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  • भाजपा की रथयात्राओं पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने रोक लगाई,सिंगल बेंच का फैसला पलटा,प बंगाल सरकार की अपील

    मिल्लत टाइम्स,कोलकाता:कलकत्ता हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस की बेंच ने भाजपा की रथ यात्राओं पर रोक लगा दी है। बेंच ने मामला ट्रायल कोर्ट में दोबारा विचार के लिए भेज दिया है। इसके अलावा सिंगल बेंच से कहा कि इस मामले में खुफिया एजेंसियों की जानकारी पर भी विचार किया जाए। गुरुवार को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने ही इन यात्राओं को मंजूरी दी थी। इस फैसले के खिलाफ बंगाल सरकार ने चीफ जस्टिस की बेंच में अपील की थी।

    भाजपा ने सिंगल बेंच के फैसले को निरंकुशता के मुंह पर तमाचा बताया था
    सिंगल बेंच के फैसले में रथयात्राओं को मंजूरी दिए जाने के बाद भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था- यह फैसला निरंकुशता के मुंह पर तमाचा है।

    सिंगल बेंच के फैसले में रथयात्राओं को मंजूरी दिए जाने के बाद भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था- यह फैसला निरंकुशता के मुंह पर तमाचा है

    भाजपा ने बंगाल सरकार द्वारा रथ यात्राओं की अनुमति ना दिए जाने पर हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हालांकि, गुरुवार को सिंगल बेंच के फैसले से पहले भी एक बेंच भाजपा की अपील खारिज कर चुकी थी। रथ यात्रा राज्य के 24 जिलों से गुजरनी है।

    राज्य सरकार ने रथ यात्रा की अनुमति संबंधी भाजपा के पत्रों का जवाब नहीं दिया था। इस पर पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई थी। राज्य सरकार ने कोर्ट में तर्क दिया था कि भाजपा की रथ यात्रा से साम्प्रदायिक तनाव फैल सकता है।

    शाह की रथ यात्रा के जरिए 40 दिन में 294 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करने की योजना है। यात्रा 7 दिसंबर को कूच बिहार से, 9 दिसंबर को दक्षिण 24 परगना के काकद्वीप से और 14 दिसंबर को तारापीठ से रवाना करने की योजना थी।

  • राजीव गांधी का भारत रत्न सम्मान वापस लेने की मांग, विधानसभा में प्रस्ताव पास

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:दिल्ली विधानसभा ने शुक्रवार को एक रेजोल्यूशन पास किया। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से भारत रत्न सम्मान वापस लेने की मांग की गई है। इसकी वजह 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों को वजह बताया गया है। सदन में रेजोल्यूशन को आप विधायक जरनैल सिंह ने पेश किया था जिसे ध्वनिमत से पास कर दिया गया।

    सिख दंगों को नरसंहार करार दिया
    प्रस्ताव में कहा गया कि दिल्ली सरकार को गृह मंत्रालय को कड़े शब्दों में लिखकर देना चाहिए कि राष्ट्रीय राजधानी के इतिहास के भयंकर जनसंहार के पीड़ितों के परिवार और उनके करीबी न्याय से वंचित हैं।

    प्रस्ताव में कहा गया कि दिल्ली सरकार को गृह मंत्रालय को कड़े शब्दों में लिखकर देना चाहिए कि राष्ट्रीय राजधानी के इतिहास के भयंकर जनसंहार के पीड़ितों के परिवार और उनके करीबी न्याय से वंचित है

    सदन ने अरविंद केजरीवाल सरकार को निर्देश दिए कि वह गृह मंत्रालय से कहे कि भारत के घरेलू आपराधिक कानूनों में मानवता विरोधी अपराध और जनसंहार को शामिल करने के लिए सभी महत्वपूर्ण और जरूरी कदम उठाए जाएं। हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने सिख विरोधी दंगा मामले में पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को उम्रकैद का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।

    इस पर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने कहा- “राजीव गांधी ने देश के लिए अपनी जान दी। आप का असली चेहरा सामने आ गया है। मैंने हमेशा माना है कि आप भाजपा की बी टीम है। आप ने गोवा, पंजाब, मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़ में अपने उम्मीदवार उतारे ताकि भाजपा की मदद हो सके और कांग्रेस का वोट कटे।”

    हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने भी 17 दिसंबर को ट्वीट किया था- राजीव गांधी के सभी अलंकार वापिस ले लिए जाने चाहिए और उनके नाम से चल रही सभी योजनाओं तथा प्रकल्पों से राजीव गांधी का नाम मिटा देना चाहिए। जब तक उन सबको सजा न मिले जो इसमें शामिल थे या जिन्होंने इस नरसंहार का समर्थन किया चाहे फिर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हों जिन्होंने इस नरसंहार का यह कहकर समर्थन किया हो कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है, उन्हें भी मरणोपरांत सजा दी जानी चाहिए।

    1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने थे। 1991 में उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया।

  • अपने बच्चों की होती है फ़िक्र,क्योंकी पुलिस अफसर से ज्यादा गाय की हत्या को महत्व दिया जा रहा है :नसीरुद्दीन शाह

    नसीरुद्दीन ने कहा- पुलिस अफसर से ज्यादा गाय की हत्या को महत्व दिया जा रहा
    उन्होंने कहा- जहर फैल चुका है, ये हालात जल्दी सुधरने वाले नहीं

    मिल्लत टाइम्स,मुंबई: मॉब लिंचिंग को लेकर अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने कहा कि कई जगहों पर पुलिस अफसर से ज्यादा गाय की हत्या को महत्व दिया जा रहा है। शाह ने अपने बेटे की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि जहर फैल चुका है, इस जिन्न को बोतल में बंद करना मुश्किल होगा। कानून को अपने हाथों में लेने की खुली छूट मिल गई है।

    शाह ने एक इंटरव्यू में कहा, “मुझे मजहबी तालीम मिली थी। लेकिन रत्ना (पत्नी) को नहीं। वे लिबरल परिवार से आती हैं। मैंने अपने बच्चों को मजहबी तालीम नहीं दी, क्योंकि मेरा ये मानना है कि अच्छाई और बुराई का मजहब से कुछ लेना-देना नहीं। मुझे फिक्र होती है कि अपने बच्चों के बारे में कि कल को उनको अगर भीड़ ने घेर लिया कि तुम हिंदू हो या मुसलमान, तो उनके पास तो कोई जवाब ही नहीं होगा।”

    हालात जल्दी सुधरने वाले नहीं- शाह

    उन्होंने कहा, “मुझे इस बात की फिक्र होती है कि हालात जल्दी सुधरते नजर नहीं आ रहे। इन बातों से मुझे डर नहीं लगता, गुस्सा आता है। ये गुस्सा हर सही सोचने वाले इंसान को आना चाहिए। ये हमारा घर है, हमें यहां से कौन निकाल सकता है।”

    3 दिसंबर को बुलंदशहर में हुई थी हिंसा
    उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर में 3 दिसंबर को गोकशी के शक में हिंसा हुई थी। इस दौरान भीड़ ने पुलिस टीम पर भी हमला किया था। हमले में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की मौत हो गई थी। उन्हें गोली लगी थी।

  • उपेंद्र कुशवाहा के महागठबंधन में शामिल होने का बिहार की सियासत में क्या होगा असर??सबनवाज अहमद

    विश्लेष्ण:-
    चुनावी गणित के लिहाज से देखें तो बिहार की 243 विधानसभा सीटों में करीब 63 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां कुशवाहा समुदाय के मतों की संख्या 30 हजार से ज्यादा है.

    उपेंद्र कुशवाहा आखिरकार महागठबंधन में शामिल हो गए. गुरुवार को जब उन्होंने इस बात का ऐलान किया तो उनके साथ आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, हम नेता जीतन राम मांझी, कांग्रेस नेता शाक्ति सिंह गोहिल और अहमद पटेल के अलावा शरद यादव भी मौजूद थे. जाहिर है यह बिहार की राजनीति के लिए बड़ा बदलाव माना जा रहा है. जातीय गोलबंदी के लिहाज से भी एक नया समीकरण बना है, लेकिन सवाल ये है कि उपेन्द्र कुशवाहा के एनडीए छोड़ने और महागठबंधन में शामिल होने का असर धरातल की राजनीति पर कितना होगा??.

    आंकड़ों के लिहाज से देखें तो 2014 के लोकसभा चुनाव में कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी ने एनडीए के साथ गठबंधन किया था, लेकिन पार्टी अकेले दम पर महज 3 प्रतिशत वोट ही ला पाई थी. दूसरी ओर, उस समय नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने 2014 के चुनाव में अकेले 15 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया था.

