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  • मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर अधिवक्ता सुशील कुमार ने सीजेएम कोर्ट में किया परिवाद दायर

    मिल्लत टाइम्स, पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में परिवाद दायर हुआ है. साथ ही नगर आवास मंत्री सुरेश शर्मा और जिले के तीन वरीय अधिकारियों पर भी केस दर्ज कराया गया है. कोर्ट ने इस परिवाद मुकदमे को स्वीकार भी कर लिया है.

    घंटों जाम में फंसे रहे अधिवक्ता सुशील कुमार सिंह ने यह परिवाद पत्र दायर किया है. अब मामले की सुनवाई 18 दिसंबर को होगी. अधिवक्ता ने बताया कि 14 दिसंबर को वे अपनी मोटरसाइकिल से अपने घर अघोरिया बाजार से सुबह करीब 10 बजे कचहरी के लिए निकले थे.

    उन्होंने बताया कि सुबह 10 बजे से करीब 12:30 बजे बजे तक वे जाम में फंसे रहे. समय की बर्बादी एवं अपने मुवक्किल का कार्य बाधित होने से वे तनावग्रस्त हो गए और मूर्छित होकर गिर पड़े. कारण वो अपने मुवक्किल की पैरवी में विलंब हो गए.

  • राफेल पर सरकार के खिलाफ लाउंगा विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव’संसद ही नहीं सुप्रीम कोर्ट को भी किया गुमराह: संजय सिंह

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: संजय सिंह ने राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर केंद्र सरकार पर सुप्रीम कोर्ट में CAG व PAC से संबंधित गलत जानकारी देकर संसद की अवमानना करने का आरोप लगाया है.

    ‘राफेल पर केंद्र के खिलाफ लाउंगा विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव’

    ( सभापति को दिया गया पत्र )
    आम आदमी पार्टी के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने राफेल मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखा है. सिंह ने इस पत्र में अटॉर्नी जनरल को संसद में बुलाए जाने की मांग की है ताकि उनसे इस पूरे मामले में सफाई मांगी जाए. आप सांसद ने कहा कि राफेल मामले में सरकार ने सिर्फ संसद ही नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट को भी गुमराह करने का प्रयास किया है.

    संजय सिंह ने पत्र में केंद्र सरकार पर सुप्रीम कोर्ट में CAG व PAC से संबंधित गलत जानकारी देकर संसद की अवमानना करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि केंद्र नो सर्वोच्च संस्थाओं को अंधेरे में रखा है. सिंह ने कहा कि सदन में विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाउंगा.

    संजय सिंह ने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट को ग्रामर सिखा रही है. जब सीएजी की कोई जांच रिपोर्ट आई ही नहीं तो सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कैसे कहा कि ऐसी कोई जांच रिपोर्ट है. सरकार के अटॉर्नी जनरल ने भी सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि सील बंद लिफाफे में जो कुछ भी दिया गया वह उन्होंने नहीं पढ़ा है तो अब उन्होंने करेक्शन का हलफनामा कैसे दिया? उन्हें वह सीलबंद रिपोर्ट कहां से मिली?

    आप सांसद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में जिक्र है कि एयरफोर्स प्रमुख ने कीमतों के खुलासे पर आपत्ति की थी. एयरफोर्स चीफ ने यह बयान कब दिया या ऐसा कोई एफिडेविट कब दिया था? नए एफिडेविट में भी सरकार कह रही है कि सीएजी को कीमतों के बारे में जानकारी दे दी गई है लेकिन सीएजी की रिपोर्ट तो जनवरी के बाद आएगी.

    उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के हलफनामे के मुताबिक यह माना कि सीएजी और पीएसी कीमतों को लेकर पहले ही जांच कर रही है. शायद इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने राफेल घोटाले में जांच के आदेश नहीं दिए. अगर कोर्ट को यह पता होता कि ऐसी कोई जांच नहीं हुई है तो शायद इस मामले में जांच के आदेश दिए जाते.

    संजय सिंह ने कहा कि हमने राज्य सभा चेयरमैन को चिट्ठी लिखकर मांग की है कि अटार्नी जनरल को संसद में बुलाया जाए और उनसे इस पूरे मामले में सफाई मांगी जाए. सरकार ने सिर्फ संसद ही नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट को भी गुमराह करने का प्रयास किया है.

    इससे पहले राफेल पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आप सांसद संजय सिंह ने मामले में जेपीसी जांच की मांग की. उन्होंने कहा क‍ि सरकार कभी ये मानने को तैयार नहीं है क‍ि उसने भ्रष्टाचार क‍िया है. बेहतर होता क‍ि सुप्रीम कोर्ट क‍िसी जांच एजेंसी से इस मामले की जांच कराती ज‍िससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता.

