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  • जन्मदिन मुबारक हो प्रिय अखिलेश यादव

    २०१२ का यूपी चुनाव जिसने भी देखा है उसे याद होगा कि कैसे अचानक एक नौजवान साइकिल से चलकर पूरा यूपी नाप डालता है। उस नौजवान की आँखों में तमाम नए सपने थे जो उसने संजोए थे अपने प्रदेश के लिए, अपनी पार्टी के लिए, मुल्क की जनता के लिए। आँखों में सुंदर स्वप्न और व्यवहार में गजब की आत्मीयता लिए वह युवक राजनीपदार्पण करतापर है और बहुत कुछ उलट-पलट कर रख देता है।

    समाजवादी विचारधारा पर खड़ी पार्टी जो उस वक्त प्रौढ़ावस्था की तरफ़ मुड़ चुकी होती है उसमें अखिलेश यादव का अविर्भाव एक प्रगतिशील, लिबरल और बहुत कुछ बड़ा करने के लिए आतुर युवा के तौर पर होता है।

    अखिलेश यादव वह शख़्सियत हैं जो अपने कर्मक्षेत्र में तमाम बड़े परिवर्तनों और अपने स्वभाव में अद्वितीय विनम्रता बरकरार रखने वाले राजनेता के तौर पर लोगों के दिलों में अमिट छाप छोड़ चुके हैं।

    एक मुख्यमंत्री के तौर पर जिस रफ़्तार से उन्होंने यूपी जैसे बीमारू समझे जाने वाले राज्य को महज़ पाँच सालों में विकास के जिस पथ पर दौड़ाया है वह अविस्मरणीय है।

    जिस राज्य की सड़कें अपने गड्डों की वजह से पूरे देश में कुख्यात थीं वहाँ अखिलेश यादव महज़ १८ महिनों के अल्प समय में एक ऐसी सड़क बनाकर देते हैं जिसकी गुणवत्ता महज़ इस बात से समझी जा सकती है कि आपातस्थिति में उस पर लड़ाकू विमान तक उड़ान भर सकते हैं।

    एक ऐसा राज जहां कई-कई बच्चे स्नातक, परास्नातक होने के बाद भी निर्धनता की वजह से कंप्यूटर या लैपटॉप जानते तक नहीं थे वहाँ बारहवीं उत्तीर्ण करने के बाद हर बच्चे को लगातार पाँच साल hp के बेहतरीन लैपटॉप सरकार ने मुफ़्त देकर “ज्ञान की क्रांति” का मार्ग खोल दिया।

    राजधानी लखनऊ में HCL-IT City, Amul, Lulu Mall जैसी बड़ी कंपनियाँ खड़ी कर दी गईं जिससे रोज़गार सृजन किया जा सके। ना मालूम कितने ही नए अस्पताल बनाए गए और जर्जर हो चुके पुराने अस्पतालों का कायाकल्प किया गया।

    डायल१००, १०९० जैसी विश्वस्तरीय व्यवस्थाएँ नागरिकों को दी गईं जिनकी वजहों से एक समय अपराधों के लिए कुख्यात रहे राज्य में बेहतर क़ानून व्यवस्था को संभव किया गया। चार-चार ज़िलों में मेट्रो ट्रेन का DPR बनकर तैयार किया गया जिसमें से लखनऊ में को मेट्रो शुरु भी हो गई है।
    किसानों एवं लघु उद्योगों को सुदृढ़ करने के लिए नई मंडियाँ बनाने का काम किया गया जिससे उनकी उपज का बेहतर मूल्य उन्हें उपलब्ध कराया जा सके।

    लोहिया ग्राम योजना, लोहिया ग्रामीण बस सेवा के माध्यम से दूरदराज़ के इलाक़ों को मुख्य शहरों से जोड़ा गया। समाजवादी एंबुलेंस सेवा के माध्यम से बीमारु राज्य की बीमारी को दूर करने का रास्ता खोजा गया।

    पाँच साल के कार्यकाल में MBBS की सीटें दोगुनी की गईं, तमाम सरकारी दफ़्तरों की जर्जर हो चुकीं इमारतों को विश्वस्तरीय नईं इमारतों में स्थानांतरित किया गया जिससे सरकारी काम में तेज़ी एवं गुणवत्ता आई। इतिहास की अनमोल धरोहरों को संरक्षित किया गया जिसकी बानगी किसी भी पुरातात्विक महत्व वाली इमारत को देखकर समझी जा सकती है।

