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  • जंग-ए-आजादी के महान स्वतंत्रता सेनानी थे मौलाना हबीब उर रहमान लुधियानवी

    हिन्दू पानी-मुसलमान पानी की साजिश को नाकाम कर दिया था गोरों के खिलाफ फतवा : उस्मान रहमानी

    लुधियाना, 2 सितम्बर (मेराज़ आलम ब्यूरो रिपोर्ट) : भारत के स्वतंत्रता संग्राम में लुधियाना से राष्ट्रीय नायक मौलाना हबीब उर रहमान लुधियानवी की आज 64वीं बरसी के मौके पर ऐतिहासिक जामा मस्जिद में स्वतंत्रता संग्राम की पार्टी मजलिस अहरार इस्लाम की ओर से क़ुरान शरीफ पढ़ कर दुआ के साथ उन्हे श्रद्धाजंलि दी गई। इस अवसर पर संबोधन करते हुए नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी ने कहा मौलाना हबीब उर रहमान लुधियानवी भारत की जंग-ए-आज़ादी के वह नायक हैं जिन्होंने अंग्रेज साम्राज्य की जड़े हिला दी थीं। मौलाना हबीब उर रहमान लुधियानवी ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में 14 साल जेल काट और अंग्रेजों द्वारा रेलवे स्टेशनों पर हिन्दू पानी और मुस्लिम पानी के मटके लगवा कर रची गई साजिश के खिलाफ ऐलान करते हुए पेशावर तक सभी मटके तुड़वा दिए और इस जुर्म में जेल भी काटी और देश के लोगों को समझा दिया कि एक ही पानी पीकर अंग्रेजों की साजिश को नाकाम बनाना है।

    नायब शाही इमाम ने कहा कि यह मौलाना हबीब उर रहमान लुधियानवीं ही थे, जिन्होंने जालिम अंग्रजों की परवाह ना करते हुए शहीद-ए- आजम भगत सिंह के परिवार, नेता जी सुभाष चन्द्र बोस, पंडित जवाहर लाल नेहरू, पंथ रत्न मास्टर तारा सिंह, पंजाब केसरी लाला लाजपत राय, नामधारी सतगुरु प्रताप सिंह, सय्यद अताउल्लाह शाह बुखारी का हमेशा साथ दिया। यह मौलाना हबीब उर रहमान लुधियानवी ही थे जिन्होंने 1947 में देश के विभाजन को अस्वीकार करते हुए पाकिस्तान की स्थापना की विरोधता की और फिर पाकिस्तान जाने की बजाए भारत में रहने को उचित समझा। नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद उस्मान ने बताया कि भारत की जंगे आज़ादी का पहला फतवा भी आपके दादा जान मौलाना शाह अब्दुल कादिर लुधियानवी ने 1857 में दिया था और लुधियाना से अंग्रजों को मार भगाया था। उन्होंने कहा कि आज इस महान स्वतंत्रता सेनानी की बरसी के अवसर पर हम जहां उनके लिए दुआ करते हैं वहीं इस बात का फिर से प्रण करते हैं कि बहुत कुर्बानियों के बाद आज़ाद करवाए गए अपने इस भारत देश में एकता भाईचारे के लिए काम करते हुए देश के विकास में योगदान डालते रहेगें।

    : महान स्वतंत्रता सेनानी मौलाना हबीब उर रहमान लुधियानवी की बरसी के अवसर पर उनके लिए दुआ करवाते (उनके पौत्र व हम नाम) शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवीं व अन्य।

  • 50/55वर्ष आयु होने या 30 साल नौकरी कर चुके कर्मियों को हटाएगी मोदी सरकार,समय पूर्व हो जाएंगे रिटायर,आदेश जारी

