

    अशफाक कायमखानी।जैसलमेर। राजस्थान।
    मुख्यमंत्री गहलोत ने राजस्थान मे पीछले एक महिने मे घटे राजनीतिक घटनाटक्रम व मची उथल फूथल को भूलकर आगे बढने की कहते हुये मीडिया के सवालो के जवाब दिये।

    सवाल- सर इस पूरे प्रकरण को कैसे देखें इसको, शाह की मात के तौर पर या लोटस को फेल करने के तौर पर?
    जवाब- फॉरेगेट एंड फॉरगिव, आपस में भूलो और माफ करो और आगे बढ़ो, देश के हित में, प्रदेश के हित में, प्रदेशवासियों के हित में और लोकतंत्र के हित में। डेमोक्रेसी खतरे में है। ये लड़ाई डेमोक्रेसी को बचाने की है, उसमें जो हमारे विधायकों ने इतना साथ दिया, 100 से अधिक विधायक एकसाथ रहना इतने लंबे समय तक, अपने आप में बहुत बड़ी बात है जो हिंदुस्तान के इतिहास में कभी नहीं हुआ होगा। तो ये डेमोक्रेसी को बचाने की लड़ाई है, आगे भी जारी रहेगी ये हमारी लड़ाई और बाकि जो एपिसोड हुआ है, एक प्रकार से भूलो और माफ करो की स्थिति में रहें, सब मिलकर चलें क्योंकि प्रदेशवासियों ने विश्वास करके सरकार बनाई थी हमारी। हमारी सबकी जिम्मेदारी बनती है कि उस विश्वास को बनाए रखें हम लोग और प्रदेश की सेवा करें, सुशासन दें और कोरोना का मुकाबला करें सब मिलकर। ये जीत जो है, ये जीत असली प्रदेशवासियों की जीत है। पूरे प्रदेशवासियों ने जो हमारे MLAs ने जो हौसला अफ़ज़ाई की टेलीफोन कर- करके, कोई चिंता नहीं, महीना-दो महीना लग जाए परवाह मत करो, जीत सरकार की होनी चाहिए, सरकार स्टेबल होनी चाहिए, उसके बाद में आप आओ हमारे घरों में। तो ये जो जज़्बा था पूरे प्रदेशवासियों का, उसकी जीत है ये। मैं उनको बधाई देता हूं, धन्यवाद देता हूं प्रदेशवासियों को और विश्वास दिलाता हूं कि जीत हमारी सुनिश्चित है, आने वाले वक्त में और दोगुने जोश से सब काम करेंगे, आपकी सेवा करेंगे।

    सवाल- सर आप जनता से कहते रहे ‘मैं थासूं दूर कोनी’, अब विधायकों को ये कहना पड़ा, अपने विधायकों?
    जवाब- ‘मैं थासूं दूर कोनी’ मैंने पहले भी कहा था, अब भी कह रहा हूं और विधायकों के आपस के अंदर संबंध अच्छे बने हैं। एक महीना साथ रहते हैं, तो आप समझ सकते हो कि कितने अंतरंग संबंध बने होंगे। सबने मिलकर एकजुट होकर संकल्प किया है कि हमें जाकर प्रदेशवासियों की सेवा करनी है, जो हमारा परम धर्म बनता है।

    सवाल- कई विधायक नाराज हैं?
    विधायकों की नाराजगी को हमने दूर करने का प्रयास किया है। उनकी नाराजगी होना स्वाभाविक है, जिस रूप में ये एपिसोड हुआ, उनको एक महीना रहना पड़ा, उससे नाराजगी होना स्वाभाविक था। उनको मैंने समझाया है कि देश और प्रदेश और प्रदेशवासियों के और लोकतंत्र को बचाने के लिए कई बार हमें कई बार सहन करना भी पड़ता है। हम सब आपस में मिलकर काम करेंगे । जो हमारे साथी चले गए थे वो भी वापस आ गए हैं। मुझे उम्मीद है कि सब गिले-शिकवे दूर करके सब मिलकर हम प्रदेश की सेवा करने का संकल्प पूरा करेंगे।