    जिस राज्य की प्रमुख पहचान वहाँ के महिलाओं के पिछड़ेपन को लेकर थी वहाँ उन्हें पढ़ने के लिए विद्याधन दिया गया। पिंक ऑटो देकर आत्मनिर्भर बनाया गया।

    एसिड अटैक से पीड़ित महिलाओं के लिए Sheroes Hangout जैसी शानदार पहल को हरी झंडी दिखाई गई। साहित्य, कला, सिनेमा, इतिहास, समाजसेवा और अन्य क्षेत्रों में काम कर रहे लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए “यशभारती” जैसा सम्मान दिया गया।

    सिनेमा को प्रोत्साहित करने के लिए कई तरह की पहल की गई जिसके फलस्वरूप अचानक से यूपी के शहर बॉलीवुड के रूपहले पर्दे पर छाने लगे।

    पर्यावरण प्रेमी अखिलेश यादव ने नदियों की सफ़ाई के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाई और उसे धरातल पर साकार करके भी दिखाया जिसका सबसे बढ़िया उदाहरण गोमती है। हर शहर में पार्कों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया गया उनमें ओपन जिम जैसी चीजें लगवाईं गईं, साइकिल पथ बनवाए गए जिससे सड़कों पर ट्रैफ़िक के भार को कम किया जा सके और साइकिल चलाने वाले स्कूल के विद्यार्थियों को और अन्य लोगों की सुरक्षा गारंटी दी जा सके।

    कुंभ मेले का अभूतपूर्व आयोजन किया जिसे UN जैसी वैश्विक संस्था ने सम्मानित किया। कुंभ की आयोजन समिति का अध्यक्ष श्री आज़म खान जी से करवाकर अखिलेश यादव ने पूरी दुनिया के सामने सांप्रदायिक संकीर्णता को नकार देने का अप्रतिम उदाहरण दिया ऐसी और भी बेहतरीन कामयाबियां हैं एक कुशल मुख्यमंत्री के तौर पर श्री अखिलेश यादव के हिस्से में पर वो सब फिर कभी।

    अब आते हैं दूसरे पहलू पर; एक संगठनकर्ता के तौर पर अखिलेश यादव।
    यहाँ भी अखिलेश पूरी तरह से सफल ही नज़र आते हैं। एक बूढ़ी हो चली पार्टी को वह अचानक से नौजवान करने के काम में जुट जाते हैं और इतनी मोहब्बत अपने हर एक युवा कार्यकर्ता के दिल में अपने ओजस्वी नेतृत्व से भर देते हैं कि यूपी के तमाम युवा अपने प्रिय नेता के नाम पर अपनी जवानी तक क़ुर्बान करने को तैयार हो जाते हैं। वो प्रेम जिसने भी देखा वह चकित रह गया, तमाम विपक्षी पार्टियों के नेताओं के दिलों पर अखिलेश की लोकप्रियता साँप की तरह लोटने लगी।

    हम उन दिनों सुदूर दक्षिण में थे हमनें खुद देखा है तिरुपति, चेन्नई से लेकर हैदराबाद तक के लोगों को अखिलेश यादव के बारे में उत्साहपूर्ण बात करते हुए।

    क्या शानदार माहौल था यूपी में अखिलेश जी के नेतृत्व में। इतवार को बेख़ौफ़ लखनऊ वाले रात में “गंजिंग” करते थे। अधिकारी और सरकार में शामिल मंत्री फुर्सत के वक्त तनाव को कम करने के लिए क्रिकेट खेला करते थे। उन पलों ने यूपी के माहौल में सकारात्मकता भर दी थी जो विकास के लिए सर्वोत्तम बात थी।

    राजनेता के तौर पर भी अगर हम देखें तो पाएंगे अखिलेश यादव यहाँ भी विलक्षण रहे। कांग्रेस और बसपा के साथ किए गए उनके गठबंधन भले ही चुनावी मैदान में सफल ना हुए हों लेकिन इन गठबंधनों की वजह से सपा के तमाम नौजवान कार्यकर्ता के वैचारिक उथलेपन को दूर करने में कामयाबी ज़रूर मिली है।