    मुजफ्फर आलम/मिल्लत टाइम्स

    PATNA : केंद्र सरकार ने अपने सभी विभागों से नौकरी में 30 साल पूरे कर चुके कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा कर अक्षम या भ्रष्ट कर्मियों को चिह्नित करने और उन्हें जनहित में समय से पहले सेवानिवृत्त करने को कहा है. कार्मिक मंत्रालय के एक आदेश में यह कहा गया. केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1972 के मौलिक नियम (एफआर) 56 (जे) और 56 (आई) तथा नियम 48 (1)(बी) के तहत कर्मचारियों के कार्य प्रदर्शन की समीक्षा की जाती है जो उचित प्राधिकार को किसी सरकारी सेवक को जनहित में आवश्यक लगने पर सेवानिवृत्त करने का ‘संपूर्ण अधिकार’ देता है. शुक्रवार को जारी आदेश में कहा गया, स्पष्ट है कि इन नियमों के तहत सरकारी सेवकों को समय पूर्व सेवानिवृत्ति देना सजा नहीं है. यह ‘अनिवार्य सेवानिवृत्ति’ से अलग है जो केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1965 के तहत निर्दिष्ट शास्तियों या सजाओं में से एक है.

    आदेश के अनुसार सरकार किसी सरकारी कर्मचारी की आयु 50/55 वर्ष होने या 30 वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद किसी भी समय जनहित में उसे समय पूर्व सेवानिवृत्त कर सकती है. गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले साल भी अक्ष्म या भ्रष्ट कर्मचारियों को नौकरी से हटाया था. ऐसे कर्मचारियों को मोदी सरकार ने जबरन रिटायरमेंट दे दिया था

  • बिहार विधानसभा चुनाव: जाले विधानसभा सीट से ए आई एम आई एम लड़ेगी चुनाव

    दरभंगा, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तिहादुल मुस्लिमीन ने छातापुर विधानसभा से चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है, जिसके बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दोड़ गई है. पार्टी के युवा जिला अध्यक्ष शफ़क़त रिज़वान ने बताया कि जाले विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी देने की मांग लगातार पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान से की जा रही थी जिसके बाद पार्टी ने आज दूसरी सूची में जाले का नाम शामिल किया है.

    साथ ही उन्हों ने कहा कि हम सब मजलिस के कार्यकर्ता प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान, प्रदेश अध्यक्ष यूवा प्रकोष्ट आदिल हसन और बिहार चुनाव प्रभारी माजिद हुसैन का शुक्रिया अदा करते हैं. जिन्हों ने जाले विधानसभा सीट पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा की, पार्टी के प्रदेश टीम को बधाई देने वालों में डॉ सोहैल रूहानी,अज़मतुल्लाह अबुसईद, नेसार बेग,मोहम्मद फहद अशफाक अहमद, मोहम्मद अयातुल्लाह, बदरुल हसन, हमीदुल्लाह, सरवर आलम, हैदर अली, बदरे आलम, मोहम्मद रेहान, शिबली नुमानी, जमील अहमद गुड्डू, अब्दुर रज़्ज़ाक़, खुर्रम, हाफिज सेराज, हाफिज फय्याज मिस्बाही, यासिर अरफ़ात, रेजाउल हक, मौलाना गुफरान परवाना, वसीम अहमद, सबा करीम, अहमद अली, हाफिज मोहम्मद शाहिद, मुकेश कुमार गुप्ता, तहसीन नदीम आदि कार्यकर्ता शामिल हैं

  • कोरोना के बीच अभूतपूर्व कार्य करने वालों को इम्पार ने सम्मानित किया

    यह सम्मान लोगों के मनोबल को बढ़ाने के लिए हैं ताकि भविष्य में जब भी देश को ज़रुरत पड़े लोग आगे आयें : इम्पार