    सवाल- सर आपका पत्र बहुत चर्चा में रहा, जो पत्र विधायकों को लिखा आपने?
    जवाब- पत्र पक्ष को विपक्ष को सबको लिखा था और मैं ये दावे के साथ कह सकता हूं कि उस पत्र का बड़ा इम्पैक्ट पड़ा। उसी कारण से बीजेपी के जो तीन-तीन प्लेन हायर किए उन्होंने एयरक्राफ्ट, गुजरात भेजने के लिए, मुश्किल से एक जा पाया, वो भी पूरा नहीं भरा हुआ था और उनका कल से कैंप लगना था क्राउन प्लाजा होटल के अंदर, मीटिंग थी, वहीं रहना था, बाड़ेबंदी हो रही थी, जो कहते थे हमें ‘बाड़ेबंदी क्यों कर रहे हो?’ ये क्या नौबत आ गई कि उनकी बाड़ेबंदी होने लग गई? उससे जो हालात बने हैं प्रदेश के सामने, पूरी तरह वो एक्सपोज़ हो गए। पूरा खेल उनका था, सरकार को टॉपल करने का षड्यंत्र था, जो उन्होंने कर्नाटक में भी, मध्यप्रदेश के अंदर भी जो कुछ भी किया, दुनिया जानती है और लोग पसंद भी नहीं करते हैं, वो ही षड्यंत्र राजस्थान का था जो पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है।

    सवाल- भाजपा जो आरोप लगा रही है, अशोक गहलोत इस पूरे प्रकरण पर क्या कहना चाहेंगे एक लाइन में, किसी की जीत, किसी की हार या क्या?
    जवाब- डेमोक्रेसी का हमारा जो, किसी की हार-जीत की बात नहीं होती है। उद्देश्य क्या है, सिद्धांत क्या हैं, नीतियां क्या हैं, कार्यक्रम क्या हैं हम लोगों के, उसपर हम लोग सोचते हैं, तो वो कांग्रेस के पक्ष में है। कांग्रेस का जो शानदार महात्मा गांधी के जमाने का इतिहास है, पंडित नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, अंबेडकर साहब ने बनाया संविधान। 70 साल के बाद में भी हमारे यहां लोकतंत्र कायम रहा है और अब भी मैं कहना चाहूंगा, इस देश के अंदर लोकतंत्र आने वाली सदियों तक कायम रहे, ये हमारा सपना रहेगा जिंदगी का। उसको बचाने के लिए हम सब एकजुट रहेंगे और आप देखेंगे कि पूरा प्रदेश-पूरा देश एकजुट रहेगा। किसी कीमत पर जो मंसूबे हैं भारतीय जनता पार्टी के लोकतंत्र खत्म करने का, वो कभी पूरा नहीं होने देंगे। ये राहुल गांधी जी की भी सोच है, सोनिया गांधी जी की भी सोच है, हम सबकी सोच है, उसपर उनके नेतृत्व में चलेंगे और डेमोक्रेसी को बचाने के लिए कितना ही बड़ा संघर्ष करना पड़े, हम चूकेंगे नहीं और सत्य की जीत होती है, सत्यमेव जयते, सत्यमेव जयते, सत्यमेव जयते।

  • एसडीपीआई छपरा सारण टीम के द्वारा बाढ़ पीड़ितों के बीच बांटा गया राहत सहायता सामग्री

    एसडीपीआई छपरा सारण की टीम ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जाकर बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच सूखे खाने-पीने की सामग्री का किया वितरण जैसा कि आप सबको पता है ज़िला में कई क्षेत्र इन दिनों बाढ़ की परेशानियों से दो चार हैं इसी बीच एसडीपीआई छपरा सारण की टीम ने मढौड़ा क्षेत्र के बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंच कर खाने पीने के सूखे सामग्रियों का वितरण किया एसडीपीआई की टीम हमेशा लोगों की सहायता के लिए तत्पर रहती है चाहे बाढ़ हो भूकंप हो आग लगी हो या करोना से मृत्यु हुई हो इस दुख की घड़ी में एसडीपीआई की टीम लोगों की सहायता के लिए हमेशा उनके साथ खड़ी रहती है ठीक इसी प्रकार बाढ़ पीड़ितों के बीच जाकर उन्हें सुखा राशन वितरण किया और उनके हालचाल को जाना इस अवसर पर एसडीपीआई छपरा सारण के जिला अध्यक्ष डॉक्टर नौशाद अहमद ने कहा कि हम लोग आगे भी इस तरह के सहायता को लगातार जारी रखेंगे इस अवसर पर जिला अध्यक्ष डाॅक्टर नौशाद अहमद के साथ जिला महासचिव कामरान अंसारी, जिला सचिव एहसान अहमद,
    जिला सचिव सह प्रवक्ता इशतेयाक अहमद,रेयाजुददीन अहमद, मोहम्मद रहमतुल्लाह, दिलशाद आलम, आजाद ख़ान,
    मोहम्मद फजलुर्रहमान इत्यादि उपस्थित थे!

  • मुख्यमंत्री गहलोत व सचिन पायलट के मध्य छिड़े विवाद की जड़ राजद्रोह की धारा 124-A लगाना बताया जा रहा है!