    सिब्बल ने भी लगाए आरोप
    राफेल पर शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिब्बल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने राफेल के मामले में गलत जानकारी दी है. हम चाहते हैं कि पीएसी (लोक लेखा समिति) में अटॉर्नी जनरल को बुलाया जाना चाहिए, जिससे यह साफ हो सके कि एफिडेविट क्यों जमा कराए गए, जिसका वास्तव में कोई जिक्र नहीं है. यह बेहद संवेदनशील मामला है, जिस पर संसद में भी चर्चा होनी चाहिए.

    उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले में हमेशा स्पष्ट रही है कि इस मामले के लिए सुप्रीम कोर्ट सही जगह नहीं है, यहां पर हर तरह की फाइल का खुलासा नहीं किया जा सकता. यह सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में भी नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट के हर फैसले में प्रेस रिपोर्ट और सरकार के हलफनामे का हवाला दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि अनुच्छेद 32 के तहत कोर्ट के न्यायाधिकार के कारण वो फैसला नहीं कर सकते.

    आज तक इनपुट के साथ

  • साल 2018 में अब तक रिलीज हुईं 112 हिन्दी फिल्में,आखिरी बड़ी फिल्में होंगी जीरो और सिम्बा

    बॉलीवुड डेस्क. 2018 फिल्मों के लिहाज से बॉलीवुड के लिए बेहतर रहा। हर महीने कोई न कोई 100 करोड़ी फिल्म रिलीज हुई। जिसे दर्शकों ने बेहद पसंद किया। कुल मिलाकर साल के 12 महीनों में कुल 112 हिन्दी फिल्में रिलीज हो चुकी हैं। सिर्फ जीरो और सिम्बा का इंतजार है। जो साल की बड़ी रिलीज के तौर पर देखी जा रही हैं।

    साल 2018 की रिलीज मूवीज
    जनवरी में आईं ये फिल्में
    साल की शुरुअाती महीने में करीब 8 फिल्में रिलीज हुईं। जिनमें 1921, कलाकंदी, मुक्केबाज, माय बर्थडे सॉन्ग, वोदका डायरीज, निर्दोष, यूनियर लीडर और पद्मावत का नाम शामिल रहा।

    फरवरी में रिलीज हुईं मूवीज
    साल के दूसरे महीने में वो इंडिया का शेक्सपीयर, पैडमेन, लव पर स्क्वेयर फुट, अय्यारी, कुछ भीगे अल्फाज, जाने क्यूं दे यारों, सोनू के टीटू की स्वीटी, वेलकम टू न्यूयॉर्क रिलीज हुईं।

    मार्च में रहा इनका जलवा
    तीसरे महीने में अनुष्का शर्मा की परी, वीरे की वेडिंग, बिल्लू उस्ताद, हेट स्टोरी-4, दिल जंगली, 3 स्टोरीज, नोट पे चोट एट 8/11, रेड, राजा अब्रॉडिया, हिचकी, परेशान परिंदा, बा बा ब्लैकशिप, शादी तेरी बजाएंगे हम बैंड, बागी 2 फिल्मों का जलवा बॉक्स ऑफिस पर रहा।

    अप्रैल में आईं ये मूवीज
    2018 का चौथा महीना ब्लैकमेल, मिसिंग, ऑक्टोबर, मर्करी, जू, बियॉन्ड द क्लाउड्स, नानू की जानू, दास देव, इश्क तेरा, अवर हीरोज के नाम रहा। हालांकि आईपीएल सीजन के कारण इस महीने में फिल्मों को उतने दर्शक नहीं मिले और न ही किसी बड़े स्टार की फिल्म रिलीज हुई।

    मई में फिल्मों का अलग रंग
    करीब 27 साल बाद साथ आए बिगबी और चिंटू जी की फिल्म 102 नॉट आउट सबसे पहले रिलीज हुई। इसके बाद ओमेर्टा, राजी, द पास्ट, होप और हम, फालूदा, भूतवाली लव स्टोरी, हाई जैक, खजूर पे अटके, परमाणु : द स्टोरी ऑफ पोखरण, वन नाइट आउट और बाइस्कोपवाला जैसी अलग-अलग अंदाज की फिल्में देखने मिलीं।

    जून में हुई बम्पर कमाई
    महीने की शुरुआत ही करीना की फिल्म वीरे दी वेडिंग से हुई। बाद में भावेश जोशी सुपरहीरो, फेमस, रेस 3 जयादा कमाल नहीं कर पाईं। हालांकि विवादों के कारण सुर्खियों में रही संजय दत्त की बायोपिक संजू ने कमाई के नए रिकॉर्ड्स बनाए।