    समाजवादी पार्टी के पोस्टर पर बाबा साहेब की तस्वीर का आना और सपा के कार्यकर्ताओं का गांधी को जानना इन गठबंधनों का ही नतीजा रहा जो निश्चित तौर पर एक उज्ज्वल भविष्य की ओर इंगित करता है और यह संभव हो पाया सिर्फ़ और सिर्फ़ अखिलेश यादव की गहरी दृष्टि और स्पष्ट आचरण की वजह से।

    हमारे लिए अखिलेश यादव दुनिया के उन बड़े विजनरी नेताओं की श्रेणी में खड़े होते हैं जो अपने शुभकर्मों से बंजर ज़मीन में भी विकास की फसल उगा सकते हैं।

    अखिलेश यादव एक आज्ञाकारी पुत्र के तौर पर, एक श्रेष्ठ पति के तौर पर, एक सुंदर पुरा के तौर पर और एक नेकदिल राजनेता के तौर पर जनता के सामने आते हैं और उसके दिलों पर राज करते हैं।

    संप्रदाय, जाति, भाषा जैसे तमाम मसलों से ऊपर उठकर सभी के हित में “काम के बोलने” की राजनीति करने वाले हरदिल अज़ीज़ टीपू भैया को जन्मदिन की बहुत बहुत मुबारकबाद।
    -पवन यादव

  • मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कुशल रणनीति को अन्य नेता समझ नही पाये।

    1998 मे गहलोत के मुख्यमंत्री के रुप मे उदय होने के बाद एक एक करके अन्य नेता पस्त होते जा रहे है।

    ।अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अचानक 1998 मे मुख्यमंत्री बनने के बाद आज तक जब जब प्रदेश मे कांग्रेस की सरकार बनी है तब तब गहलोत ही मुख्यमंत्री बने है। इसके अलावा गहलोत की राजनीतिक चतुराई के सामने धीरे धीरे एक एक करके दिग्गज व जातीय आधार वाले मजबूत राजनेता धाराशायी होते चले गये। आज राजस्थान मे कांग्रेस पोलिटिक्स मे मजबूत जातीय बेश का एक भी नेता नही बचा है। कमोबेश कोई जातीय बेश का नेता है तो माली जाती बेश का नेता स्वयं मुख्यमंत्री गहलोत को ही मान सकते है। जो अपने उन अधीकांश जातीय मतो के सहारे पार्टी के अंदर के विरोधी नेताओं का बैंड बजवा देते या फिर हितेषी की नेया पार लगवा देते है।

    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सत्ता मे रहे या सत्ता के बाहर लेकिन उनका कांग्रेस संगठन के अलावा एक अलग से प्रदेश के कोने कोने मे सुचना व हितैषी तंत्र कायम रहता है। जो तंत्र हरदम हरकत मे रहकर गहलोत के खिलाफ व पक्ष मे होते राजनीतिक षडयंत्र व प्लान पर नजर रखकर समय रहते उन्हें अवगत करवाने मे रेडी रहते है। गहलोत के राजनीतिक, समाजिक व जनरल स्तर पर प्रदेश भर मे कायम सुचना तंत्र के वर्कर का गहलोत भी सत्ता मे आने पर विशेष ध्यान रखते है। वो पुरी कोशिश करते है कि जायज तरीको से उन्हें आर्थिक लाभ होता रहे।

    उक्त सूचना तंत्र मे काम करने वालो मे मुख्यमंत्री के विश्वासी लोगो को या उनके परिवार जनो को बाकायदा नियमानुसार उनकी योग्यता स्तर के हिसाब से स्टेट व जिला कंज्यूमर कोर्ट, ट्रिब्यूनल व विभिन्न बोर्ड-निगम एवं समितियों मे एडजस्ट किया जाता है। जहां उन्हे वेतन या भत्ते के तौर पर अच्छा खासा माहना मिलता रहे। ऐसी जगह तीन मे से एक या पांच मे से दो सदस्य मुख्यमंत्री के विश्वास वाले वर्कर ऐपोंईट हो जाते है तो उनके कारण राजनीतिक भूचाल भी नही मचता है। वही ऐसे लोग आर्थिक रुप से टूट भी नही पाते है।