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान की कांग्रेस सरकार मे कमोबेश सबकुछ ठीक ठाक चलते रहने के बावजूद जुलाई माह के मध्य मे राजस्थान की आला मुकाम रखने वाली इनवेस्टीगेशन ऐजेंसी SOG व ACB मे दो अलग अलग रिपोर्ट कांग्रेस नेताओं सहित अन्य नेताओं व कुछ अन्य लोगो के खिलाफ दर्ज होती है या मानो कि करवाई जाती है। जिन रिपोर्ट मे से जो SOG मे रिपोर्ट दर्ज हुई उसमे अन्य धाराओ के साथ राजद्रोह की धारा 124-A भी लगाई गई थी। जिसके धारा के भय के कारण सचिन पायलट व कुछ नेताओं को राजस्थान से करीब एक माह बाहर रहकर एक तरह से अण्डरग्राउण्ड होना पड़ा था। यहां तक कि एसओजी की टीम आवाज का नमूना लेने व जांच करने के नाम पर आरोपियों के छिपने के सम्भावित ठिकाने हरियाणा के मानेसर तक जाकर हरियाणा पुलिस तक एक तरह से भीड़ गई थी। उसके बाद न्यायालय मे मामला जाने पर राजद्रोह की धारा 124-A हटानी ही नही पड़ी बल्कि एसओजी ने तो उस रिपोर्ट पर एफआर भी लगा दी है।

    हालांकि एसओजी ने कांग्रेस मेन महेश जोशी की शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज करके अपने स्तर पर जांच करके पाया होगा कि जो रिपोर्ट उनके यहां लिखवाई गई थी या दर्ज की गई वो पुरी तरह सत्य से परे पाई गई होगी। तभी एसओजी ने उस रपट पर एफआर लगा कर भेजा है। लेकिन उक्त प्रकरण को लेकर जिस तरह से प्रदेश मे राजनीतिक अस्थिरता का माहोल बनाया गया व एसओजी की टीम का मानेसर सहित अन्य जगह जांच करने को लेकर जाकर आने मे सरकारी धन का खर्चा भी आया होगा। अब इसमे देखने वाली बात है कि उक्त रिपोर्ट एसओजी मे दर्ज क्यो ओर किसके इशारे पर हुई ओर जांच के नाम पर सरकारी धन का कितना खर्च आया होगा। फिर उस रिपोर्ट का परिणाम भी शुन्य आकर एफआर लगना। यह सबकुछ काफी सोचने पर मजबूर करता है।

    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत SOG व ACB मे दर्ज रिपोर्ट के पक्ष मे अनेक तरह के दावे लगातार करते रहै है। अगर रिपोर्ट मे आरोपियों पर लगाये गये आरोप सही थे ओर उन पर 124-A का मामला बनता था तो उन पर मामला बनाया जाना चाहिए था। अगर इसमे वो दोषी थे तो उन्हें सजा तक पहुंचाने तक लेकर जाना चाहिए था। अन्यथा जनता मे संदेश जायेगा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी पार्टी के अंदर मोजूद विपरीत विचार रखने वालो को दवाब मे लाने के लिये उक्त तरह से पावर व सत्ता का गलत रुप मे उपयोग किया होगा। मुख्यमंत्री को इस मामले मे जनता के सामने पूरी तरह स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

    कुल मिलाकर यह है कि हमारी जांच ऐजेंसियों की बन चुकी उजली छवि व उनके अधिकारियों का वकार हर परिस्थितियों मे कायम रखने के लिये हर राजस्थानी का कर्तव्य बनता है। अगर कोई राजनेता व व्यक्ति अपने सत्ता के पावर के सहारे ऐजेंसियों की इंसाफाना छवि पर चोट करने की कोशिश करे तो उसके खिलाफ हर इंसाफ पसंद को संवेधानिक दायरे मे रहकर विरोध मे आगे आना चाहिए। पिछले एक महिने मे राजस्थान मे घटे राजनीतिक घटनाटक्रम के हर जिम्मेदार पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए ताकि आगे उक्त तरह की पुनरावृत्ति ना हो पाये। उक्त प्रकरण मे हुये खर्च की भरपाई निरर्थक शिकायत दर्ज कराने वाले व्यक्ति महेश जोशी की निजी आय से भरपाई होकर कड़ा संदेश जाना चाहिए।

  • सचिन पायलट का गुजर होना भी उनका कांग्रेस मे वापसी का बडा कारण बना।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    हालांकि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की प्रभारी महामंत्री अविनाश पाण्डे को साथ लेकर आखिर तक सचिन पायलट की कांग्रेस मे वापसी के विरोध करते रहने के बावजूद दिल्ली मे मोजूद दिग्गज कांग्रेस नेताओं की पहल पर सचिन पायलट की गांधी परिवार के पूत्र-पूत्री की उपस्थिति मे ससम्मान वापसी मे उनका गूजर नेता होना भी एक अहम कारण माना जा रहा है।