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: इंडियन मुस्लिमस फॉर प्रोग्रेस एंड रिफॉर्म्स की ओर से उन संस्थानों और व्यक्तियों को सम्मानित करने के लिए एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिन्होंने करोना महामारी के बीच असाधारण कार्य करके लोगों को इस कठिन परिस्थितियों में बचाने और उन्हें सहारा देने का काम किया। इंडियन मुस्लिमस फॉर प्रोग्रेस एंड रिफॉर्म्स की ओर से जारी मीडिया बयान के अनुसार इस महामारी के बीच कई मुस्लिम चैरिटी समूह सहायता संगठनों और परोपकारी लोगों ने संकट के समय में सहायता के कामों में बढ़-चढ़कर के भाग लिया, जिसकी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मीडिया ने व्यापक रूप से रिपोर्टिंग भी की। इम्पार ने इन संगठनों संस्थानों और लोगों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह वह लोग हैं जिन्होंने अपनी हदों को पार कर के और अपनी जिंदगी को खतरे में डाल कर के भी लोगों की मदद की।

    इनके अभूतपूर्व कार्यों को देखते हुए इम्पार ने फैसला किया कि इनको सम्मानित किया जाए और इनके हौसले को बढ़ाया जाए ताकि भविष्य में भी जब भी देश को इनकी जरूरत पड़े यह बढ़-चढ़कर के भाग लें। इम्पार के अनुसार प्रोग्राम में जूरी मेंबर सलाउद्दीन अहमद पूर्व प्रमुख सचिव राजस्थान जयपुर इम्पार की मीडिया एंड रिसर्च एसोसिएट डॉक्टर अर्शी जावेद के साथ अवॉर्डीस और दूसरे मेहमानों ने भी भाग लिया।

    इम्पार ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि जिन लोगों को सम्मानित किया गया उनमें रेड क्रीसेंट सोसायटी ऑफ इंडिया का नाम शामिल है जिसकी अगुवाई अरशद सिद्दीकी कर रहे हैं, इसके अलावा ए आर वेलफेयर फाउंडेशन राजस्थान जयपुर जिसकी अगुवाई ए आर खान पूर्व सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी कर रहे हैं। हेल्पिंग हैंड फाउंडेशन जिसकी अगुवाई मुज्तबा हसन असकरी फाउंडर ट्रस्टी कर रहे हैं। इसके साथ जमात ए इस्लामी हिंद, जमीअत उलमा हिंद बेंगलुरु, तमिल नाडु मुस्लिम मुन्नेत्र कैहगाम (टीएमएमके) जिसकी अगुवाई जवाहिरउल्लाह कर रहे हैं। साथ ही डॉक्टर ताहा मतीन, शीबा असलम फहमी, शाइस्ता अख्तर सफा बैतुल माल और सज्जाद खान शामिल हैं।

    इम्पार उन कोरोना योद्धाओं का शुक्रिया अदा करता है जिन्हों ने मजहब और धर्म व जाति से ऊपर उठकर के देशव्यापी लॉक डाउन के बीच लोगों के हितों की रक्षा के लिए काम किया और उनकी जिंदगियों को बचाने में अपना अभूतपूर्व योगदान दिया। इम्पार ने उनके कामों की प्रशंसा करते हुए उन्हें भी सर्टिफिकेट देकर उनके कामों को सम्मानित करेने की बात कही।

  • मुख्यमंत्री अशोक गहलोत धीरे धीरे अपने ही तत्तकालीन उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को राजनीतिक तौर पर कमजोर करने मे सफल होते जा रहे है!