    कुल मिलाकर यह है कि राजस्थान मे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधायको को अपने अपने क्षेत्र का दिखते तौर पर हमेशा बादशाह बनाकर मस्त रखा है। वही अपने विश्वास के लोगो का भी विशेष ध्यान रखकर उन्हें हमेशा अपने साथ जोड़े रखा है। जिस जिस खांचे मे बीना किसी राजनीतिक धमाचौकड़ी किये अपने खास लोगो को एडजस्ट किया जा सकता है वहां वहाँ मुख्यमंत्री उनको एडजस्ट करते आये है। तभी बीना किसी मजबूत राजनीतिक जातीय आधार के बावजूद अशोक गहलोत तीसरी दफा मुख्यमंत्री बन पाये है। प्रदेश के कोने कोने मे विश्वासी लोगो को बीना राजनीतिक विवाद पैदा किये जोड़े रखने की अशोक गहलोत की कला के सामने राजस्थान के बाकी नेता काफी बोने नजर आते है। गहलोत की इसी राजनीतिक चतुराई व रणनीति के कारण प्रदेश मे उनका 1998 मे मुख्यमंत्री के रुप मे उदय होने के बाद दुसरा कोई उनके बराबर का नेता अभी तक बन नही पाया है।

  • घोसी:आम बिनते समय विद्युत तार के चपेट में आने से आठ वर्षीय बालिका की हुई मौत

    मुजफ्फरुल इस्लाम

    घोसी(मऊ)। घोसी कोतवाली क्षेत्र के रामपुर कुटी पर शुक्रवार को आम बिनते समय विद्युत तार के चपेट में आने से आठ वर्षीय बालिका की मौत हो गई।मिली जानकारी के अनुसार रामपुर निवासी ज्योति पुत्री पिंटू बाँसफोर जो कि रामपुर स्थित कुटी पर आम बीन रही थी कि अचानक पहले से गिरे विद्युत तार की चपेट में गर्दन आ गई जिससे उसके शरीर से सर अलग हो गया एवं मौके पर ही मौत हो गई ।सूचना के उपरांत मौके पहुँची पुलिस ने शव को कब्जे में ले पोस्टमार्टम हेतु जिला अस्पताल भेजवाया।

  • राजस्थान मे भारतीय प्रशासनिक सेवा IAS के एक सो तीन अधिकारियों के तबादले।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान प्रशासनिक ढांचे मे भारी फैर बदल करते हुये भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के एक सो तीन अधिकारियों के तबादले किये है। जिसमे प्रमुख रुप से मुख्य सचिव डीबी गुप्ता के स्थान पर राजीव स्वरूप को नया मुख्य सचीव बनाया गया है।

    उक्त भारी फैर बदल मे अनेक जिला कलेक्टर भी बदले गये है। पर प्रदेश मे पोस्टेड दो मुस्लिम जिला कलेक्टर हनुमानगढ़ जाकीर हुसैन व झूंझुनू उमरदीन खान पर विश्वास जताते हुये उन्हें नही बदला गया है। इसी तरह सीधे तौर पर बने आईऐएस मे कमर उल जमा चोधरी को आयुक्त, नगर निगम उदयपुर व अतर अमीर को मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद जयपुर के पद पर लगाया गया है। इसके अतिरिक्त अतर अमीर की पत्नी टीना ढाबी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी, श्रीगंगानगर लगाया गया है।

    कुल मिलाकर यह है कि जयपुर कलेक्टर पद पर इतिहास मे दूसरी दफा राजस्थान प्रशासनिक सेवा से पद्दोनत होकर भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी (ओबीसी वर्ग) बनने को लगाया है। वही पहले से लगे दोनो मुस्लिम कलेक्टरस पर विश्वास जताते हुये उन्हें हटाया नही गया है।

  • मऊ:आकाशीय बिजली की चपेट में आकर युवक की मौत

    मुज़फ्फरुल इस्लाम
    घोसी,मऊ। स्थानीय कोतवाली क्षेत्र के कल्यानुपर अस्पताल के पास आकाशीय विद्युत की चपेट में आकर बुधवार को जमीन हाजीपुर निवासी विशुन चौहान की मौत हो गई। वह दोपहर करीब दो बजे निजी कार्य हेतु जा रहा था। तभी बारिश होने लगी कल्यानपुर स्थित अस्पताल से गुजर रहा था कि आकाशीय बिजली उसपर गिर पड़ी। वह वहीं बेहोश हो गया। मौके पर मौजूद लोग उसे आनन-फानन में एक अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टरों ने उसे जांचोपरान्त मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव का पंचनामा बना पोस्टमार्टम हेतु जिला अस्पताल भेज दिया।