    कांग्रेस का एक समय था जब पार्टी मे अवतार सिंह भडाना, रामवीर सिंह विधुड़ी व राजेश पायलट सहित कुछ अन्य गुजर राजनीतिक नेता समय समय पर हुवा करते थे। दिल्ली, यूपी, हरियाणा, राजस्थान व जम्मू काशमीर मे खासतौर पर गुजर मतदाताओं की एक बडी तादाद मोजूद है। जिनको साधने के लिये गुजर बिरादरी मे सामाजिक नेता तो ओर भी हो सकते है लेकिन बिरादरी मे वर्तमान समय मे कांग्रेस के पास सचिन पायलट ही लोकप्रिय गुजर राजनीतिक नेता है। जिसके नाम पर गुजर मतदाताओं को लुभाया जा सकता है। इसके विपरीत अशोक गहलोत मैनेजर अच्छे हो सकते है लेकिन उनके नाम पर उनकी बिरादरी के मत राजस्थान मे ही कांग्रेस को अच्छी तादाद मे कभी नही नही मिल पाये है। वही गहलोत के नाम से राजस्थान व उससे बाहर उनकी बिरादरी के मतो को साधना नामुमकिन बताते है।

    सचिन पायलट के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनकर राजस्थान आने के बाद तीन विधानसभा व दो लोकसभा के हुये उपचुनाव मे कांग्रेस उम्मीदवारों के जीतने मे गुजर मतदाताओ का कांग्रेस की तरफ आकर पायलट को अपना राजनीतिक नेता मानते हुये मतदान करना प्रमुख कारण रहा बताते। गुजर वेसे तो परम्परागत रुप से माली मतदाताओं की तरह गुजर भी भाजपा का मतदाता रहा है। लेकिन जबसे सचिन पायलट को अध्यक्ष बनाकर हाईकमान ने राजस्थान भेजा तब से आम गुजर मतदाता को लगा कि सचिन को मुख्यमंत्री बनाने के लिये सभी जगह कांग्रेस उम्मीदवारों के पक्ष मे मतदान करना अनिवार्य है। 2018 के विधानसभा चुनाव मे गुजर मतदाताओं ने उक्त लाईन पर ही मतदान किया था।

    कुल मिलाकर यह है कि मुख्यमंत्री गहलोत की इच्छा के विपरीत राहुल गांधी व प्रियंका गांधी की पहल पर सचिन पायलट की कांग्रेस मे वापसी के अनेक कारणो मे एक प्रमुख कारण दिल्ली-यूपी-हरियाणा-राजस्थान व जम्मू काशमीर मे गुजर मतदाताओं की बहुलता होने पर उन मतो को साधने के लक्ष्य होना भी माना जा रहा है।

  • मुकीद आलम तीसरी बार चुने गए राष्ट्रीय जनता दल पंजाब के अध्यक्ष

    पार्टी के भरोसे को मैं टूटने नहीं दूंगा , पंजाब बॉडी का होगा जल्द ऐलान: मुकीद आलम

    लुधियाना पंजाब (मेराज़ आलम): राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की कार्यकारिणी की आज पटना में बैठक हुई जिसमें राजद की ओर से जारी की गई राष्ट्रीय अध्यक्ष की लिस्ट में आरजेडी पंजाब प्रदेश अध्यक्ष की कमान मुकीद आलम उर्फ मलकीत के हाथों में ही रहेगी ।
    उल्लेखनीय है कि मुकीद आलम पिछले 3 सालों से पंजाब के अध्यक्ष पद पर हैं।

    वहीं मुकीद आलम ने कहा कि पार्टी ने जिस यकीन के साथ मुझ पर फिर से भरोसा जाहिर किया है उसे मैं टूटने नहीं दूंगा। उन्होंने कहा कि पंजाब भर में लाखों की संख्या में बिहार के लोग बसते हैं जिनका पार्टी के प्रति उत्साह देखते हुए मुझे भी हौसला मिलता है। इस साल बिहार में विधानसभा

    चुनाव की तैयारी चल रही है पंजाब के वर्कर बिहार के इस चुनाव में मुख्य रोल अदा करेंगे उन्होंने कहा कि बहुत जल्द पंजाब बॉडी का भी एलान कर दिया जाएगा।
    वहीं पार्टी के प्रिंसिपल सेक्रेट्री अब्दुल बारी सिद्दीकी ने मुकीद आलम को तीसरी बार पंजाब प्रदेश अध्यक्ष चुने जाने पर बधाई दी है और कहा है कि मुकीद आलम ने बहुत कम समय में राष्ट्रीय जनता दल को ऊंचाई पर पहुंचाया है।