    जाहिर है वोट शेयर के मामले में आरएलएसपी से जेडीयू ने पांच गुना ज्यादा वोट शेयर हासिल किए थे. 2015 के विधानसभा चुनाव में आरएलएसपी के साथ आने के बाद भी कुशवाहा वोटर एनडीए के साथ नहीं आए थे. यही नहीं, कई उपचुनावों में भी कुशवाहा समाज ने एनडीए का साथ नहीं दिया था, यानी उपेन्द्र कुशवाहा फैक्टर का फायदा एनडीए को अधिक नहीं मिला है.

    चुनावी गणित के लिहाज से देखें तो बिहार की 243 विधानसभा सीटों में करीब 63 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां कुशवाहा समुदाय के मतों की संख्या 30 हजार से ज्यादा है. किसी भी विधानसभा में 30 हजार मतदाता बहुत अहम फैक्टर हैं. इसके अलावा बाकी विधानसभा सीटों पर भी कुशवाहा मतदाता की संख्या मामूली नहीं है, लेकिन सवाल यही उठता है कि कुशवाहा समुदाय में उपेन्द्र कुशवाहा कितनी पकड़ रखते हैं.

    दरअसल बिहार में कुशवाहा समुदाय 6 से 7 प्रतिशत तक की हिस्सेदारी रखती है. अब तक इस तबके का अधिकतर वोट नीतीश कुमार के पाले में ही गिरता रहा है. वहीं बिहार में अब सियासी समीकरण भी बदल गए हैं, क्योंकि नीतीश कुमार एनडीए गठबंधन में हैं. जाहिर है गठबंधन का वोट शेयर और बढ़ने की संभावना है. मीडिया के तमाम सर्वे भी यही बता रहे हैं कि नीतीश के आने से एनडीए की स्थिति मजबूत है. ऐसी स्थिति में अगर कुशवाहा एनडीए से अलग भी होते हैं तो बीजेपी को इसका खास मलाल नहीं होगा.

    हकीकत ये है कि 2013 में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के गठन के बाद भी कुशवाहा मास के नहीं, मीडिया के लीडर रहे हैं. जमीन पर उनका जनाधार उतना कभी नहीं रहा है, जितना उन्हें महत्व मिलता रहा है. साढ़े चार साल तक केंद्रीय मंत्री रहते हुए भी कुशवाहा का बिहेवियर सीजन्ड पॉलिटिशियन का रहा है. ऐसे में उनकी विश्वसनीयता पर हमेशा सवाल रहे हैं. वहीं 2005 में नीतीश कुमार में लोगों की एक विश्वसनीयता बनी है. 15 साल में काम के बदौलत बिहार की राजनीति में अपना एक इम्पैक्ट बना लिया है. लेकिन जबसे नितीश ने महा गठबंधन से नाता तोड़ा है माइनॉरिटी वोट बैंक राजद के साथ दिखाई दे रहा है, और इधर बढ़ते अपराध की वजह से इसमें भारी गिरावट भी आई है, जनता नीतीश कुमार की राजनीतिक पलटी की वजह से पसन्द भी नही कर रहे है।

    दूसरी बड़ी बात ये है कि कुशवाहा की पार्टी के दो विधायक और एक मात्र एमएलसी ने साथ छोड़ एनडीए का दामन थाम लिया है. वहीं कुशवाहा के समर्थन में जो नेता नजर आ रहे हैं उनमें सांसद अरुण कुमार एनडीए के साथ रहने की दलील देते रहे हैं. नागमणि और भगवान सिंह कुशवाहा जैसे नेता दलबदल में माहिर रहे हैं.

    ऐसे हालात में जिस ‘सियासी खीर’ की उम्मीद उपेन्द्र कुशवाहा कर रहे थे शायद उसका स्वाद कुछ खास न हो. क्योंकि इसका राजनीतिक लाभ उन्हें उतना नहीं मिलने जा रहा जितने की वे उम्मीद किए बैठे हैं. हालांकि इसका फायदा आरजेडी जरूर उठाएगी और बिहार में पिछड़ी और दलित जातियों के एक चेहरे के तौर पर तेजस्वी के लिए एक परसेप्शन जरूर बनेगा. बहरहाल आने वाले वक्त में बिहारी राजनीति में फिलहाल पक रही सियासी खीर जमीन पर कितना असर दिखाती है यह देखना दिलचस्प होगा.