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।

    करीब पोने दो साल पहले जब राजस्थान सरकार का गठन हुवा था तब से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजस्थान कांग्रेस मे अपने मुकबील नेता सचिन पायलेट को कमजोर करके अपनी राह से हटाने के लिये मौके की तलाश मे लगातार प्रयत्न कर रहे थे। मुख्यमंत्री गहलोत अपनी आदत के अनुसार अपनी सरकार बीना किसी दखल के अपने अनुसार चलाकर अपने लोगो को राजनीतिक व संवेधानिक पदो पर नियुक्ति देने के अलावा मंत्रीमण्डल विस्तार व बदलाव मे अपने लोगो को तरजीह देना चाहते थे। लेकिन तत्तकालीन समय के प्रदेश अध्यक्ष पायलट के होने से उनको काफी दिक्कतों का सामना होने के चलते उनकी लाख कोशिशो के चलते यह सबकुछ तब तक सम्भव नही हो पा रहा था, जब तक पायलट प्रदेश अध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री पद पर आसीन थे।
    सरकार के चलने के एक अर्शे बाद मुख्यमंत्री गहलोत अपना मंसूबा पूरा करने की कोशिश पहले राज्यसभा चुनाव मे कुछ विधायको के बगावती होने की सम्भावना का काल्पनिक माहोल बनाकर विधायको व मंत्रियों की होटल मे बाड़ेबंदी करके की। पर राज्यसभा चुनाव मे कांग्रेस उम्मीदवारों के 123 मत आने से वो सचिन पायलट को हाईकमान की नजर मे सदिग्ध बना नही पाये। पर जनता मे एक चर्चा जरूर चल पड़ी थी की क्या वास्तव मे कुछ कांग्रेस विधायक भाजपा के सम्पर्क मे थे या नही। यानि शंका का वातावरण जरुर उस समय बन गया था।

    मुख्यमंत्री गहलोत सरकार गठन होने के बाद से लगातार पायलट को राजनीतिक तौर पर ठिकाने लगाने मे लगातार मोके की तलाश मे लगे रहे। अचानक जब मुख्यमंत्री को पता लगा कि पायलट के नेतृत्व मे कुछ कांग्रेस विधायक दिल्ली मे उनके नेतृत्व के खिलाफ हाईकमान से मिलने गये हुये है तो उनको भाजपा के करीब व भाजपा के इशारे पर काम करता दिखाने के लिये ऐसीबी व एसओजी मे दो शिकायत देकर विभिन्न धाराओं सहित 124-A मे रपट दर्ज करवा कर दिल्ली गये विधायको को जयपुर आते ही गिरफ्तार होने का उनके मनो मे डर का माहोल पैदा करने मे कामयाब हो गये। मुख्यमंत्री के ओएसडी के नम्बर से पत्रकारों के पास एक ओडीयो क्लिप भी सरकुलेटिंग करने के बाद आम जनता मे सीधा संदेश जाने लगा कि सचिन पायलट भाजपा के साथ मिलकर सरकार गिराना चाहते है। बने इस तरह के वातावरण से सचिन पायलट को राजनीतिक तोर पर नुकसान होने के साथ साथ वो सदिग्ध भी बन गये तो मुख्यमंत्री गहलोत ने उस वातावरण का फायदा उठाते हुये हाईकमान के कुछ नेताओं को विश्वास मे लेकर सचिन पायलट को प्रदेश अध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री पद से हटाने मे कामयाब हो गये। पायलट व उनके दो समर्थक मंत्रियों की बरखास्तगी से एक दफा तो पायलट धरातल पर आ गये यानी गहलोत उन्हें कमजोर करने मे कामयाब हो गये। गहलोत ने पायलट को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर व सीनियर जाट नेताओं को दरकिनार करके कमजोर से कमजोर व जूनियर नेता गोविंद डोटासरा को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाकर एक तीर से अनेक शिकार एक साथ कर डाले।

    राजनीतिक हलको से मिल रही खबरो के मुताबिक राजस्थान कांग्रेस मे आये उभाल को लेकर हाईकमान द्वारा बनाई तीन सदस्यीय कमेटी को अपने रसूको के आधार से काफी हदतक मुख्यमंत्री ने इस बात के लिये तैयार कर लिया है कि सचिन पायलट को राष्ट्रीय संगठन मे पद देकर एक तरह से उसे राजस्थान की राजनीति से दूर कर पावरलेस कर दिया जाये। ताकि पायलट की लोबी प्रदेश मे फिर से खड़ी हो ना पाये। एक एक महीने तक बाड़ेबंदी मे साथ रहे विधायको व नेताओं से मिलने नव मनोनीत राष्ट्रीय महामंत्री अजय माकन का तीस अगस्त से पांच दिन प्रदेश मे आकर मिलने का प्रोग्राम बना है। पांच दिन कांग्रेस विधायको व नेताओं से माकन मिलकर एक रिपोर्ट तैयार करके फिर उसको ठण्डे बस्ते मे रख दिया जायेगा।