  • मुस्लिम समुदाय को शादियों को सस्ता से सस्ता व तालीम को मयारी से मयारी बनाने के लिये मुकाबला अब करना ही होगा।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    हालाकि भारत भर के मुस्लिम समुदाय मे एक मुहीम चला कर शादियों को हर मुमकिन सस्ती से सस्ती व तालीम को मयारी से मयारी बनाने के लिये किसी ना किसी रुप मे मुकाबलाती मुहीम किसी ना किसी समाजी संगठन या शख्स के मार्फत पिछले कुछ समय से तेजी के साथ चलाई जा रही है। लेकिन इस मुहीम को पूरी तरह सोला आन्ना सफल करने के लिये राजस्थान के शेखावाटी जनपद की जमीन व शिक्षामय माहोल बडा उपयोगी साबित हो सकता है। अगर भारत भर के माहिरीन व स्थानीय समाज जरा सा अपना ध्यान इस तरफ करके उक्त बातो पर अमल करने की कोशिश पुरा दम लगा कर करने लगे तो साजगार परिणाम आते दैर ना लगेगी। सीकर मे कायम ऐक्सीलैंस नामक तालिमी इदारे के साथ साथ शेखावाटी जनपद के सीकर चूरु व झुंझुनू जिलो मे जगह जगह कायम अनेक तालिमी इदारो ने क्षेत्र मे तालीम को आम करने मे महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करके खास तौर पर महिला शिक्षा के प्रति जन जाग्रति लाकर उस कहावत को चरितार्थ किया है कि पढी लिखी लड़की दो परिवारों की रोशनी होती है।

    अगर हम शेखावटी जनपद पर जरा नजर डाले तो शादियों को कम से कम खर्चीला बनाने के साथ साथ तमाम फिजूलखर्ची को बंद करने के लिये कायमखानी यूथ ब्रिगेड व अन्य कुछ संस्थाओं ने दिन रात कड़ी मेहनत करके समुदाय मे बदलाव लाने मे प्रयासरत है। जिसका परिणाम यह निकल कर आ रहा है कि शादी मे होने वाली फिजूलखर्ची कृने के बजाय लोगो ने उस बचत को अब बच्चो की मयारी तालीम दिलाने पर खर्च करना शुरु कर दिया है। खासतौर समुदाय मे अब बेटीयो को मयारी तालीम दिलाने के लिये भी आपसी मुकाबला होना शुरु हो गया है। जो बनते सूनहरे भविष्य की तरफ साफ ईशारा कर रहा है।

    शेखावाटी जनपद के झूंझुनू जिले की फराह, इशरत, तसनीम, रुकसार व सीकर की परवीन सहित अनेक बेटियो ने फौज व प्रशासनिक सेवा के अलावा न्यायिक सेवा मे चयनित होकर अपनी तरक्की की लाईन को लम्बा व समाज को दिशा देने को लगातार प्रयासरत है। तो मेडिकल व इंजीनियरिंग के क्षेत्र मे केवल बेटिया हजारों हजार जाने के लिये कोचिंग करने व सलेक्ट हो कर सरकारी व गैर सरकारी सेवा कर रही है। विभिन्न तरह की अन्य सेवाओ मे खासतौर पर झुंझुनू जिले की हजारों बेटियां विभिन्न तरह की कोचिंग ले रही है। पिछले दिनो झूंझुनू जिले के एक साधारण परीवार के व्यक्ति से बात होने पर उस शख्स ने बताया कि पेट काटकर बचाये पैसो से वो फाईनल की परीक्षा देने के तूरंत बाद भारतीय सिवील सेवा की तैयारी कराने के लिये अपनी बेटी का प्रवेश दिल्ली की नामी कोचिंग संस्थान मे करवाया है। जहां जीके विषय की फीस एक लाख साठ हजार व बाकी हर ओफनल विषय की फीस साठ हजार व रहने का खर्चा अलग है। वालदेन की शिद्दत की दाद देनी होगी कि वो ईद मनाने बेटी को गावं ना बूलाकर खूद दिल्ली बेटी के पास जाकर ईद मनाकर आये है। उक्त एक शानदार व शबक लेने वाला उदाहरण है। लेकिन जनपद की सैंकड़ों बेटीया इसी तरह दिल्ली व भारत के दुसरे क्षेत्र मे सिवील सेवा की तैयारी कर रही है। इनमें लड़को की तादात बेशक बेटियो से कम हो सकती है।