    लेखक_
    सबनवाज अहमद
    (पत्रकारिता छात्र मानु हैदराबाद)

  • कोर्ट ने इम्तियाज के कातिल 8 गौ रक्षकों को सुनाया उम्र कैद की सजा,तथा 25-25 हजार जुर्माना

    बालूमाथ थाना क्षेत्र के झाबर गांव में 17 मार्च 2016 को दो जानवर व्यवसाई का कत्ल करके उनकी लाश को पेड़ से लटका दिया गया था मॉब लिंचिंग का शिकार होने वाले सिरहन थाना क्षेत्र के नवादा गांव के रहने वाले मजलूम अंसारी 35 साल और छोटू उर्फ इम्तियाज 18 साल के थे

    मिल्लत टाइम्स, झारखंड :झारखंड की लातेहार कोर्ट ने बालूमाथ मॉब लिंचिंग मामले के सभी 8 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है साथ ही सभी पर 25 25 हजार रू का जुर्माना भी लगाया गया है जुर्माना जमा नहीं कराने की हालत में सजा में 1 साल का इजाफा हो जाएगा सजा पाने वालों में बालूमाथ के रहने वाले अरुण शाह, प्रमोद शाह, शाहदेव सोनी ,मिथिलेश साहू ,अवधेश साह, मनोज साहू, मनोज कुमार साह और विशाल तिवारी शामिल है

    बालूमाथ थाना क्षेत्र के झाबर गांव में 17 मार्च 2016 को दो जानवर व्यवसाई का कत्ल करके उनकी लाश को पेड़ से लटका दिया गया था मोब लिंचिंग का शिकार होने वाले हीर हंज थाना इलाका के नवादा गांव के रहने वाले मजलूम अंसारी 35 साल और छोटू उर्फ इम्तियाज 18 साल के थे

    दूसरे दिन मामला सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा हो गया था इस मामले में 8 लोगों को मुजरिम बनाया गया था जिन्हें अदालत ने इस मामले में कसूरवार साबित किया जिसके बाद बुध को तमाम मुजरिम को अदालत हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया था

    आपको मालूम हो कि 2016 में जब या मामला फैला था तो इसकी आवाज पार्लियामेंट में भी सुनाई पड़ी थी जिसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए 18 मार्च को ही पांच मुजरिम को गिरफ्तार कर लिया था जबकि तीन मुजरिम को बाद में 22 मार्च को सरेंडर कर दिया था

  • सोहराबुद्दीन केस की जांच करने वाले आईपीएस रजनीश राय ने दिया ‘इस्‍तीफा’

    (सबनवाज अहमद / मिल्लत टाइम्स)
    2005 सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस की जांच करने वाले गुजरात कैडर-1992 बैच के आईपीएस अधिकारी रजनीश राय ने अचानक से ‘इस्‍तीफा’ दे दिया है। हालांकि उन्‍होंने स्‍वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया था जिसे गृह मंत्रालय ने ठुकरा दिया था।

    आंध्र प्रदेश के चित्‍तूर जिले में काउंटर इनसर्जेंसी और एंटी-टेररिज्‍म स्‍कूल के आईजी पद पर तैनात राय ने एक नोट लिखकर नौकरी छोड़ने की घोषणा की। स्‍वैच्छिक सेवानिवृत्ति के आवेदन पर उन्‍हें ईमेल कर कहा गया कि “गृह मंत्रालय के सक्षम प्राधिकारी द्वारा रिटायरमेंट का उनका आवेदन अस्‍वीकार किए जाने के बाद, वह फौरन ड्यूटी ज्‍वाइन करें।”

    शिलांग में तैनाती के समय, 2017 में राय ने असम में दो कथित आतंकवादियों के मारे जाने को ‘संदिग्‍ध एनकाउंटर’ बताते हुए रिपोर्ट दी थी। इसके बाद उन्‍हें शिलांग से चित्‍तूर ट्रांसफर किया गया था।