    जुलाई रिलीज मूवीज की लिस्ट
    साल की तीसरी तिमाही के शुरुआती महीने में में सूरमा, व्हेन ओबामा लव्ड ओसामा, धड़क, एकता, साहेब बीवी और गैंग्स्टर 3, नवाबजादे जैसी फिल्में रिलीज हुईं। हालांकि इनका कोई खास जादू नहीं चला। धड़क से जरूर बॉलीवुड स्टार किड जाह्नवी ने डेब्यू किया।

    अगस्त में आईं जानदार फिल्में
    फन्ने खां से महीने की शुरुआत हुई। बाद में मुल्क, ब्रज मोहन अमर रहे, लक्ष्मी एंड टिकली बॉम्ब, कारवां, गोल्ड, सत्यमेव जयते, हैप्पी फिर भाग जाएगी, जीनियस, यमला पगला दीवाना फिर से और स्त्री ने लोगों को मल्टीप्लैक्सेस तक आने मजबूर कर दिया ।

    सितम्बर रहा इन फिल्मों के नाम
    जेपी दत्ता की फिल्म पलटन, लैला मजनूं, गली गुलियां, हल्का, मनमर्जियां, लव सोनिया, टर्निंग पॉइंट, बाजरा वर्सेस बर्गर, 22 डेज, मित्रों, बत्ती गुल मीटर चालू, मंटो, इश्केरिया, सुई धागा और पटाखा ने एक अलग ही अंदाज दिखाया।

    अक्टूबर रहा अविश्वसनीय
    सलमान के जीजा आयुष की फिल्म लवयात्री से मंथ शुरू हुआ। इसके बाद अंधाधुन, जलेबी, हेलीकॉप्टर ईला, माल रोड दिल्ली, फ्राय डे, तुम्बाड, नमस्ते इंग्लैंड, बधाई हो, बाजार, 5 वेडिंग्स, काशी इन सर्च ऑफ गंगा, दशहरा, द जर्नी ऑफ कर्मा जैसी फिल्में आईं। जिनमें बधाई हो उम्मीद से कहीं ज्यादा सफल रही।

    नवम्बर ने किया निराश
    नवम्बर में लुप्त, जैक एंड दिल, मौसम इकरार के दो पल प्यार के, ठग्स ऑफ हिन्दोस्तान, मोहल्ला अस्सी, पिहू, होटल मिलन, भैयाजी सुपरहिट, राजमा चावल ने सिल्वर स्क्रीन पर दस्तक दी। सबसे ज्यादा निराशा हाथ लगी ठग्स ऑफ हिन्दोस्तान के कारण हालांकि ओपनिंग डे रिकॉर्ड बनाने में फिल्म कामयाब रही।

    दिसम्बर में अब तक और आगे
    दिसम्बर की शुरुआत केदारनाथ से हुई। अभी तक पीके लेले अ सेल्समैन रिलीज हो चुकी हैं। साल के आखिरी हफ्ते में जीरो 21 दिसम्बर और सिम्बा 28 दिसम्बर को रिलीज होने जा रही हैं। देखने वाली बात होगी साल की आखिरी दो फिल्में क्या कमाल करती हैं और कितने रिकॉर्ड्स बनाती हैं।

  • असम:बदरुद्दीन अजमल की पार्टी AIUDF को हराने में नाकाम रही थी भाजपा

    लोकसभा चुनाव की सीरीज़ में हम आज बात करने जा रहे हैं असं की लोकसभा सीट करीमगंज के बारे में. ये सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. इस सीट से फिलहाल आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट(AIUDF) के राधेश्याम बिस्वास सांसद हैं.आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट मौलाना बदरुद्दीन अजमल की पार्टी है. ये असम में काफ़ी प्रभावी पार्टी है.

    2014 में हुए लोकसभा चुनाव में जहाँ भाजपा के पक्ष में “मोदी लहर” चली वहीँ असम की इस सीट पर किसी लहर का कोई स्कोप ना रहा. आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के उमीदवार ने यहाँ भाजपा के कृष्णा दाल को 102,094 वोटों से हराया. इससे पहले यहाँ से कांग्रेस के ललित मोहन शुक्लावैद्य सांसद थे जो इस बार के चुनाव में तीसरे स्थान पर खिसक गए. 2014 के चुनाव को छोड़ दें तो यहाँ से कांग्रेस के ही सांसद अक्सर जीत के आये हैं, बस 2 बार भाजपा और एक बार कांग्रेस (सोशलिस्ट) यहाँ से चुनाव जीती है.