    कुल मिलाकर यह है कि सीकर मे कायम ऐक्सीलैंस नामक तालिमी ईदारे के बानी वाहीद चोहान सहित शेखावाटी जनपद के अनेक लोगो की सामुहिक कोशिशों से शेखावाटी क्षेत्र मे काफी हद तक बेटा-बेटी की तालीम दिलाने का भेद अब जाकर लगभग खत्म हो चला है। अब जाकर हर परीवार बेटा बेटी दोनो को मयारी तालीम दिलाने मे अपनी हेसियत व पहुंच के मुताबिक़ हर मुमकिन कोशिश करने लगा है। पर इस परवाज को ओर अधिक ऊंचाई देने का काम सामाजिक संस्थाओं को करना होगा। इसके अतिरिक्त विश्वव्यापी मंदी व कोविड-19 के कारण जारी लोकडाऊन ने हम सबको हिलाकर रख दिया है। ऐसे डर के माहोल मे एक मात्र शिक्षा ने ताकत बक्शी है। एवं तालीम की अहमियत का पग पग भर अहसास हुवा है।

  • साबिक मंत्री यूनुस खांन की पांच लाख रुपयो की मदद से सीकर के कायमखानी छात्रावास के विस्तार भवन निर्माण को गति मिली।

    अशफाक कायमखानी।सीकर।
    कुछ महिनो पहले सीकर कायमखानी छात्रावास मे साबिक स्टुडेंट्स के आयोजित एक भव्य समारोह मे शिरकत करते हुये उपस्थित लोगो को सम्बोधित करते हुये राजस्थान सरकार के साबिक वजीर यूनुस खान ने शिक्षा की अहमियत व आवश्यकता पर बोलते हुये कहा था कि कोमी फला व बहबूदी के लिये सामुहिक तौर पर प्रयास किये जाये तो सफलता पाने मे समय नही लगता है। उन्होंने उस समय सीकर कायमखानी छात्रावास की खाली पड़ी जमीन पर आधुनिक सुविधाओं युक्त नये तौर पर भवन बनाकर उनमे स्टूडेंट्स को शिक्षामय वातावरण उपलब्ध कराने पर जौर दिया था।

    कायमखानी यूथ ब्रिगेड की पहल पर समाज के अधीकांश मोजिज लोगो की मोजूदगी मे 14-जुन कायम खां डे के पावन अवसर के दिन सीकर कायमखानी छात्रावास विस्तार भवन की संगे बुनियाद रखी गई है। जिसमे प्रत्येक कोमी फर्द अपनी तरफ से सहयोग करने का वादा करते हुये सहयोग कर रहा है। इसी कड़ी मे सीकर के कुछ समाजी कारकूनो का एक समूह साबिक वजीर यूनुस खांन से डीडवाना जाकर मिला तो उन्होंने तूरंत पांच लाख राशि की मदद नकद देने के साथ इसके अतिरिक्त पांच लाख का सहयोग आगे चलकर देने का वादा किया है।

    कुल मिलाकर यह है कि सीकर कायमखानी छात्रावास के बन रहे आधुनिक विस्तार भवन के लिये आर्थिक तौर पर मदद करने मे काफी लोग आगे आये व आ रहे है। जिनमे सीकर कायमखानी छात्रावास के पूर्व छात्र व राजस्थान सरकार के साबिक वजीर यूनुस खान द्वारा दख लाख रुपये के सहयोग करने का वादा कर तूरंत पांच लाख की राशि नकद प्रदान करके व बाकी पांच लाख का सहयोग जल्द करने के आवश्वासन के बाद कोमी स्तर पर उनकी उक्त कदम की सहरायना होती नजर आ रही हैः

  • घोसी,कांग्रेसियों ने डीज़ल पेट्रोल के बढ़ते दामों को लेकर राष्ट्रपति के नाम 6 सूत्रीय ज्ञापन दे विरोध प्रदर्शन किया