    कुल मिलाकर यह है कि पीछले दो-तीन महीने से राजस्थान कांग्रेस मे मुख्यमंत्री गहलोत व तत्तकालीन उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट धड़े के मध्य चले शह व मात के खेल मे मुख्यमंत्री ने सचिन पायलट की प्रदेशाध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री पद से छुट्टी करवा कर उन पर एक तरह से तरजीह हासिल कर ली है। इसके बाद अजय माकन को प्रभारी महासचिव बनवाने व तीन सदस्यीय कमेटी के गठन मे भी गहलोत का पलड़ा भारी होना माना जा रहा है। हां यह सच है कि पायलट की वापसी, प्रभारी महांमत्री मे बदलाव व तीन सदस्यीय कमेटी के गठन सहित बहुत कुछ होने के बावजूद गहलोत व पायलट मे आपसी टकराव आगे भी जारी रहेगा। एवं गहलोत सरकार पर तलवार बराबर लटकती रहेगी ओर मोका मिलते ही गहलोत सरकार गिरा दी जायेगी। वही अब सरकार मे गहलोत समर्थक विधायको की बल्ले बल्ले होकर वो अपने विधानसभा क्षेत्र के सर्वसर्वा रहेगे वही पायलट समर्थक विधायको की सरकार के हिसाब से चवनी घिसी नजर आयेगी।

  • AIMIM प्रतापगढ़ की टीम ने उत्तर प्रदेश मे तबलीगी जमात के खिलाफ दर्ज मुकदमे को वापस लेने के लिए मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

    आशिफ अली/मिल्लत टाइम्स,प्रतापगढ़( उत्तर प्रदेश )

    उत्तर प्रदेश प्रतापगढ़ ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रतापगढ़ की टीम ने माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा जिसमें यह मांग की गई कि महाराष्ट्र हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र में तबलीगी जमात के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने का आदेश किया है इसी तरह उत्तर प्रदेश में तबलीगी जमात के खिलाफ दर्ज मुकदमे भी वापस लिया जाए।

    इस मौके पर मौजूद रहे प्रदेश सचिव इसरार अहमद, जिला अध्यक्ष मोहम्मद सलीम अंसारी , एडवोकेट जफरुल हसन ,जिला सचिव इंजीनियर अब्दुल्लाह अंसारी ,नगर अध्यक्ष तौफीक अंसारी नगर युवा अध्यक्ष तफज्जुल हसन, नौशाद खान।

  • बिहार में राजनीतिक विकल्प क्यों लाखों लोग सम्मेलन में हुवे शामिल,देश में दो-पक्षीय प्रणाली का गठन किया जा रहा है सामंती और सांप्रदायिक राजनीति के विरोध में वैकल्पिक बिहार को ही देना होगा:एसडीपीआई

    प्रेस विज्ञप्ति 30 अगस्त, 2020
    देश की पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था को दो-पक्षीय व्यवस्था की ओर धकेल कर लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है और संघवाद को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं बिहार में भी केवल दो ही दल शासन कर रहे हैं। इस के साथ हीं जाति के नाम पर कुछ परिवारों ने बिहार को अपने कब्जे में ले लिया है। इसी कारण यहां विकास जैसी कोई चीज नहीं है। जहां एक फिल्म अभिनेत्री के गाल जैसा सड़क का जाल लगाने का दावा किया गया था वहीं बिहार की पूरी सड़क गड्ढों से भरी दिखती है, वहीं शिक्षा और रोजगार के मामले में बिहार सबसे निचले स्तर पर है। यह बात अतिथियों ने सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के आयोजित एक ऑनलाइन सम्मेलन में कही।