    क्या है अभी की स्थिति?
    मौजूदा स्थिति की बात करें तो करीमगंज लोकसभा सीट में कुल 8 विधानसभा सीटें हैं. 2016 में असम में जहाँ भाजपा सरकार बनी वहीँ यहाँ की 8 में से महज़ 2 ही वो जीत सकी और दो सीटें कांग्रेस के हाथ लगीं लेकिन AIUDF के 4 विधायक यहाँ से चुन कर आये हैं. पिछले एक-डेढ़ साल में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी ने अपनी स्थिति में और सुधार किया है. क्षेत्रीय जानकार भी मानते हैं कि असम में जनता भाजपा के काम से बहुत ख़ुश नहीं है, ऐसे में इसका फ़ायदा भी AIUDF को मिल सकता है

  • मानवाधिकार संगठन एन.सी.एच.आर.ओ की टीम ने किया बुलंदशर का दौरा

    मिल्लत टाइम्स,बुलंदशहर:मानवाधिकार संगठन एन.सी.एच.आर.ओ. की एक टीम ने आज बुलंदशहर का दौरा किया और सम्बंधित सभी पक्षों से बातचीत की। सभी पक्षों से बातचीत और घटनास्थल का दौरा करने के बाद जारी प्रेस वक्तव्य में टीम ने बुलन्दशहर की घटना को पूर्वनियोजित होने की तरफ इशारा किया है।

    फैक्ट फाइडिंग टीम आज सुबह वरिष्ठ पत्रकार किरण शाहीन के नेतृत्व में बुलंदशहर घटना की जांच करने के लिए दिल्ली से रवाना हुई। टीम के सदस्यों में एआईपीएफ के मनोज कुमार, एनसीएचआरओ के एडवोकेट अन्सार इंदौरी, दिल्ली विश्वविधलय की प्रोफेसर भावना बेदी, सामाजिक कार्यकर्ता अज़ीम नावेद और आरटीएफ की आयशा शामिल थी।

    टीम की सदस्या और वरिष्ठ पत्रकार *किरण शाहीन* ने बताया की योगेश राज द्वारा लिखाई गई एफआईआर में सुदेफ़ चौधरी, इलियास, शराफत, अनस, साजिद, परवेज़ और सरफुद्दीन निवासी नया वास थाना स्याना, जिला बुलंदशहर गायों को काट रहे थे। जो उन्हें देख और उनके शोर मचाने से मौके से भाग गये। तहरीर के मुताबिक योगेशराज तथा अभियुक्तगण एक ही गांव के रहने वाले हैं। फिर भी तहरीर में 12 साल से कम उम्र के अनस और साजिद का नाम शामिल हो गया। अभी पुलिस ने जो लोग गौकशी के नाम पर पकड़ें है उनमे कुछ युवक सालों पहले गांव छोड़ कर जा चुके हैं।

    टीम के सदस्य और संगठन के सचिव *एड्वोकेट अन्सार इन्दौरी* ने कहा की घटना के समय प्रशासन की मौजूदगी में इतनी बड़ी घटना का हो जाना ये साबित करता है कि इस घटना की साजिश पहले से रची जा रही थी। समय रहते पुलिस और प्रशासन ने सही कदम उठाया अगर प्रशासन सही कार्यवाही नहीं करता तो इससे भी बड़ा हादसा हो सकता था। उपद्रव के दौरान खुलेआम भीड़ के हाथो एक पुलिस अधिकारी का मारा जाना भीड़ द्वारा हत्या की नई घटना नहीं है।

    टीम की सदस्या और दिल्ली विश्वविद्यालय की *प्रोफेसर भावना बेदी* ने कहा की कि संघी कार्यकर्ताओ के षडयंत्र को नाकाम करने में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार को अपनी जान गंवानी पड़ी।इन हिंदूवादी संगठनों के निशाने पर मुस्लिमो के साथ साथ हिन्दू भी थे।

    टीम के सदस्य और एआईपीएफ के *मनोज सिंह* के अनुसार 3 दिसंबर की घटना बुलंदशहर के इस शांत इलाक़े में संघ-बीजेपी से जुड़े संगठनों द्वारा बर्चस्व बढ़ाने और मुस्लिम समुदाय में डर का माहौल बनाने की साज़िश है। जानकारी के अनुसार स्थानीय स्तर पर दोनों समुदायों के कुछ व्यक्तियों और समुदायों के बीच के छोटे झगड़ों को बहाना बना, इलाक़े को सांप्रदायिक आग में झोंकने की साज़िश रची गयी, जिसमें स्पष्ट तौर पर राजनैतिक संरक्षण दिखता है। इस घटना द्वारा सीधा प्रशासन से टकराव कर एक खास समुदाय के अंदर से कानून और प्रशासन के प्रति अविश्वास का भाव फैलाकर प्रशासन के ईमानदार हिस्से को हतोत्साहित करने की साज़िश दिखती है।