    रिपोर्टर:-मुज़फरुल इसलाम
    घोसी,मऊ।जिला कांग्रेस कमेटी मऊ द्वारा बुधवार को स्थानीय नगर के मझवारा मोड़ से पैदल मार्च निकाल तहसील मुख्यालय पहुँच उपजिलाधिकारी घोसी आशुतोष कुमार राय के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम छः सूत्रीय ज्ञापन दे विरोध प्रदर्शन किया।जिला अध्यक्ष इंतखाब आलम के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति से वर्तमान सरकार की दमनकारी नीतियों एवं जन विरोधी बताते हुए कोरोना संक्रमण जैसी वैश्विक महामारी में हुए लॉक डाऊन में डीजल एवं पेट्रोल के अभूतपूर्व मूल्य वृद्धि को देखते हुए देश के नागरिकों के हित मे मूल्यवृद्धि आपके निर्देश पर सरकार द्वारा तत्काल वापस लिया जाय।ज्ञापन देने वालों में मुख्यरूप से बृजेश पांडे,धनेश कुमार,विजयशंकर,सम्प्पत मौर्य,राधेश्याम,त्रिवेणी,मलिक सिराजुद्दीन आदि उपस्थित रहे।

  • सीएलपी उप नेता आफताब अहमद व उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला की मुलाकात, एनएच 248 ए व आईएमटी पर बैठक

    हरियाणा कांग्रेस विधायक दल के उप नेता चौधरी आफताब अहमद ने चंडीगढ़ में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला मुलाकात की जिसमें मुद्दा नूह से अलवर बॉर्डर तक राष्ट्रीय राजमार्ग 248 ए के फोर लेन के काम को शुरू करने व आईएमटी मेवात में युवाओं के रोजगार के अवसरों के लिए कंपनी लगाने की मांग रही।

    नूह विधायक व कांग्रेस विधायक दल के उप नेता चौधरी आफताब अहमद ने उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला को कहा कि 2014 में कांग्रेस सरकार में उन्होंने गुड़गांव अलवर मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग 248 ए का दर्जा दिलाया था। गुड़गांव से नूह तक फोर लेन हो गया था, नूह से अलवर सीमा तक सड़क को चौड़ा किया गया था। पूरे काम का डी पी आर बन चुका था कोई प्रक्रिया बाकी नहीं थी।

    केंद्र में व प्रदेश में सरकार बदलने के बाद काम को रोक दिया गया जो दुर्भाग्य पूर्ण है। सीएलपी उप नेता आफताब अहमद ने उप मुख्यमंत्री को कहा कि छह सालों में कुछ काम परियोजना पर नहीं हुआ है।
    उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने उप नेता कांग्रेस विधायक दल आफताब अहमद को आश्वस्त किया कि वो उनकी मांग को पूरा करने के लिए हर सकारात्मक करवाई करेंगे। प्रदेश सरकार मामले को गंभीरता से लेकर, आगे जरूरी करवाई करेगी।

    इसके अलावा नूह विधायक व सीएलपी उप नेता आफताब अहमद ने उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला से कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी बढ़ती जा रही है, मेवात के युवा भी बेरोजगारी से बुरी तरह से जूझ रही है, इसलिए आईएमटी मेवात जो कांग्रेस ने वहां उद्योग धंधे शुरू करने के उद्देश्य से बनाया था, छह साल बीत जाने के बाद भी एक भी कंपनी वहां प्रदेश सरकार नहीं ला सकी जो गलत है।
    आफताब अहमद ने उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला से मांग की है कि आईएमटी मेवात में कंपनी लगाई जाएं, ताकि युवा वर्ग को रोजगार मिल सके। नूह विधायक ने एक बात और जोड़ते हुए कहा कि यहां आने वाली कंपनियों में यहां के स्थानीय बच्चों को विशेष रूप से प्राथमिकता देकर नौकरी दी जाए। उप मुख्यमंत्री ने कांग्रेस उप नेता को आश्वस्त किया है कि आईएमटी मेवात में कंपनियां जल्द आएंगी और वहां के युवाओं को भी रोजगार देने की दिशा में जरूरी क़दम उठाएंगे और उनकी मांगों को सकारात्मक सोच के साथ पूरा किया जाएगा।

    आफताब अहमद ने उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला से मुलाकात के बाद बाहर पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि नूह से अलवर बॉर्डर का फोर लेन किया जाना बहुत जरूरी है, गुड़गांव से नूह तक का काम हो चुका है, सरकार अब इस परियोजना को मुंबई वडोदरा एक्सप्रेस वे की आड में बंद करना चाहती है जो दुर्भाग्यपूर्ण है। गुड़गांव अलवर मार्ग का महत्व अलग है, एक्सप्रेस वे का अलग है।
    आईएमटी मेवात में भी 6 साल बीत जाने के बाद भी कंपनी ना लाना सरकार की मानसिकता को दर्शाता है। आज उप मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद उन्हें सकारत्मक आश्वाशन मिला है, उम्मीद है कि दल गत राजनीति से ऊपर उठकर सरकार मेवात के विकास की बात सोचेगी।