    इस अवसर पर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव तसलीम अहमद रहमानी और राष्ट्रीय उपाधयक्ष एडवोकेट शर्फुद्दीन ने बिहार की राजनीति को ब्लैमेलिंग की राजनीति का नाम देते हुए कहा कि बिहार में यादव मुस्लिम और यादव दलित और ओबीसी के नाम पर सांप्रदायिक ब्लैकमेलिंग की राजनीति होती रही है लेकिन वास्तव में तो राजनेताओं के पास बिहार के विकास के लिए कोई रोड मैप नहीं था। ना तो ये दलित, ओबीसी और मुसलमानों का कोई भला कर सकते हैं, इसलिए इस राजनीति के खिलाफ एक नया राजनीतिक विकल्प लाने की आवशयकता है, जो की सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के तौर पर उभर रही है। इस अवसर पर दलित कार्यकर्ता राज रतन अम्बेडकर ने कहा कि आजादी के बाद से लगभग 70% लोग विकास और बुनियादी मुद्दों की राजनीति का विकल्प तलाश रहे हैं। इसकी आवश्यकता केवल बिहार में हीं नहीं बल्कि पूरे देश में है जो बिहार से शुरू होनी चाहिए। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय महासचिव ने बिहार में कोरोना की उच्च संख्या पर कहा कि जो लोग कोरोना से मरते हैं, वे कोरोना के कारण नहीं मर रहे हैं, बल्कि राजनीति की कारण से मर रहे हैं क्योंकि राज्य की चिकित्सा प्रणाली 70 वर्षों में तय नहीं की जा सकी। उन्होंने कहा कि बाढ़ में जीवन और संपत्ति के नुकसान का असली कारण बाढ़ नहीं है, बल्कि राजनीति है जो बाढ़ को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा सकी।

    जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू यादव ने भी बिहार के दोनों क्षेत्रीय दलों को निहित स्वार्थ और पूर्ण विफलता बताया और कहा कि एक विकल्प आना चाहिए और कहा कि हमारे राजनीतिक बुद्धिजीवियों द्वारा किए गए प्रयास सराहनिय है, वक्ताओं ने कहा कि केवल बिहार ही देश में जाति और सामंती राजनीति और दो-पक्षीय राजनीति के खिलाफ विकल्प शुरू कर सकता है और बिहार को अब इसके लिए कदम उठाने चाहिए। सम्मेलन में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया बिहार के प्रदेश अध्यक्ष नसीम अख्तर साहब ने भी सभा को संबोधित किया
    इस ऑनलाइन सम्मेलन में फेसबुक और यूट्यूब पर लाखों की संख्या में लोगों ने भाग लिया

  • लुधियाना जामा मजिस्द में यौमे आशूरा अवसर पर ऑनलाइन कांफ्रेंस का आयोजन

    हजरत इमाम हुसैन की शहादत को हमेशा याद रखा जाएगा-शाही इमाम पंजाब

    लुधियाना 30 अगस्त (मेराज़ आलम ब्यूरो रिपोर्ट) कोविड-19 के मद्देनजर आज यहां एतिहासिक जामा मजिस्द में यौमे आशूरा के अवसर पर हजरत इमाम हुसैन रजि. अल्लाह अनहू की याद में ऑन लाइन शहीद ऐ करबला कांफ्रेंस का आयोजन मजलिस अहरार इस्लाम द्वारा किया गया। जिसकी प्रधानगी शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने की। इस अवसर पर पावन कुरान शरीफ की तलावत कारी मुहम्मद मुहतरम द्वारा की गई और प्रसिद्व शायर गुलाम हसन कैसर,कारी मुहम्मद मुस्तकीम करीमी ने नातिया कलाम पेश किया।