    टीम के सदस्या और राइट टू फ़ूड कैंपेन की *आयशा* ने बताया की जिस तरह इंस्पेक्टर सुबोध कुमार को मारते हुए वीडियो बनाया गया है उससे साफ है कि इस भीड़ को योगी-मोदी सरकार का राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है। इनका मनोबल आज इतना बढ़ गया है कि ये पुलिस को भी सरेआम दौड़ा कर उनकी हत्या कर रहे हैं’। आज के माहौल में आम व्यक्ति और जनता की रक्षक कही जाने वाली पुलिस, कोई भी सुरक्षित नहीं है। इस घटना के बाद उन हज़ारों बच्चों का भविष्य भी दांव पर है जिनके माता-पिता ने उन्हें इस हिंसा के बाद से स्कूल जाने से रोक लिया है। घटनास्थल पर गाय कटने का कोई चिन्ह न मिलना, आसपास के विद्यालयों की समय से पहले छुट्टी कर देना इत्यादि से साफ़ ज़ाहिर है कि इस हिंसा और इंस्पेक्टर सुबोध की हत्या सोची समझी साज़िश को अंजाम देकर मुस्लिम समुदाय में डर का माहौल बनाना है।

    संगठन जल्द ही पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट दिल्ली में जारी करेगा।

  • कलाम को सलाम,जिसने भारत को बनाया दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश’पुरी दुनिया डरती है अब भारत से

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:अब मिसाइल के मामले में रूस और अमेरिका भी भारत से पीछे हो गए हैं। कलाम साहब का सपना पूरा करते हुए भारत ने हाइपरसोनिक मिसाइल बना ली है। 3457 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हमला बोलने वाली ये मिसाइल अब तक भारत की सबसे एडवांस्ड मिसाइल है।

    करीब 300 किलोमीटर दूर लक्ष्य को भेद पाने में सफल इस हाइपरसोनिक मिसाइल को रोकना पाकिस्तान तो दूर चीन के बस की बात भी नहीं है। यह मिसाइल इतनी सटीक है कि 300 किलोमीटर दूर चलते फिरते टारगेट को भी आसानी से भेद सकती है। और तो और यदि टारगेट अपना रास्ता बदल ले तो मेनुवरेबल तकनीक के जरिए यह भी अपना रास्ता बदलकर उसके पीछे चल पड़ती है। शायद इसी कारण भारतीय वैज्ञानिकों ने इसे ‘बटन दबाओ और भूल जाओ’ वाली मिसाइल कहा था।

    ब्रह्मोस मिसाइल देश की सबसे मॉर्डन और दुनिया की सबसे तेज हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल है। दुनिया का कोई भी एंटी मिसाइल सिस्टम फिलहाल ब्रह्मोस को रोकने में नाकाम साबित होगा। दरअसल, इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी रफ्तार है। अभी तक अमेरिका की टॉम हॉक मिसाइल को दुनिया की सबसे ताकतवर क्रूज मिसाइल माना जाता था, लेकिन ब्रह्मोस ने उसे भी पछाड़ दिया है। एक बार टारगेट पर लॉक होने के बाद ये चंद सेकेंड में अपने टारगेट को उड़ा देती है। मौजूदा वक्त में दुनिया के किसी भी देश के पास इसे रोकने वाला कोई भी हथियार मौजूद नहीं है। दुश्मन को पता चलने से पहले ही ये मिसाइल अपने टारगेट को उड़ा देती है।

    डोकलाम विवाद के वक्त जब खबरें आई थी कि भारत अरुणाचल सीमा पर ब्रह्मोस तैनात करने जा रहा है, तब चीनी सेना ने माना था कि ब्रह्मोस की तैनाती के बाद चीन के युन्नान प्रांत पर खतरा मंडराने लगा है। चीन पाकिस्तान में ब्रह्मोस को लेकर घबराहट की एक और वजह है। चिंता का दूसरा बड़ा कारण यह है कि ब्रह्मोस को जमीन, पानी और आसमान से फायर किया जा सकता है। फिलहाल भारतीय सेना ब्रह्मोस से लैस है और नौसेना और वायुसेना भी जल्द ब्रह्मोस से लैस होने वाली है। ब्रह्मोस को पनडुब्बी और वारशिप से दागने के सफल परीक्षण किए जा चुके हैं। एयरफोर्स के सुखोई विमान ने भी दिसंबर के अंतिम दिनों में सुपरसॉनिक ब्रह्मोस का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था। इस उड़ान के साथ ही भारतीय वायुसेना दुनिया की पहली ऐसी एयरफोर्स बन गई है, जिसके जंगी बेड़े में सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल शामिल हो गई है।