    उससे पहले वह झारखंड में यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के विजिलेंस ऑफिसर थे, जहां उन्‍होंने कॉर्पोरेशन में कथित भ्रष्‍टाचार पर रिपोर्ट तैयार की थी। राय ने सिफारिश की थी कि कॉर्पोरेशन के कई वरिष्‍ठ अधिकारियों पर आपराधिक मामले चलाए जाएं। इस रिपोर्ट के लिए सरकार ने ”बिना सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लिए” कार्रवाई करने पर उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।

    इस साल, 23 अगस्‍त को राय ने 50 वर्ष की आयु पूरी करने पर सरकार की स्‍वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) के तहत रिटायरमेंट के लिए अप्‍लाई किया था। उन्‍होंने वीआरएस के लिए ऑल इंडिया सर्विसेज (मृत्यु-सेवानिवृत्ति लाभ) नियम, 1958 का हवाला दिया था। धारा 16(2) के तहत, 50 वर्ष की आयु पूरी करने पर अधिकारी वीआरएस ले सकता है, बशर्ते वह निलंबित न चल रहा हो।

    23 अक्‍टूबर को सरकार की ओर से एक पत्र भेज राय को बताया गया कि उनका आवेदन खारिज कर दिया गया है क्‍योंकि ”सर्तकता के दृष्टिकोण से उन्‍हें मुक्‍त नहीं किया गया।” राय ने 30 नवंबर से रिटायरमेंट मांगा था, इसी दिन राय ने गृह मंत्रालय के सचिव को पत्र लिखकर बताया कि “उन्‍होंने चित्‍तूर के आईजी (CIAT) का पद 30 नवंबर, 2018 को कार्यदिवस समाप्‍त होने के बाद त्‍याग दिया है और उन्‍हें सेवा से रिटायर माना जाए।”

  • अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनी इंडिया की दूसरी सबसे अच्छी यूनिवर्सिटी,डियू,जेएनयू,बिएचयू,इस रैंक है बहुत पिछे

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:“यूएस न्यूज एंड वर्ल्ड रिपोर्ट बेस्ट ग्लोबल यूनिवर्सिटीज रैंकिंग 2019” ने “भारतीय ग्लोबल यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2019” में सभी भारतीय विश्वविद्यालयों के बीच दूसरे स्थान पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को रखा है।

    एजेंसी के मुताबिक, एएमयू के गणित विभाग भारत में सभी विश्वविद्यालयों और संस्थानों में और दुनिया में 154 वें स्थान पर है, जिसमें 46.9 का विषय हासिल किया है।

    इसी प्रकार, विश्व रैंकिंग बॉडी ने एएमयू में जैविक और जैव रसायन अध्ययन (लाइफ साइंस) को भारतीय विश्वविद्यालयों और संस्थानों में 35 के स्कोर और 294 की विश्व रैंकिंग के साथ सर्वश्रेष्ठ स्थान हासिल किया है।

    एमयू के कुलपति, प्रोफेसर तारिक मंसूर ने उपलब्धि पर खुशी ज़ाहिर की है। उन्होंने इस बेहतरीन सफलता पर विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों और छात्रों, विशेष रूप से गणित विभाग और जीवन विज्ञान विभाग को बधाई दी है, जिसने भारत और विदेशों में विश्वविद्यालय की स्थिति बढ़ा दी है। उन्होंने भविष्य में यूनिवर्सिटी से जुड़े सदस्यों और छात्रों से सभी संभावित सुधारों के लिए कड़ी मेहनत करने का आग्रह किया।

    इसके अलावा, इसने 465 वें स्थान पर एएमयू के भौतिकी विभाग और दुनिया भर के सर्वश्रेष्ठ वैश्विक विश्वविद्यालयों में 518 वें स्थान पर रसायन विज्ञान विभाग भी स्थान दिया है।

  • आगरा में आग मे जलाई गई छात्रा ने तोड़ा दम,परसो कुछ गुंडों ने पेट्रोल छिड़ककर जिंदा जलाया था

    तस्वीर का इस्तेमाल सांकेत के लिए किया गया है

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: मानवता को शर्मसार करने वाली या खबर इंसान का दिल दहला देगी परसों कुछ अज्ञात गुंडों ने पेट्रोल छिड़ककर जला दिया था जिंदा एक नन्हे से फरिश्ते को ना किसी से कोई दुश्मनी ना कोई झगड़ा फिर भी उसको गवानी पड़ी है अपनी जान