    सीएलपी उप नेता आफताब अहमद ने कहा कि उन्होंने पहले मुख्यमंत्री से भी मांग की थी, विधानसभा में भी मामला उठाया था, कई पत्राचार कर चुके हैं, एनएचएआई को भी लिखा है, लेकिन समाधान अभी हुआ नहीं है।

  • मुस्लिम समुदाय के पीछड़ने के कारण स्वयं मुसलमान को तलासने होगे।

    अशफाक कायमखानी।जयपुर।
    हालांकि प्रिंटिंग प्रैस से लेकर आंखो की रोशनी बढाने के लिये आंखो पर चश्मा लगाने के अलावा लाऊडस्पीकर पर अजान देने की शुरुआत होते समय मुस्लिम समुदाय का एक तबका इनके उपयोग के सख्त विरोध मे आ खड़ा हो कर आर पार की लड़ाई लड़ने को तैयार था। लेकिन धीरे धीरे इस तहर की वेज्ञानिक तरक्की की उपयोगिता के बढते कदमो की जद मे वो तबका भी आकर फायदा उठाने लगा जो कभी इसका सख्त विरोधी हुवा करता था।

    कुरान ऐ पाक की हिदायतों व शिक्षा को जो शख्स अच्छे से समझकर पढ लेता है तो उसके जेहन के बल्ब्स जगमगाते लगाते है। पता चलेगा कि आज की विज्ञान व वैज्ञानिकों द्वारा किये जा रही खोज के बारे मे कुरान ऐ पाक ने जो बहुत पहले बताया था, वो सबकुछ आज साफ साफ नजर आ रहा है। इतना सबकुछ होने के बावजूद हमरा एक तबक आज भी विज्ञान की तरक्की का सदुपयोग करने की मुखालफत करने से नासमझी के कारण बाज नही आ रहा है।

    विश्व भर मे कोविड-19 के रुप मे आई वबा के कारण आज हर इंशान पेशोपेश मे नजर आ रहा है। भारत मे 24-मार्च से जारी लगातार लोकडाऊन ने जीवन के हर पहलू को पूरी तरह बललकर रख दिया है। आज जदीद तालीम की अधीकांश शेक्षणिक संस्थानो ने अपने स्टुडेंट्स की शिक्षा को जारी रखने के लिये आनलाइन पद्वति का सदुपयोग किया व कर रहे है। जबकि बडी तादाद मे जकात-खेरात व अन्य इमदाद जमा करके चलने वाले मुस्लिम समुदाय के मदरसे समय की रफ्तार के साथ नही चल पाने के कारण आज सभी मदरसे अपने स्टुडेंट्स को आनलाइन पढा पाने मे सक्षम नही पा रहे है। जिसका कारण साफ है कि हमारे मदरसे व उनके संचालक वक्त की जरूरत को पहचानने व अपने आपमे एव मदरसों मे आवश्यकता अनुसार बदलाव लाने मे कमजोर साबित हुये है। अगर समय समय पर अपने अड़यल रुख को त्याग कर रोज बदलती तकनीक का ठीक से उपयोग करने का जेहन बनाकर उसके मुताबिक़ मदरसों मे बदलाव की बयार बहाई जाती तो आज अन्य जदीद तालीम पाने वाले स्टुडेंट्स की तरह मदरसों के स्टुडेंट्स भी आनलाइन अपनी तालीम को जारी रख पाने मे सफल होते।

    कुल मिलाकर यह है कि कोविड-19 के प्रकोप के चलते बचाव की खातिर जारी लोकडाऊन मे रोज आये बदलाव व मुश्किलों से मुस्लिम समुदाय व उनके कुछ कथित लीडरान को सबक लेकर अपने आप मे बदलाव लाना होना। अगर बदलाव लाकर वक्त की रफ्तार को ठीक से पहचान करके कुरान ऐ पाक के हर लफ्ज़ को ठीक ठीक समझकर वैज्ञानिक क्रांति को अपने पर विचार करना होगा।