    आपको बता दें कि ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण ब्रह्मोस कॉरपोरेशन ने किया है जो भारत के DRDO और रूस के एनपीओ मशीनोस्त्रोयेनिशिया का ज्वॉइंट वेंचर है। ब्रह्मोस नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा नदी पर रखा गया है। रूस इस परियोजना में लॉन्चिंग तकनीक उपलब्ध करवा रहा है। इसके अलावा उड़ान के दौरान मार्गदर्शन करने की क्षमता भारत के द्वारा विकसित की गई है।

  • तेलंगाना में चंद्रशेखर राव ने अली को सौंपा गृह मंत्रालय,पिछली सरकार मे बनाया था उपमुख्यमंत्री

    हैदराबाद: तेलंगाना के मुख्यमंत्री और तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के अध्यक्ष चंद्रशेखर राव ने मोहम्मद महमूद अली को एक बार फिर अपने कैबिनेट में शामिल कर लिया है, उन्हें गृह मंत्री बनाकर उनकी वफादारी के लिए पुरस्कृत किया है.

    गुरुवार की रात मुख्यमंत्री कार्यालय के एक बयान के मुताबिक, केसीआर ने उन्हें होम पोर्टफोलियो आवंटित किया है. अली केसीआर के पिछले कैबिनेट में राजस्व मंत्रालय देख रहे थे.

    हालांकि अभी ये बात साफ़ नही हो पाई है कि क्या अली अब इस नई सरकार में उपमुख्यमंत्री रहेंगे या नही.

    गृहमंत्रालय किसी भी राज्य के लिये बहुत ही अहम् मंत्रालय माना जाता है, टीआरएस सरकार की पिछली अवधि के समय नयन नारसिम्हा रेड्डी गृहमंत्री थे.

    66 वर्षीय मोहम्मद महमूद अली 2001 से तेलंगाना की माँगों पर चन्द्रशेखर राव के आंदोलन में साथ रहे थे, इसी कारण से चन्द्रशेखर राव उनकी वफादारी के बदले उन्हें पुरुस्कृत करते रहते हैं.

    चन्द्रशेखर राव ने अपनी पिछली सरकार में एक मुस्लिम चेहरे के रूप में मोहम्मद महमूद अली को राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाया था, वहीं इनके अलावा एक दलित नेता को भी अपना उपमुख्यमंत्री बनाया गया था.

    टीआरएस के नेताओं का कहना है कि कैबिनेट में दूसरों को शामिल करने से पहले केसीआर ने अली को मुस्लिम समुदाय से जोड़ रहे महत्व को रेखांकित किया है.

  • CM नीतीश पर लगा है कांग्रेसी कार्यकर्ता सिताराम की हत्या का आरोप,जनवरी मे होगी अगली सुनवाई

    मिल्लत टाइम्स, पटना: हत्या के एक मामले में फंसे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को आज पटना हाईकोर्ट में देश के दिग्गज वकीलों की फौज उतारनी पड़ी. नीतीश कुमार ने देश के जाने माने क्रिमिनल वकील सुरेंद्र सिंह को जबलपुर हाईकोर्ट से बुलाकर पटना में खड़ा किया. सुप्रीम कोर्ट के वकील गोपाल सिंह समेत आधा दर्जन बड़े वकील आज पटना हाईकोर्ट में खड़े होकर नीतीश कुमार को मर्डर केस से राहत देने की दलील पेश करने में लगे रहे.

    क्या है नीतीश कुमार के खिलाफ मामला
    मामला 27 साल पुराना है. 1991 में बाढ़ संसदीय क्षेत्र में हो रहे चुनाव में नीतीश कुमार उम्मीदवार थे. 16 नवंबर 1991 को मतदान के दौरान पंडारक थाने के ढ़ीबर गांव में बूथ पर फायरिंग हुई जिसमें कांग्रेसी कार्यकर्ता सीताराम सिंह का मर्डर हो गया. पुलिस ने मामले की जांच कर फाइनल रिपोर्ट सौंप दी, जिसमें नीतीश कुमार का नाम नहीं था. लेकिन इस घटना में FIR कराने वाले अशोक सिंह ने कोर्ट में परिवाद दायर किया और नीतीश कुमार पर रायफल से गोली चलाकर सीताराम सिंह की हत्या करने का आरोप लगाया. 31 अगस्त 2010 को बाढ़ कोर्ट ने दो गवाहों का बयान सुनने के बाद नीतीश कुमार को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश जारी कर दिया. नीतीश कुमार को 9 सितंबर 2010 को कोर्ट में हाजिर होने को कहा गया था. बाढ़ कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ नीतीश कुमार पटना हाईकोर्ट चले गये. हाईकोर्ट ने बाढ़ कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी. मामले पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है और आज उसकी तारीख थी.