    आगरा में दो दिन पहले अज्ञात लोगों द्वारा आग के हवाले की गई 15 वर्षीय एक लड़की ने यहां सफदरजंग अस्पताल में बृहस्पतिवार को दम तोड़ दिया। पुलिस के अनुसार 10वीं में पढ़ने वाली छात्रा को मंगलवार को दो अज्ञात लोगों ने रोका और उसके ऊपर कथित तौर पर पेट्रोल छिड़ककर लाइटर से आग लगा दी।

    सफदरजंग अस्पताल के एक चिकित्सक ने बताया कि चेहरे समेत उसके शरीर का 55 फीसदी हिस्सा जल गया था और धुएं के चलते उसकी श्वास नली भी जल गई थी जिससे उसे सांस लेने में दिक्कत आ रही थी। उन्होंने बताया कि बीती देर रात उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था लेकिन वह बच नहीं पाई और रात डेढ़ बजे के करीब उसकी मौत हो गई।

    पुलिस ने बताया कि शुरुआत में लड़की को आगरा के एस एन मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन बाद में उसे नयी दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल भेज दिया गया था। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश कर रही है।

    क्या है पूरा मामला
    उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के मलपुरा क्षेत्र के गांव लालऊ में मंगलवार दोपहर बाइक सवार दो युवकों ने कक्षा दस की छात्रा को पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया था । दुस्साहसी हमलावरों ने छात्रा के घर के पास ही पहले उस पर पेट्रोल डाला फिर लाइटर से आग लगा दी थी। छात्रा स्कूल से घर लौट रही थी। हेलमेट लगाए बाइक सवार युवक वारदात को अंजाम देकर आराम से फरार हो गए।

    छात्रा को 80 फीसदी झुलसी हालत में एसएन मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती कराया गया था जहां से नई दिल्ली के लिए रेफर कर दिया गया। घटना उस वक्त हुई जब मात्र 15 किमी दूर डीजीपी ओपी सिंह आगरा मंडल की कानून व्यवस्था की समीक्षा कर रहे थे।

    स्कूल से घर लौट रही थी छात्रा
    गांव लालऊ निवासी जूता कारीगर हरेंद्र सिंह जाटव की बेटी संजलि (15 वर्ष) घर से डेढ़ किमी दूर गांव नौमील स्थित अशर्फी देवी इंटर कॉलेज में कक्षा दस की छात्रा है। दोपहर 1:40 बजे स्कूल की छुट्टी हुई। वह साइकिल से लौट रही थी। करीब सवा दो बजे लालऊ पुलिया के पास बाइक सवार दो युवकों ने उसे रोका। बोतल खोली और सिर पर पेट्रोल डाल दिया। लाइटर से आग लगाकर वे भाग गए। घटना के वक्त शहर में सितारा होटल अमर विलास में डीजीपी ओपी सिंह जोन की समीक्षा बैठक ले रहे थे। सूचना से पुलिस प्रशासन के होश उड़ गए। एडीजी अजय आनंद, डीआईजी लव कुमार और एसएसपी अमित पाठक इमरजेंसी आ गए।

    मर्मांतक चीख सुनकर दहले लोग
    संजलि साइकिल सहित सड़क किनारे खाई में गिर पड़ी। लपटों से घिरी किशोरी जैसे-तैसे सड़क पर पहुंची। उसकी मर्मांतक चीख सुनकर राहगीरों के होश उड़ गए। इस दौरान उसने जमीन पर लेटकर आग बुझाने की कोशिश की। वहां से गुजर रहे युवक अजय ने उसके घर खबर दी। मां अनीता मौके पर पहुंच गई। बाद में सूचना पर पिता हरेंद्र भी एसएन मेडिकल कालेज की इमरजेंसी पहुंच गए। घटना से क्षेत्र में दहशत है।

    कंडक्टर ने फायर एक्सटिंग्यूशर से आग बुझाई
    दिल दहलाने वाली वारदात जिस वक्त हुई उसी दौरान मौके से एक बस गुजर रही थी। किशोरी को फड़फड़ाते देखकर चालक ने बस को रोका तो कंडक्टर ने बस में मौजूद फायर एक्सटिंग्यूशर को निकालकर आग बुझाई। सूचना पर पहुंची यूपी-100 से संजलि को एसएन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। छात्रा करीब 80 प्रतिशत जल गई है। उसे दिल्ली रेफर किया गया है। आग से छात्रा का बैग जलकर राख हो गया।