    कांफ्रेंस को सम्बोधित करते हुए मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने कहा कि आज का दिन विश्व के एतिहास मेें बहुत विशेष है,इस दिन अल्लाह ताआला ने बड़ी रहमत व बरकत वाला बताया है और इस्लाम धर्म में मुहर्रम की 9 व 10 तारीख को रोजा रखने को कहा गया है। शाही इमाम ने कहा कि आज से 1400 वर्ष पहले आज के दिन करबला के मैदान में पैंगबर इस्लाम हजरत मुहम्मद सलल्लाहु अलैही वस्लम के नवासे हजरत इमाम हुसैन रजि. अल्लाह अनहू ने अपने पूरे परिवार व साथियों के साथ वक्त के जालिम हुक्मरानो के खिलाफ सच्चाई की आवाज बुलंद करने के कारण शहीद कर दिए गए। उन्होंने कहा कि विश्व भर में सरकारों के खिलाफ सच्चाई की आवाज उठाने का पहला संदेश मैदान ए करबला से हजरत इमाम हुसैन रजि. अल्लाह अनहू ने दिया,जो कि हमेशा याद रखा जाएगा। शाही इमाम ने कहा कि इस शहादत को कभी भुलाया नही जा सकता और जो कौमे अपने शहीदो को भूल जाती है,उनका वजूद खत्म हो जाता है। शाही इमाम ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने उस समय के जालिम बादशाह से कौम व धर्म को बचाने के लिए कुर्बानी दीं थी। शाही इमाम ने कहा कि यौमे आशूरा के दिन ही अल्लाह पाक ने
    जमीन,आसमान,हवा,पानी,इंसान व हर चीज को बनाया और 10 मुहर्रम यौमे आशूरा के दिन ही कयामत आएगी। शाही इमाम ने कहा कि आज के दिन हमे अपने घर वालो पर दिल खोल कर खर्च करना चाहिए और इस दिन गरीबो की मदद करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई भी मुसलमान किसी यतीम को खाना खिलाता है,अच्छे कपड़े पहनाता है और बाद में उस यतीम के सिर पर प्यार से हाथ फेरता है और जितने वाल उसके हाथों के नीचे से निकलेगे,अल्लाह पाक उसको हर वाल के बदले में नेकियां देते है। कांफ्रेंस को सम्बोधित करते हुए नायब शाही इमाम मौलाना मुहम्मद रहमानी लुधियानवी ने मैदाने करबला का किस्सा बयान करते हुए हजरत इमाम हुसैन रजि. अल्लाह अनहू की बहादुरी की दास्तान बयां की। उन्होंने कहा कि कयामत तक आने वाले लोगो के लिए करबला का मैदान सच्चाई व इमानदारी देने का संदेश देता रहेगा।

    जामा मजिस्द लुधियाना में ऑनलाइन शहीद ए करबला कांफ्रेंस को सम्बोधित करते हुए शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी के साथ गुलाम हसन कैसर,मौलाना मुहम्मद उस्मान रहमानी।

  • SC का देशभर में मुहर्रम की इजाज़त देने से इंकार, कहा – कोरोना फैलाने के लिए विशेष समुदाय को बनाया जाएगा

    मुजफ्फर आलम/मिल्लत टाइम्स
    नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में मुहर्रम के मौके पर जुलूस निकालने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है. गुरुवार को इस संबंध में याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अगर मुहर्रम के मौके पर ताजिया का जुलूस निकालने की अनुमति दी गई तो इसके बाद कोरोना फैलाने के लिए *एक समुदाय विशेष को निशाना बनाया जाएगा.*

    प्रमुख न्यायाधीश एसए बोबडे की बेंच ने कहा, ‘अगर हम देश में जुलुसू निकालने की अनुमति दे देते हैं तो अराजकता फैल जाएगी ओर एक समुदाय विशेष पर कोविड-19 महामारी फैलाने के आरोप लगने लगेंगे.’ बता दें कि उत्तर प्रदेश के *याचिकाकर्ता सैयद कल्बे जवाद* ने सुप्रीम कोर्ट में देशभर में मुहर्रम के जुलूस को अनुमति देने की मांग के साथ याचिका दाखिल की थी. इसमें पुरी में *जगन्नाथ मंदिर की रथयात्रा* के मामले का हवाला दिया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी थी.