    नीतीश ने उतारी वकीलों की फौज

    पटना हाईकोर्ट में आज जस्टिस ए. अमानुल्लाह की कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान नीतीश कुमार का पक्ष रखने के लिए देश भर के दिग्गज वकीलों को बुलाया गया था. देश के जाने माने वकील सुरेंद्र सिंह खास तौर पर जबलपुर हाई कोर्ट से पटना बुलाया गये थे. सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता गोपाल सिंह को भी नीतीश कुमार का पक्ष रखने के लिए लाया गया था. उनके साथ अधिवक्ता भास्कर शंकर, मनिंदर सिंह, राकेश सिंह समेत आधा दर्जन वकील बिहार के मुख्यमंत्री को मर्डर केस से राहत दिलाने के लिए दलीलों के साथ तैयार थे. सुरेंद्र सिंह ने कोर्ट में कहा कि एक ऐसे व्यक्ति ने मर्डर केस में नीतीश कुमार के खिलाफ शिकायत की है जिसका केस से कोई लेना देना नहीं है. उस शिकायत के आधार पर बाढ़ के ACJM ने अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर नीतीश कुमार के खिलाफ संज्ञान ले लिया, लिहाजा हाईकोर्ट को इस केस को ही खत्म कर देना चाहिये.

    नीतीश के खिलाफ भी तगड़ी दलील
    उधर, नीतीश कुमार के खिलाफ खड़े वकील दीनु कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों को कोर्ट में पेश कर दिया. दीनु कुमार के मुताबिक किसी भी मर्डर केस को बगैर ट्रायल के हाईकोर्ट खत्म नहीं कर सकता. लिहाजा, नीतीश कुमार को बाढ़ कोर्ट में जाकर मर्डर केस का ट्रायल फेस करना चाहिये.

    वकीलों की फौज नहीं खत्म करा पायी केस
    नीतीश कुमार के लिए उतरी वकीलों की फौज हाईकोर्ट से नीतीश के खिलाफ केस खत्म नहीं करा पायी. हां, फौरी राहत जरूर मिली. हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई को 17 जनवरी तक के लिए टाल दिया है. 17 जनवरी को मामले पर अगली सुनवाई होगी

  • मोदी की विदेश यात्राओं पर 2000 करोड़ और योजनाओं के प्रचार में 5200 करोड़ रुपए हुए खर्च

    नई दिल्ली. एनडीए सरकार ने साढ़े चार साल के कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों और योजनाओं के प्रचार में करीब 7200 करोड़ रुपए खर्च किए। मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद 84 विदेश दौरे किए, जिसमें करीब 280 मिलियन डॉलर यानी 2 हजार करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। मोदी की महत्वकांक्षी योजनाओं के प्रचार-प्रसार में वर्तमान केंद्र सरकार ने 5200 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

    राजवर्धन राठौर ने प्रचार के खर्च के बारे में दी जानकारी
    ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने संसद में एक सवाल के जवाब में बताया कि प्रधानमंत्री ने जितनी बार विदेश यात्रा की, उनमें सबसे ज्यादा खर्च एयर इंडिया वन के रखरखाव और सुरक्षित हॉटलाइन को स्थापित करने में लगे हैं। इसी तरह प्रचार में हुए खर्च के बारे में सूचना प्रसारण राज्य मंत्री राजवर्धन राठौर ने जवाब दिया।

    ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने संसद में एक सवाल के जवाब में बताया कि प्रधानमंत्री ने जितनी बार विदेश यात्रा की, उनमें सबसे ज्यादा खर्च एयर इंडिया वन के रखरखाव और सुरक्षित हॉटलाइन को स्थापित करने में लगे हैं। इसी तरह प्रचार में हुए खर्च के बारे में सूचना प्रसारण राज्य मंत्री राजवर्धन राठौर ने जवाब दिया।

    प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने दुनिया के लगभग सभी बड़े नेताओं से मुलाकात की है। इनमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे शामिल हैं। ज्यादातर मुलाकातें वैश्विक मामलों में भारत के प्रभाव को बढ़ावा देने और अपने रणनीतिक हितों को सुरक्षित करने के लिए की गईं।