    न किसी से रंजिश न कोई शक
    झुलसी अवस्था में एसएन मेडिकल कालेज में छात्रा ने पुलिस को इशारों से बताया कि कुछ दिन पहले दो युवकों ने पीछा किया था। उसकी साइकिल को धक्का दिया था। पिता हरेंद्र ने कहा कि उनकी किसी से रंजिश नहीं। न ही किसी पर शक है। उनका कहना था कि संजलि ने भी उनसे पूर्व में किसी की कोई शिकायत नहीं की थी।

  • महागठबंधन में शामिल हुए उपेंद्र कुशवाहा,कहा-एनडीए में हो रहा था मेरा अपमान,साथ मे,तेजस्वी,शरद,मांझी,पटेल,भी थे मौजूद

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: बिहार में एनडीए का साथ छोड़ने वाली रालोसपा अब महागठबंधन में शामिल हो गए हैं रालोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने आज दिल्ली में महागठबंधन में शामिल हो गए हैं वह दूसरी तरफ लोजपा भी अब एनडीए को तलाक देने के कगार पर हैं

    2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर बिहार की राजनीति में सरगर्मियां बढ़ गई हैं। विपक्षी महागठबंधन की संभावनाएं लगातार होती जा रही हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के सहयोगी रहे राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के मुखिया उपेंद्र कुशवाहा विपक्ष के महागठबंधन में शामिल हो गए हैं। इसी को लेकर कुशवाहा, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव, शरद यादव व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी आज ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के दिल्ली स्थित कार्यालय पहुंचे। वरिष्ठ कांग्रेस नेता अहमद पटेल भी यहां मौजूद रहे।

    बिहार राजनीति में अहम दखल रखने वाले इन नेताओं की कांग्रेस से यह मुलाकात 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर भाजपा के विरुद्ध बन रहे महागठबंधन के निर्माण में अहम भूमिका निभा सकती है। हाल ही में तीन राज्यों में शानदार प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस के लिए भी लोकसभा चुनावों में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए अच्छा मौका हो सकता है। पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के परिणामों से कांग्रेस यूं भी उत्साह में है।

    बता दें कि इससे पहले बिहार में महागठबंधन के लिए सीट बंटवारे का फॉर्मूला तैयार कर लिया गया है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने इस बारे में कहा था कि चीजें शाम तक साफ हो जाएंगी। उन्होंने कहा था कि महागठबंधन के लिए उपेंद्र कुशवाहा को भी आमंत्रित किया गया है। क्षेत्रीय दलों को कुचलने का प्रयास किया गया है। यहां तक कि लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) भी मोदी जी की गुटबंदी से खुश नहीं है।

    बिहार को पीएम मोदी ने ठगा : तेजस्वी
    महागठबंधन को लेकर हो रही बैठक में राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार को ठगने के अलावा कुछ नहीं किया। महागठबंधन की लड़ाई देश व संविधान बचाने के लिए है। उपेंद्र कुशवाहा के महागठबंधन में शामिल होने को लेकर उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि बिहार में शिक्षा व्यवस्था के लिए कुशवाहा ने बहुत लड़ाइयां लड़ी हैं। तेजस्वी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि महागठबंधन ठगों को करारा जवाब देगा।

    एनडीए में मेरा अपमान हो रहा था : उपेंद्र कुशवाहा
    महागठबंधन में शामिल होने के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि एनडीए छोड़ने का कारण यह था कि वहां मेरा अपमान हो रहा था। उन्होंने राहुल गांधी व लालू यादव का आभार जताया और कहा कि इन दोनों नेताओं ने उदारता दिखाई। उन्होंने एनडीए पर निशाना साधते हुए कहा कि पीएम मोदी व नीतीश कुमार ने कहा था कि अब बिहार के लोगों के लिए दवाई व कमाई के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा, लेकिन क्या ऐसा हुआ? कुशवाहा ने कहा वर्तमान सरकार हर मोर्चे पर फेल है। न तो यहां शिक्षा का स्तर सुधरा न रोजगार के रास्ते खुले।