    याचिका पर CJI ने कहा, ‘आप (याचिकाकर्ता) पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा की बात कर रहे हैं, वो *एक जगह और एक निश्चित रूट* की बात थी. उस मामले में हम यह तय कर सकते थे कि जोखिम कितना है, जिस हिसाब से हमने आदेश दिया था.’

    इसके बाद याचिकाकर्ता ने *लखनऊ में ताजिया के जुलूस की अनुमति मांगी* क्योंकि वहां शिया समुदाय के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं. इसपर कोर्ट ने कहा कि वो अपनी याचिका *इलाहाबाद हाईकोर्ट* लेकर जाएं.

  • कौन हैं ज़फ़र इस्लाम जो बनेगें बीजेपी के सातवें मुस्लिम सांसद,जानिए बीजेपी से और कौन रह चुके मुस्लिम सांसद।

    मुजफ्फर आलम/मिल्लत टाइम्स
    नई दिल्ली: अमर सिंह के निधन के बाद खाली हुई उत्तर पदेश से राज्यसभा सीट के लिए बीजेपी ने पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद ज़फ़र इस्लाम को उम्मीदवार बनाया है। जफर इस्लाम मीडिया के लिए जाना पहचाना चेहरा हैं. टीवी चैनलों पर डिबेट में वह हर रोज बीजेपी का बचाव करते हैं. राजनीति में आने से पहले जफर इस्लाम एक विदेशी बैंक के लिए काम करते थे। अगर ज़फ़र इस्लाम चुने गए तो वो बीजेपी के इतिहास में वह सातवें मुस्लिम सांसद होंगे।

    माना जाता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जफर इस्लाम के अच्छे ताल्लुकात हैं. शायद यही वजह है कि मृदुभाषी और बेहद शालीन व्यक्तित्व के धनी जफर इस्लाम को बीजेपी हाईकमान ने मध्य प्रदेश में ‘ऑपरेशन लोटस’ चलाने की जिम्मेदारी दी थी। मध्य प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को अस्थिर करने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को बीजेपी में लाने में इस्लाम की प्रमुख भूमिका थी. सिंधिया को बीजेपी तक लाने और फिर गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाने वाले जफर इस्लाम हैं।

    ज़फ़र इस्लाम से पहले बीजेपी के इतिहास में छह ही मुस्लिम सांसद हुए हैं- मुख्तार अब्बास नक़वी, शहनवाज़ हुसैन, सिकंदर बख्त (राज्यसभा) और आरिफ बेग, एमजे अकबर और नज़मा हेपतुल्ला. सैय्यद ज़फ़र इस्लाम सातवें मुस्लिम सांसद होंगे। मौजूदा हालात में मुख्तार अब्बास नक़वी के बाद बीजेपी के दूसरे मुस्लिम सांसद होंगे सैयद ज़फ़र इस्लाम. बीजेपी के टिकट पर तीन ही मुस्लिम सांसद लोकसभा चुनाव जीते हैं- मुख्तार अब्बास नकवी, शहनवाज़ हुसैन और आरिफ़ बेग।

    डॉ. सैयद ज़फ़र इस्लाम झारखंड के रहने वाले हैं और मुंबई में सक्रिय रहे हैं. वो बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं. वो बीजेपी के मुखर, उदारवादी और कॉर्पोरेट घरानों से रिश्ता रखने वाला मुस्लिम चेहरा हैं। पार्टी संगठन में पिछले 7 साल से काम कर रहे हैं. उससे पहले वे 2014 लोकसभा चुनावों के दौरान नरेंद्र मोदी की रणनीतिक टीम में थे। वैसे ज़फ़र इस्लाम प्रोफेशनल इंवेस्टमेंट बैंकर रहे हैं. उनकी आर्थिक मामलों पर पकड़ मानी जाती है, राजनीति में आने से पहले वे डॉइच बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर भी थे. फिलहाल वो एयर इंडिया के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक भी हैं।