    मोदी की कुछ यात्राएं ,जिनमें वुहान में जिनपिंग के साथ अनौपचारिक मुलाकात शामिल है, कूटनीतिक सफलता के तौर पर देखा जाता है। चीन के राष्ट्र प्रमुख के साथ यह बैठक उस समय हुई थी, जब डोकलाम विवाद कोे लेकर दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने थीं। नवंबर 2016 में नोटंबदी के ऐलान के बाद मोदी जापान दौरे पर गए थे, जिसपर विपक्ष ने काफी सवाल उठाए थे।

  • राफेल पर राहुल गांधी ने कहा-चौकिदार चोर है अपने दोस्त अंबानी को कराई चोरी,हम साबित करके रहेंगे

    नई दिल्ली: राफेल डील पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस जांच के लिए संसदीय समीति (जेपीसी) गठित करने की मांग पर अड़ी है। राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि जेपीसी जांच हो गई तो नरेंद्र मोदी और अनिल अंबानी कितना भी छुप लें, बच नहीं पाएंगे। भाजपा ने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस अध्यक्ष शीर्ष अदालत से ऊपर हैं जो फैसले को नहीं मान रहे हैं? इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने राफेल सौदे में जांच की मांग वाली सभी याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि इसमें शक की कोई गुंजाइश नहीं।

    राहुल ने कहा, ”कई साल से राफेल विमान सौदे में भ्रष्टाचार की बात चल रही थी। हमारे सवाल हैं कि विमान 1600 करोड़ में क्यों खरीदा गया? एचएएल से कॉन्ट्रैक्ट क्यों छीनकर अनिल अंबानी को दिया गया? हिंदुस्तान के युवाओं से रोजगार क्यों लिया? फ्रांस की सरकार को क्यों कहा कि आप हवाई जहाज फ्रांस में बनाइए? मोदीजी के फ्रांस से लौटने के बाद रक्षा मंत्री ने कहा था कि मुझे कुछ नहीं मालूम। फ्रांस के राष्ट्रपति ओलांद कहते हैं कि सीधे मोदी ने 36 विमानों का ऑर्डर दिया।”

    मोदी राफेल पर क्यों कुछ नहीं बोलते: राहुल
    कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इस मामले में प्रधानमंत्री तो कुछ बोलते नहीं। अरुण जेटली, निर्मला सीतारमण बोलती हैं। हमने जेपीसी की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र में फैसला दिया। इसमें कोर्ट ने कहा कि सीएजी रिपोर्ट में लिखी राफेल की कीमत की जानकारी संसदीय समिति के साथ साझा की जाए। क्या ये रिपोर्ट रखी गई, नहीं।

    सीएजी रिपोर्ट संसद में रखी जाए: खड़गे मल्लिकार्जुन खड़गे
    ने कहा- ”सीएजी के पास भी राफेल की कीमत की कोई रिपोर्ट नहीं है। मैंने डिप्टी सीएजी को बुलाकर पूछा- उन्हें भी पता नहीं। ये सब क्या चल रहा है। अगर रिपोर्ट संसद में आएगी तो पब्लिड डोमेन में आएगी। ये रिपोर्ट आई कहां से, किसने दी। कानून ये कहता है कि जब तक ये संसद में नहीं रखी जाएगी, तब तक इसके बारे में बोलने का किसी को अधिकार नहीं है।”

    राहुल ने पीएसी को लेकर चुटकी ली
    राहुल गांधी ने कहा, ”आज की दुनिया में हो सकता है कि मोदीजी ने अपनी पीएसी प्रधानमंत्री कार्यालय में बैठ रखी हो। मोदीजीआप जितना छिपना चाहते हैं छिप जाइए। आप नहीं बच सकते हैं। जिस दिन जांच हो गई। ये जांच संसद करेगी। जिस दिन हो गई। नरेंद्र मोदी-अनिल अंबानी नहीं रहेंगे।”

    राहुल ने प्रधानमंत्री को गाली दी: रविशंकर
    केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, ”राहुल गांधी ने ईमानदार प्रधानमंत्री को गाली दी। सुप्रीम कोर्ट ने राहुल के झूठ से पर्दा उठा दिया है, लेकिन वे शीर्ष अदालत के फैसले को स्वीकार नहीं कर रहे हैं। क्या कांग्रेस और उसके अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट से ऊपर हैं? राहुल हमसे कई सवाल पूछते हैं, आज हम उनसे एक सवाल करते हैं। जब 2006 से 2011 के बीच दैसो के टेंडर की कीमत कम थी तो आपने राफेल डील फाइनल क्यों नहीं है? तब आपको किसने रोका था?”