    राहुल गांधी की कथनी-करनी में फर्क नहीं : कुशवाहा
    कुशवाहा ने मोदी व नीतीश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नीतीश कुमार व मोदी सरकार ने बिहार को सिर्फ वादे दिए, उन्हें पूरा नहीं किया। उन्होंने कहा कि हमें और हमारी पार्टी को कमजोर करने की कई कोशिशें की गईं ताकि हम सोशल जस्टिस की बात न कर सकें। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को लेकर कहा कि गांधी की कथनी व करनी में कोई अंतर नहीं है।

    नीतीश ने मुझे नीच कह कर अपमानित किया : कुशवाहा
    कुशवाहा ने नीतीश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा, ‘नीतीश जी ने मुझे नीच कह कर अपमानित किया।’ किसानों की कर्जमाफी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष की तारीफ की। इसके साथ ही एलान किया कि दो फरवरी को सरकार के खिलाफ पटना में आक्रोश मार्च निकालेंगे।

    राहुल गांधी व लालू यादव की वजह से शामिल हुआ : कुशवाहा
    बिहार महागठबंधन में शामिल होने की बात पर कुशवाहा ने कहा कि हमारे पास कई ऑप्शन थे, यूपीए उनमें से एक था। किसानों की कर्जमाफी का कार्य कर राहुल गांधी ने अपनी बात सिद्ध कर दी। राहुल गांधी की दरियादिली और लालू यादव मेरे गठबंधन से जुड़ने की अहम वजह हैं लेकिन सबसे बड़ा कारण यही है कि मैं यहां बिहार के लोगों के लिए हूं।

  • तृणमूल सांसद ने पूछा,तीन साल में कितने किसानों ने कि आत्महत्या,सरकार ने कहा हमारे पास डेटा नहीं

    तस्वीर का प्रयोग प्रतीकात्मक रूप में क्या गया है

    मिल्लत टाइम्स,नई दिल्लीःभारत एक कृषि प्रधान देश होने के बावजूद यहां के किसान की हालत इतनी ज्यादा दयनीय है कि किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हो रही है अाखिर इसके जिम्मेदार कौन हैं हर चीज की सरकार के पास डाटा होती है लेकिन किसान के आत्महत्या की डाटा तक नहीं है इससे क्या साबित हो रहा है

    2016 से अब तक कितने किसानों ने आत्महत्या की है, इससे जुड़ा सरकार के पास कोई डेटा नहीं है। केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने मंगलवार को संसद में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नेशनल क्राइम ब्यूरो (एनसीआरबी), जो ऐसे मामलों में डेटा इकट्ठा करती है, उसने 2016 से आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या का कोई डेटा जारी नहीं किया।

    एनसीआरबी की वेबसाइट पर 2015 तक के आंकड़े
    तृणमूल कांग्रेस सांसद दिनेश त्रिवेदी ने सवाल पूछा था कि 2016 से अब तक कितने किसानों ने आत्महत्या की और सरकार ने उनके परिवारों के लिए क्या किया?

    तृणमूल कांग्रेस सांसद दिनेश त्रिवेदी ने सवाल पूछा था कि 2016 से अब तक कितने किसानों ने आत्महत्या की और सरकार ने उनके परिवारों के लिए क्या किया?

    राधामोहन सिंह ने लिखित जवाब में बताया कि गृह मंत्रालय के अंतर्गत एनसीआरबी आत्महत्याओं के बारे में जानकारी एकत्र कर उसे प्रसारित करती है। एनसीआरबी की वेबसाइट पर 2015 तक के आंकड़े मौजूद हैं, जबकि 2016 और उसके बाद के अभी तक जारी नहीं किए गए।

    मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकारें एनसीआरबी को इससे जुड़ा डाटा भेजती हैं। इन आंकड़ों को इकट्ठा कर उसे जारी किया जाता है।

    2015 में 8 हजार से ज्यादा किसानों ने की आत्महत्या
    एनसीआरबी के मुताबिक, 2015 में 8 हजार किसानों ने आत्महत्या की। सबसे ज्यादा आत्महत्याएं महाराष्ट्र में हुईं। महाराष्ट्र में 3000, तेलंगाना में 1358, कर्नाटक में 1197 किसानों ने आत्महत्याएं की।

    2015 में खेती से जुड़े 4500 मजदूरों ने भी आत्महत्या की। रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर आत्महत्याएं कर्ज या दिवालिया होने की वजह से हुईं। इससे पहले 2014 में 5,650 किसानों ने आत्महत्या की थी।